Monday, June 15, 2026
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दिलीप कुमार का व्यंग्य-तू अनंत, तेरी कथा अनंता

नजर का तीर जिगर में लगे तो अच्छी बात होती है
घर की बात घर में ही रहे तो अच्छी बात होती है

उस्ताद शायर मरहूम जिगर मुरादाबादी ने जब ये मशहूर शेर कहा था तब उन्हे गुमान भी नहीं हुआ होगा कि भविष्य में यह शेर आशिकों और माशुकाओं को कवर फायर देगा। उस दौर में इश्क चिट्ठी -पत्री से हुआ करता था। पकडे जाने पर दोनों पीटे जाते थे , अपनी -अपनी  सफाईयां देते थे मगर राइटिंग गवाही दे देती थी। सो पकड़े जाते थे। बाद में टेलीफ़ोन आया, जिसकी घंटी इतनी तेज बजती थी कि प्रेमी प्रेमिकाओं को गोपनीयता के लाले पड़ जाते थे।

वक्त आगे बढ़ा तो मोबाइल आया जो कि नितांत निजी और गोपनीय हुआ करता था। लेकिन इश्क कि राह और बेवफाई की डाह से मोबाइल भी महफूज नहीं रह पाया। काल रिकार्डिंग , स्क्रीन शॉट जैसे रोड़े इश्क की राह में थे। रो -रो कर आशिकों ने इश्क के हँसी सितम सहे। काल रिकार्डिंग और स्क्रीन शॉट की रुसवाई सही। फिर आया वव्हाट्अप।

इस कमाल की सर्विस ने ना सिर्फ देश विदेश के इश्क़ की सरहदों की बंदिश को दूर किया, क्योंकि इसमें करीब -करीब सब कुछ मुफ्त था बल्कि किसी स्तर पर रिकार्डिंग वाली कोई बात नहीं थी। यानी इश्क के लुत्फ़ ही लुत्फ़ और रुसवाई वाली फजीहत नदारद। यह सेवा चोरी -छिपे इश्क करने वालों को वरदान बन कर आयी।

वैसे तो व्हाट्सअप चलाते सब हैं पर तनिक इसकी महिमामंडन का भी मुजायरा कर लेते हैं।

सुप्रसिद्ध हरि भजन की एक लाइन है –

“हरि अनंत, हरि कथा अनन्ता”

व्हाट्सअप का भी ना कोई आदि है और ना ही अंत है। अर्थात व्हाट्स अप पर कोई मेसेज या सूचना कहाँ से जन्मी है और उस मेसेज की फॉर्वर्डिंग  का अंत कब होगा यह कोई नहीं बता सकता है। यानी कि कोई बालक अगर कुंभ के इस मेले में गुम हो गया तो हो सकता उसकी फोटो और हुलिया वाला मेसेज अगले 12 वर्ष तक फॉरवर्ड होता रहे और अगले कुंभ मेले तक वह बालक बाल -बच्चेदार  हो जाये।

यानी व्हाट्सअप एक ऐसा महाकुंभ है जिसका शुरुआत और अंत नहीं है, ऐसे संदेशों के प्रसारकर्ता और फॉरवर्ड किए गए ज्ञान से भरे हुए कुंड वाला वव्हाट्अप का ब्रम्हांड सर्वथा नमन के योग्य है।

पुराने जमाने में किसी के ज्ञान के आकलन हेतु शास्त्रार्थ, आदि का सहारा लिया जाता था तब उसे विद्वान या अल्पज्ञानी घोषित किया जाता है लेकिन अब व्हाट्स अप एक ऐसी यूनिवर्सिटी है जो ज्ञान मापने के काम आती है। मगर अपना नहीं बल्कि सामने वाले का। व्हाट्सअप चलाने वाला बड़ी आसानी से दूसरे के बारे में सर्टिफिकेट जारी कर देता है कि “तुम व्हाट्स अप यूनिवर्सिटी के पढ़े – लिखे हो। व्हाट्स अप विश्वविद्यालय के कुलपति और जगत के आदि संदेशदाता, हाथ में वीणा लिए तथा निरंतर जानकारी की बौछार करने वाले आभासी जगत के नारद मुनि सर्वथा नमन के योग्य है।

वव्हाट्अप सिर्फ उधार के ज्ञान का भंडार ही नहीं है अपितु उदारता एवं समानता का झंडाबरदार भी है। यहाँ पर आपको प्रेमचंद के नाम की ऐसी कविताएँ मिल जायेंगी जो उन्होंने कभी लिखी ही नहीं। व्हाट्सअप पर हर शेर गालिब का ही होता है भले ही वह तुकबंदी किसी ट्रक के पीछे लिखी इबारत से टीप कर चेंप दी गयी हो।

