Saturday, July 18, 2026
होमकविताडॉ. विभा रंजन की तीन कविताएँ

डॉ. विभा रंजन की तीन कविताएँ

1- प्यार शाश्वत है
बरसों मैने तुम्हारा
बहुत इन्तजार किया
तुम आओगे
और जरूर आओगे
तेरे आने की चाहत में
ख्यालों को बुना मैने
आकर मुस्कुरा कर
मेरी बंद पलकों पर
रखकर अपने होठ
मुझे प्यार करोगे
हाथों को थाम मुझसे
मेरा हाल पुछोगे
मेरे छलकते अश्कों
को अपने होठों
से चूम मुझे कहोगे
लो मैं आ गया
मैं तो प्यार हूंँ
आऊंगा आता रहूगा
क्योकि मैं प्यार हूंँ
प्यार शाश्वत है
प्यार कभी नहीं मरता..!
2- कशिश
वो कशिश हमारी
याद है तुमको?
जो हमने तुमने
मिल कर बोयी थी
अपनी ज़िंदगी की
मीठी सी नींव
उसकी कशिश
उसका अहसास
आज भी जिंदा है
जब, तुमने मुझे छुआ था
कांप उठे थे तुम भी
खिल उठे थे
हमारे गुनगुनाते अरमान
मैं! आज भी वहीं हूं
तुम कहां खो गये
मैं! आज अकेली
वही कशिश लिये
टटोलती रहती हूंँ
उस मिट्टी को
जिसमें बसी है
तुम्हारी सोंधी खुशबू
जो आज भी मेरी
रुह में बसी है
तुम्हारे कशिश के साथ
बन कर एक मधुर अहसास..!
3 – मुझे प्यार है
हांँ मुझे प्यार है
तुम्हारी बातों से प्यार है
तुम्हारी ही दी हुई खामोशी है
उससे भी प्यार है
जिस दिन तुम आये
मेरी जिंदगीं में
उस दिन से प्यार है
तुम्हारी यादों को जो
सीने में दबाये बैठी हूंँ
मुझे उससे भी प्यार है
तुम्हारे बोलते चुप
अधरों से भी प्यार है
तुम्हारे होठों की मुस्कान
से भी प्यार करती हूंँ
तुमने जब थामा था
मेरा मखमली हाथ
अहसास से भी
मैं प्यार कर बैठी
क्या बताऊं मैं तुम्हें अब
तुम्हारे प्यार से भी प्यार है..!
RELATED ARTICLES

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Most Popular

Latest