

उठी थीं… उनकी आँखें ख़ुशी के आंसुओं से गीली हो उठीं! उन्होंने नहीं सोचा था कि उनके इतने सारे दोस्त उनके खास दिन पर उसे खुश करने के लिए आए होंगे।
इस आयोजन के दौरान ज़किया जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रो. रहमान मुस्सविर द्वारा संपादित ग्रन्थ ‘ज़किया ज़ुबैरी – परदेस में देस’ का लोकार्पण भी किया गया।
रिफत शमीम और अकील दानिश ने जकिया जुबैरी के सम्मान में कविताएँ सुनाईं जबकि शहजाद ने याद किया कि कैसे जकिया जी ने लंदन में उनके संघर्ष के दिनों में उनकी मदद की थी।
भव्य आयोजन, ज़किया जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाईयाँ, आयोजकों का आभार जिन्होंने इस भव्य समारोह को हम तक पहुँचाया
धन्यवाद शैली जी।