व्हाट्स अप सदा कट- पेस्ट और फॉरवर्ड के रास्ते पर चलता है इसमें जो “सामने आया वही परम सत्य है ” ही माना जाता है । सबसे पहले मेसेज फॉरवर्ड करने वाला ही विजेता मान लिया जाता है। स्कूल – कालेज का कभी भी मुँह ना देखने वाले और व्हाट्सअप पर ही पढ़े ग्रंथों का सार जानने वाला व्हाट्स अप सेवी सर्वथा नमन के योग्य है।

अब तो“पाताल लोक” वेब सीरीज़ में  इंस्पेक्टर हाथी राम चौधरी, पत्रकार को धर्मराज युधिष्ठिर की स्वर्ग यात्रा का वर्णन करने के बाद टीवी के एंकर से कहता है कि “वैसे तो यह सब शास्त्रों में लिखा है लेकिन मैंने इसे व्हाट्स अप पर पढ़ा था।

यहां न ग्रंथ की जरूरत है, न परीक्षा, न समय और न प्रमाण। केवल ‘फॉरवर्ड’ करने से ही यहां विद्वान की पदवी सहज ही प्राप्त हो जाया करती है।

व्हाट्स अप सेवी को अपनी व्हाट्स अप की सूचना पर इतना मान होता है कि  हर सूचना को पहले वह अपनी ‘ एक्सक्लूसिव कह कर दावा करता है।उसकी सूचना या वक्तव्य पर अगर कोई उंगली उठाये तो “मेरा मित्र इसका विषय विशेषज्ञ है’ ऐसा कहकर अपनी बात का बचाव करता है । यदि कहीं उसके तथ्य झुठला दिये जाएं तो “मुझे भी ये मेसेज व्हाट्सअप पर मिला था, मैंने तो सिर्फ फॉरवर्ड किया था ” ये कहते हुए पल्ला झाड़ लेता है। यानी वाह वाही मिले तो सब कुछ अपना और अगर झूठ पकड़े जाने पर आलोचना हो तो “सानू की ”।

ये तो वही मिसाल हो गयी कि – “चित भी मेरी, पट भी मेरी और अंटा मेरे बाप का”

व्हाट्सअप का मेसेज “वन स्टॉप शाप” जैसा होता है जहाँ पर एक ही लेख में आपको लोक -परलोक सबके बारे में जानकारी मिल जाती है जहाँ पर बात शुरू तो शेयर बाजार के नुस्खे से होती है और अंत शिव पुराण के अध्यात्म से होती है।

धर्म का मर्म भी व्हाट्सप् बखूबी सिखाता है कि जीवन क्षणभंगुर है अर्थात जिनसे रात -रात भर बात करके मुदित होता है वह किसी भी पल ब्लाक करके जा सकता है। और खास बात यह है कि अब ब्लू टिक के देखे जाने को परम सत्य नहीं माना जा सकता। हो सकता है ब्लू टिक ना आये और मेसेज देख लिया गया हो, यही है व्हाट्सअप के इस मायावी संसार की माया।

व्हाट्सअप की आभासी एवं मायावी दुनिया का मर्म एवं सार ये है कि यहाँ पर पढ़ा हुआ सदैव सत्य नहीं होता और सदैव झूठ भी नहीं होता। यानी यहाँ का मामला फिफ्टी – फिफ्टी टाइप ही होता है। यहाँ देखा हुआ सब प्रमाणिक  नहीं होता है। जो विवेक का दीपक जलाए रखता है, सदैव तटस्थ, मौन एवं संतुलित रहता है।वही सही मार्ग देख पाता है।

व्हाट्सअप के मायावी संसार में अनुभवी सेवियों को म्यूट करने की शक्ति प्राप्त होती है और आर्काइव करने का ज्ञान मिलता है। ब्लू टिक का भय उसे नहीं रहता, वह मुक्त हो जाता है, इसमें कोई संशय नहीं।गालिबन लब्बोलुबाब यह कि जो व्हाट्सअप के मायावी मोह भरी दुनिया में जो फॉरवर्ड, कट – पेस्ट के मोहरूपी दोष से मुक्त हो जाता है और ‘शेयर करो ” को त्याग देता है, वह     होशियार कहलाता है और उसको ही चित्त की शांति प्राप्त होती है।

एक व्हाट्सअप का निस्वार्थ सेवी व्हाट्सअप का महिमामंडन करते हुए उसे संबोधित करते हुए गा रहा है –

“तू अनंत, तेरी कथा अनंता।”

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