17 जुलाई 2026 को क्रिकेट के महानतम हरफनमौला खिलाड़ी सर गारफ़ील्ड सोबर्स का निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे। पेश है अपने ही जीवन में किंवदंती बनने वाले इस व्यक्तित्व के प्रति पुरवाई पत्रिका की श्रद्धांजलि – संपादक
- सूर्यकांत शर्मा
क्रिकेट के संपूर्ण खिलाड़ी सर गारफील्ड सोबर्स, 17 जुलाई 2026 को बारबाडोस में 89 वर्ष की आयु में अपनी अनंत यात्रा पर चले गए। क्रिकेट की सारी कलाएं एक ही शरीर यानी सर गारफील्ड सोबर्स में थीं। बाएं हाथ से आक्रामक बल्लेबाजी, तेज गेंदबाजी, बाएं हाथ की स्पिन,कलाई से चाइना-मैन और क्षेत्र रक्षण में चीते की सी फुर्ती वाली सजगता। विश्व का सर्वप्रथम महानतम ऑलराउंडर यानी हरफनमौला खिलाड़ी। उनके खेल में शक्ति के साथ सौंदर्य था। तकनीक के साथ निडरता थी। वे जीवन में भी उतने ही बिंदास और परोपकारी व्यक्ति भी रहे।
क्रिकेट के महानतम ऑलराउंडर सर गारफील्ड सोबर्स (गैरी सोबर्स) का जन्म 28 जुलाई 1936 को बारबाडोस के सेंट माइकल में हुआ था। उनका पूरा नाम गारफील्ड सेंट ऑबर्न सोबर्स था। उनके जन्म समय से ही दोनों हाथों में छह-छह उंगलियां थीं जिसे उन्होंने स्वयं तेज चाकू और कैटगट (सर्जिकल टांका)की मदद से हटा दिया था। उनका बचपन बेहद सामान्य और संघर्ष-पूर्ण बीता था। पांच वर्ष की आयु में ही उनके पिता कनाडाई मर्चेंट नेवी में नाविक के पद पर कार्य करते हुए द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मन हमले में मारे गए थे। उनकी माता थेल्मा ने अकेले ही अपना छह बच्चों का पालन पोषण बेहद सजगता से किया था और सोबर्स ने अपनी आत्म कथा में उनकी ममता और परवरिश का जिक्र किया है। बचपन में लिलिपुटियन क्रिकेट जिसमें तार की गेंद और लकड़ी के टुकड़े से बने बल्ले का प्रयोग होता था, खेलते हुए बड़े हुए। जहाँ से वे अपनी असाधारण प्रतिभा के दम पर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटरों में शुमार हुए। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने मूल रूप से एक गेंदबाज के रूप में की थी, लेकिन बाद में वे दुनिया के सबसे खतरनाक और स्टाइलिश बल्लेबाजों में से एक बन गए।
वे एक सच्चे खिलाड़ी और बेहतरीन इंसान रहे। उनकी एक बानगी कुछ यूं रही सन 1962 में वेस्ट इंडीज़ दौरे के दौरान, भारतीय कप्तान नरीमन कॉन्ट्रैक्टर को जब तेज गेंदबाज चार्ली ग्रिफिथ की बाउंसर बाल, सर में लगी और उसी कारण वश उनके सर के ऑपरेशन के दौरान सर फ्रैंक वारेल और सर गारफील्ड सोबर्स द्वारा रक्तदान कर उनका जीवन बचाना उनके व्यक्तित्व की मात्र बानगी भर रही। बारबाडोस में जन्मे सोबर्स ने 16 की उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया था।
सर गैरी सोबर्स ने 1954 से 1974 के बीच वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अपने करियर में कुल 93 टेस्ट मैच खेले। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 57.78 की बेहतरीन औसत से 8,032 रन बनाए, जिसमें 26 शतक शामिल थे। 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने नाबाद 365 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी, जो लंबे समय तक टेस्ट इतिहास का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर रहा। उनकी उम्र थी महज़ 21 साल और 213 दिन थी। यह विश्व रिकॉर्ड अगले 36 वर्षों तक कायम रहा। यह रिकॉर्ड आगे चल कर उन्हीं के देश के ब्रायन लारा ने 375 बना कर तोड़ा था। तिस पर भी सबसे कम उम्र में तिहरा रिकॉर्ड शतक अभी भी अक्षुण्ण है। देखें इतनी या इस से कम उम्र में कौन नया खिलाड़ी इस रिकॉर्ड को छू या तोड़ पाएगा!!!
