व्यंग्य सदा समर्थ पर किया जाता है । व्यंग्य समाज की विसंगतियों को डिटर्जेंट की तरह धो डालता है,व्यंग्य लेखक एवं आलोचक श्री बी.एल.आच्छा ने यह कहा।अवसर था, डब्ल्यूसीसी के हिंदी विभाग का वार्षिक कार्यक्रम उत्कर्ष ’23 के अंतर्गत आयोजित ‘हिंदी गद्य लेखन कार्यशाला ‘का । हिंदी साहित्य में व्यंग्य और शरद जोशी जैसे नामचीन व्यंग्यकारों की रचनाओं की बात करते हुए व्यंग्य की बारीकियों को आपने छात्रों को समझाया।लेख एवं निबंध के अंतर को भी स्पष्ट करते हुए आपने उन्हें अपने विचारों को इस विधा में लेखन के लिए प्रेरित किया।


