Sunday, June 23, 2024
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वन्दना यादव का स्तंभ ‘मन के दस्तावेज़’ – समय लगातार बदल रहा है

याद कीजिए कि पिछली बार आपके घर-परिवार में कोई शादी-विवाह कब हुआ था? यह याद करना मुश्किल लग रहा है तो चलिए कुछ और याद करने की कोशिश करते हैं। बताइए कि पारिवार में किसी सदस्य के जन्मदिन, पूजा-पाठ या अन्य आयोजन पर आपको कैसा लगा था? तैयारियों के लिए समय तो मिला ही होगा। इसके बावजूद वक्त कम पड़ गया था, है ना!  और लम्बी तैयारी के बाद आयोजन वाले दिन का क्या हाल था? कितनी दौड़भाग थी? क्या ठीक-ठीक से क्रमवार आपको सब कुछ याद है? सब कुछ कैसे याद हो सकता है! हाँ, तस्वीरों ने सब याद दिलाया होगा, है ना। तस्वीरों को देखते हुए तैयारियों की भागदौड भी याद आती होगी। तब लगता होगा कि वह समय कितनी जल्दी बीत गया… 
समय जैसा भी गुजर रहा हो, बीत ही जाता है। खुशियों से भरे दिनों में तन-मन जोश से भरा रहता है। यही कारण है कि जिम्मेदारियाँ निभाते हुए भी मन में एक उमंग-सी रहती है। घर-परिवार के सदस्य और मित्रगण मिलजुलकर काम का बँटवारा कर लेते हैं। किसी के पास कुछ कम, तो किसी के पास कुछ अधिक जिम्मेदारी आती है। और देखते ही देखते सब काम हो जाते हैं। आजकल के न्यूक्लियर परिवारों के लिए आयोजन को सफल बनाने का काम एजेन्सी सम्हाल लेती हैं। जैसा दाम, वैसा काम होता है। उस समय की यादें भी तस्वीरों में क़ैद होकर आपके खजाने में शामिल हो जाती हैं। बीते समय को जितना भी पकड़ना चाहें, वह रूकता नहीं। बीत ही जाता है। यानी आपके जीवन के ऐसे लम्हे जो बेहतरीन थे, जिन्हें आप बार-बार जीना चाहते हैं… वे भी सीमित समय तक रहे, और लौटकर कभी नहीं आए। उनकी यादें साथ हैं।
अब उन दिनों को याद करते हैं जब किसी बात पर मन बहुत दुखी था। परेशानियों ने जैसे आ कर जकड़ ही लिया था। अकेलापन आप पर हावी होता जा रहा था, पर वह वक्त भी बीत ही गया। कठिन समय भी रूका तो नहीं, चला ही गया! यदि आज आपका कठिन दौर चल रहा है, तब भी भरोसा रखें कि यह भी अधिक दिनों तक ऐसा नहीं रहेगा। वक्त तो होता ही बीतने के लिए है, यह वक्त्त भी बीत जाएगा। बात सिर्फ हौसला बनाए रखने की है। कठिन समय में अक्सर हम अपनी परेशानी किसी अन्य से बाँटते हुए हिचकिचाते हैं। जो व्यक्ति कठिन समय से गुजर रहा होता है, वह अपनी कठिनाई को लोगों के साथ नहीं बाँटता। उसे लगता है कि सब सोचेंगे, “मैं हार गया।“ या “मुझे मदद की जरूरत है।“… कुछ पलों के लिए जरा रूक कर सोचिए। यदि सामने वाला ऐसा सोचता है, तो उसे सोचने दीजिए। सोचना या राय बनाना सामने वाले का काम है। वह क्या सोचता है, कैसी राय बनाता है,  यह उसकी परेशानी है। आप उसके हिस्से का काम उसको करने दें। आप अपना काम करें। 
कठिन समय में आपकी जिम्मेदारी है कि इससे बाहर निकलने के उपाय किये जाएं। ऐसे समय में किसी से मदद लेनी पड़ जाए तब भी घबराएं नहीं क्योंकि खराब हालात में ज्यादा समय तक रहना, अच्छी बात नहीं है। एक बात और याद रखें कि यह भी समय का एक दौर ही है। यह भी बीत जाएगा। जब पहले वाला समय नहीं रूका, तब यह कैसे स्थायी हो सकता है!
चुनौतीपूर्ण समय में आप अपना हौसला बनाए रखें और समय की गति पर विश्वास रखें। यह कभी किसी जगह रूकता नहीं। लगातार चलता रहता है। समय सबको एक बराबर तराजू में तौलता है। आपकी परेशानियों के वक्त में किसी अन्य के जीवन में खुशियों के दौर चल रहे होंगे। इसीलिए समय को बदलना ही है। आपके संघर्ष के दौर को सुकून में और किसी अन्य के आराम के पलों को मेहनत में बदलने का समय आना ही है। इसीलिए याद रखें कि समय चलायमान है, चलता रहता है। अच्छा समय ज्यादा दिन नहीं रहा तो कठिन समय भी रूकने वाला नहीं है। आप बदलने वाले समय की तैयारी करें क्योंकि समय लगातार बदल रहा है। 
वन्दना यादव
वन्दना यादव
चर्चित लेखिका. संपर्क - yvandana184@gmail.com
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