वो कशिश हमारी
याद है तुमको?
जो हमने तुमने
मिल कर बोयी थी
अपनी ज़िंदगी की
मीठी सी नींव
उसकी कशिश
उसका अहसास
आज भी जिंदा है
जब, तुमने मुझे छुआ था
कांप उठे थे तुम भी
खिल उठे थे
हमारे गुनगुनाते अरमान
मैं! आज भी वहीं हूं
तुम कहां खो गये
मैं! आज अकेली
वही कशिश लिये
टटोलती रहती हूंँ
उस मिट्टी को
जिसमें बसी है
तुम्हारी सोंधी खुशबू
जो आज भी मेरी
रुह में बसी है
तुम्हारे कशिश के साथ
बन कर एक मधुर अहसास..!
3 – मुझे प्यार है
हांँ मुझे प्यार है
तुम्हारी बातों से प्यार है
तुम्हारी ही दी हुई खामोशी है
उससे भी प्यार है
जिस दिन तुम आये
मेरी जिंदगीं में
उस दिन से प्यार है
तुम्हारी यादों को जो
सीने में दबाये बैठी हूंँ
मुझे उससे भी प्यार है
तुम्हारे बोलते चुप
अधरों से भी प्यार है
तुम्हारे होठों की मुस्कान
से भी प्यार करती हूंँ
तुमने जब थामा था
मेरा मखमली हाथ
अहसास से भी
मैं प्यार कर बैठी
क्या बताऊं मैं तुम्हें अब
तुम्हारे प्यार से भी प्यार है..!