एक ऑलराउंडर के रूप में उन्होंने टेस्ट मैचों में 235 विकेट चटकाए। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में उनके नाम 28,000 से अधिक रन और 1,000 से अधिक विकेट दर्ज हैं। क्रिकेट इतिहास में पहली बार फर्स्ट-क्लास मैच (1968 में नॉटिंघमशायर के लिए खेलते हुए) में एक ओवर में 6 छक्के जड़ने का विश्व रिकॉर्ड भी सर गैरी सोबर्स ने ही बनाया था। कई नामी-गिरामी खिलाड़ी वेस्टइंडीज की पहचान के वाहक रहे हैं और सोबर्स उस पीढ़ी का हिस्सा थे ,जिसने कैरेबियाई क्रिकेट को आत्मविश्वास और स्वाभिमान दिया। उनकी बल्लेबाजी में लय थी, गेंद बाजी में विविधता और कप्तानी में जोखिम लेने का साहस भी था।
यहाँ पर इस सत्य को भी अपने युवा पाठकों को बताना बेहद जरूरी है कि आज उनके रिकॉर्ड्स को कई क्रिकेटर्स से पीछे छोड़ा है पर सोबर्स साहब के क्रिकेट रिकॉर्ड यूं भी अनोखे या अप्रतिम हैं कि आज के क्रिकेट में बल्लेबाजों को उपलब्ध हेलमेट के साथ-साथ अन्य अत्याधुनिक उपकरण बिल्कुल भी न तो उपलब्ध थे न ही खिलाड़ी उसके अभ्यस्त। अतः इस संदर्भों के आलोक में ,सर गारफील्ड सोबर्स सदैव महानतम हरफन-मौला यानी ऑल राउंडर्स के स्थान पर अडिग रहेंगे।
क्रिकेट में उनके इस अतुलनीय योगदान के लिए साल 1975 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने उन्हें’ नाइटहुड’ (सर) की उपाधि से सम्मानित किया था। आईसीसी (ICC) ने उनके सम्मान में साल के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के लिए दिए जाने वाले पुरस्कार का नाम ‘सर गार्फील्ड सोबर्स ट्रॉफी’ रखा है। 1980 में शादी के माध्यम से दोहरे बारबाडोस-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक बन गए। 1998 में संसद के एक अधिनियम द्वारा, सोबर्स को बारबाडोस के दस राष्ट्रीय नायकों में से एक के रूप में नामित किया गया।
सर गारफील्ड सोबर्स अपनी बिंदास अदा और अंदाज़ के लिए भी जाने जाते थे। सोबर्स अपनी आक्रामक और मौज-मस्ती भरी जीवनशैली के लिए भी जाने जाते थे। कई साक्षात्कारों में उन्होंने बताया था कि वह टेस्ट मैच से पहले की रात भी अक्सर पार्टी करते थे और बिना सोए मैदान पर उतर जाते थे। दक्षिण अफ्रीकी नेता नेल्सन मंडेला उन्हें सबसे पसंदीदा क्रिकेट खिलाड़ियों में गिनते थे।
आज समूचा क्रिकेट विश्व उदास है। उनके निधन पर बारबाडोस की प्रधान मंत्री मिया मोटली ने देश में राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। भारत के उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधा कृष्णन और आईसीसी के चेयरमैन ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। क्रिकेट जगत के विभिन्न दिग्गजों और प्रमुख हस्तियों ने अपने शोक संदेशों में सर गैरी सोबर्स को याद किया है: बारबाडोस की प्रधान मंत्री, मिया मोटली: “सर गारफील्ड सोबर्स के सम्मान में पूरे द्वीप (बारबाडोस) में शोक दिवस घोषित करते हुए उन्होंने अपने आधिकारिक BBC Sport बयान में उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और उन्हें देश का राष्ट्रीय नायक बताया है”।
भारत के उप-राष्ट्रपति, सी.पी. राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया पर शोक संदेश साझा करते हुए कहा है कि “क्रिकेट जगत ने अपना एक सबसे चमकता सितारा खो दिया है”। उनके News On AIR संदेश के अनुसार, सर सोबर्स एक महान ऑलराउंडर थे जिनकी उत्कृष्टता की विरासत पीढ़ियों तक बनी रहेगी।
आईसीसी चेयरमैन, जय शाह ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की ओर से शोक व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा ICC Cricket कि “क्रिकेट ने अपना सबसे महान आइकन खो दिया है। सर सोबर्स न केवल खेल के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर थे, बल्कि इतिहास के सबसे महान क्रिकेटरों में से एक थे। भारत क्रिकेट के महान खिलाड़ियों सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, दिलीप वेंगसरकर, रवि शास्त्री, विराट कोहली ने अपनी-अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। भारत के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने याद किया कि वेस्ट इंडीज़ दौरे में इस महान खिलाड़ी ने कोहली से मिलने की काफी समय तक प्रतीक्षा की थी, उनकी इस विनम्रता और सादगी की समूचे मीडिया और क्रिकेट जगत में जम कर प्रशंसा हुई थी
यदि सार रूप में कहें तो क्रिकेट में यदि ब्रैडमैन सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज थे तो सर गारफील्ड सोबर्स इस खेल के संपूर्ण और सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी थे!
यूं भी क्रिकेट और जीवन में एक अनोखा साम्य है दोनों में अनिश्चितता अपना प्रभाव और दखल रखती है और पुरुषार्थ अपना और कहीं-कहीं भाग्य अपना। तिस पर भी क्रिकेट का यह ध्रुवतारा आने वाले वर्षों में अपनी चमक बिखेरता रहेगा और समाज के उन गरीब वंचित और साधनविहीन युवाओं को अपनी मेहनत से लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रेरणा देता रहेगा।
पुरवाई पत्रिका परिवार, उसके विश्व भर में फैले लेखकों और पाठकों की ओर से क्रिकेट के इस महानतम ऑल-राउंडर को भाव भीनी श्रद्धांजलि।

- सूर्यकांत शर्मा
पूर्व वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रसारणकर्मी, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार
मानसरोवर अपार्टमेंट फ्लैट बी-1,
प्लॉट नंबर 3, सेक्टर-5 द्वारका
नई दिल्ली 110075

क्रिकेट के महानतम ऑलराउंडर सर गारफील्ड सोबर्स (गैरी सोबर्स) के जीवन और उनकी महानतम उपलब्धियों को रेखांकित करता सुन्दर आलेख। हार्दिक बधाई, सूर्यकान्त शर्मा जी।