Saturday, July 27, 2024
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ग़ज़ल ….. पूनम माटिया 

 

क्या जानते हो मुझको, करते हो मुझसे बह्स
दिन-रात की ये खटपट, दिन-रात की ये बह्स

वो काम हो चुके, थे चर्चा के जो विषय
बेकार कर रहे हो, बेबात हमसे बह्स

आवाज़ है बला की, करते हैं बात तो
लगता है कर रहे हैं, हर बार हमसे बह्स

उसने तो ये कहा था, मैंने कहा था यूँ
सुनते कहाँ हैं दोनों, करते ही जाते बह्स

क्यों बह्स से डरो हो, ऐ दोस्त, मेरे भाई
निकलें हैं हल हमेशा, बड़े काम आये बह्स

Dr poonam  matia(विद्यावाचस्पति)
Pocket A, 90 B
Dilshad garden
Delhi 110095
Mob:93199 36660, 9312624097
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