Saturday, October 3, 2026
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आलोक शुक्ला का चौथा नाट्य संग्रह ‘पतझड़ के फूल और देखोना’ लोकार्पित

नई दिल्ली,  वरिष्ठ रंगकर्मी एवं नाटककार आलोक शुक्ला के चौथे नाट्य संग्रह ‘पतझड़ के फूल और देखोना’ का लोकार्पण 19 सितंबर की शाम नई दिल्ली स्थित श्री राम सेंटर के सामने संजना बुक्स प्रकाशन के स्टॉल ‘साहित्य के पेड़’ पर किया गया।

नाट्य संग्रह का लोकार्पण वरिष्ठ नाटककार प्रताप सहगल, नाटककार एवं रंग समीक्षक राजेश कुमार, संगीत नाटक अकादमी के उप सचिव एवं वरिष्ठ रंगकर्मी सुमन कुमार, रंग निर्देशक प्रदीप बाजपेयी, वरिष्ठ लेखिका शशि सहगल, सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेता एवं रंगकर्मी श्रीकांत वर्मा, नाटककार अनिल ठाकुर तथा संजना बुक्स प्रकाशन की निदेशिका श्रीमती संजना तिवारी ने संयुक्त रूप से किया।

इस अवसर पर संगीत नाटक अकादमी के राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित वरिष्ठ नाटककार प्रताप सहगल ने गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद आलोक शुक्ला द्वारा लगातार लेखन और निर्देशन किए जाने को रेखांकित किया। उन्होंने संग्रह में शामिल दोनों पूर्णकालिक नाटकों के प्रकाशन पर आलोक शुक्ला को शुभकामनाएं दीं।

संगीत नाटक अकादमी के उप सचिव एवं वरिष्ठ रंगकर्मी सुमन कुमार ने ‘पतझड़ के फूल’ और ‘देखोना’ के लेखन की चर्चा करते हुए हिंदी में लगातार नए नाटकों के लिखे जाने की बात कहते हुए इस धारणा को खारिज किया कि नए नाटक नहीं लिखे जा रहे हैं और रंगकर्मियों से इन नाटकों को मंच पर लाने का आग्रह किया।

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी सम्मान से सम्मानित नाटककार एवं रंग समीक्षक राजेश कुमार ने कहा कि हिंदी में नए नाटक लगातार लिखे जा रहे हैं और आलोक शुक्ला का लेखन अपनी अलग पहचान रखता है। उन्होंने ‘पतझड़ के फूल’ की विशेषता बताते हुए कहा कि इसमें बुजुर्ग व्यक्ति के जीवन और उसकी परिस्थितियों को केंद्र में रखते हुए नाटक के दो अलग-अलग अंत दिए गए हैं। किसी लेखक द्वारा निर्देशक को अपनी रंग-दृष्टि के अनुसार नाटक के अंत का चयन करने की स्वतंत्रता देना एक बड़ी बात होती है।

‘देखोना’ के संदर्भ में राजेश कुमार ने कहा कि जिस तरह किसी दौर के सामाजिक परिवेश को समझने के लिए आज मोहन राकेश के नाटकों को पढ़ा और मंचित किया जाता है, उसी तरह भविष्य में आज से 10-15 वर्ष बाद कोरोना काल के सामाजिक परिवेश और प्रभावों को समझने के लिए आलोक शुक्ला का ‘देखोना’ महत्वपूर्ण नाट्य दस्तावेज के रूप में पढ़ा और मंचित किया जाएगा। उन्होंने नाट्य संग्रह की गुणवत्तापूर्ण प्रिंटिंग के लिए प्रकाशिका संजना तिवारी को भी बधाई दी।

रंग निर्देशक प्रदीप बाजपेयी, सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेता एवं रंगकर्मी श्रीकांत वर्मा, वरिष्ठ रंग अभिनेता विपिन कुमार तथा वरिष्ठ लेखिका शशि सहगल और रांची से आए नाटककार अनिल ठाकुर ने भी आलोक शुक्ला की रंगयात्रा और उनके नाट्य लेखन की सराहना करते हुए उन्हें नाट्य संग्रह के प्रकाशन पर शुभकामनाएं दीं। वहीं प्रसिद्ध रंग निर्देशक अरविंद गौड़ ने फोन पर कुछ कारण नहीं आ पाने की माफ़ी मांगी और नाट्य संग्रह के प्रकाशन की शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर नाटककार आलोक शुक्ला ने अपने नाट्य संग्रह के लोकार्पण तथा सभी अतिथियों और रंगकर्मियों से मिली शुभकामनाओं के लिए हाथ जोड़कर सभी का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में रंगकर्मी अभिमन्यु सिंह चौधरी, रंगकर्मी शिखा मल्होत्रा, रंग निर्देशक हिम्मत सिंह नेगी सहित अनेक रंगकर्मी एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन रोशन ने किया।

लोकार्पण के अवसर पर बड़ी संख्या में साहित्य एवं रंगकर्म से जुड़े लोगों ने ‘पतझड़ के फूल और देखोना’ की प्रतियां खरीदीं और नाटककार आलोक शुक्ला से उन पर ऑटोग्राफ भी लिए।

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