Saturday, October 3, 2026
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नॉरफ़ॉक में हिंदी दिवस समारोह

रविवार 27 सितंबर 2026 की दोपहर गुरुकुल नॉरफ़ॉक, वैश्विक साहित्यिक संगठन की एक शाखा, तथा विश्व हिंदी परिषद – यूके, लंदन के संयुक्त प्रयासों से हिंदी दिवस के अवसर पर एक भव्य एवं भावपूर्ण साहित्यिक-सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रवासी समुदाय को हिंदी भाषा, साहित्य एवं भारतीय संस्कृति से जोड़ना तथा विशेष रूप से बच्चों और युवा पीढ़ी में हिंदी के प्रति प्रेम एवं रुचि विकसित करना था। कार्यक्रम का आयोजन स्थल था द हिंदू टेम्पल, एक्ले न्यू रोड, ग्रेट यारमाउथ, नॉरफ़ॉक।

समारोह में मुख्य अतिथियों, साहित्यकारों, बच्चों, अभिभावकों तथा समुदाय के अनेक सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की विशेषता रही कि विभिन्न आयु-वर्ग के प्रतिभागियों ने हिंदी कविता, भजन, श्लोक, नज़्म एवं साहित्यिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा और हिंदी के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त किया।

 मुख्य अतिथियों के प्रेरणादायी संदेश

समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. अनुराधा पाण्डेय जी, डॉ. देवी प्रसाद मिश्र जी, डॉ. बिपिन कुमार जी तथा तेजेन्द्र शर्मा जी, विशिष्ट अतिथि आशुतोष जी की उपस्थिति एवं मार्गदर्शन ने विशेष गरिमा प्रदान की।

 डॉ. अनुराधा पाण्डेय जी ने गुरुकुल नॉरफ़ॉक की चेयर एवं आयोजक श्रीमती वंदना खुराना जी तथा पूरी टीम के निरंतर प्रयासों की हृदय से सराहना की। उन्होंने भारतीय संस्कृति, भाषा और विरासत को प्रवासी समुदाय में जीवंत रखने के लिए किए जा रहे अथक प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से इस बात को रेखांकित किया कि विदेश में रहते हुए, जहाँ भारतीय मूल की आबादी का एक छोटा हिस्सा ही हिंदी से सीधे जुड़ा है, वहाँ समुदाय के बीच भाषा और संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उनके प्रेरणादायी शब्दों ने बच्चों, अभिभावकों और आयोजकों में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने गुरुकुल टीम को इसी प्रकार निरंतर प्रयास करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया और भारतीय भाषाओं एवं संस्कृति के संरक्षण में समुदाय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

डॉ. विपिन कुमार जी, विश्व हिंदी परिषद के उप महासचिव, ने सभी प्रतिभागियों एवं आयोजकों को हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने मातृभूमि से दूर रहते हुए हिंदी भाषा को सीखने, बोलने और अगली पीढ़ी तक पहुँचाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि हिंदी को केवल एक भाषा के रूप में नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान और विरासत से जुड़ने के माध्यम के रूप में अपनाना चाहिए।

उन्होंने सभी को 30 एवं 31 अक्टूबर को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले विश्व हिंदी परिषद के कार्यक्रम में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया।

डॉ. देवी प्रसाद मिश्र जी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, विश्व हिंदी परिषद, ने भी हिंदी के प्रति बच्चों और समुदाय के उत्साह की सराहना की। उन्होंने ऐसे आयोजनों को हिंदी भाषा एवं साहित्य के वैश्विक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण बताया और सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ दीं

समारोह में सम्माननीय तेजेन्द्र शर्मा एम.बी.ई. का मार्गदर्शन बच्चों एवं अभिभावकों के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायी रहा। उन्होंने बच्चों को हिंदी सीखने और उसे दैनिक जीवन में प्रयोग करने के अनेक व्यावहारिक सुझाव दिए। उन्होंने बच्चों को हिंदी कविता, रोचक और सहज राईम तुकबंदी के माध्यम से भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने अभिभावकों को भी एक रोचक “होमवर्क” देते हुए बच्चों के साथ घर पर हिंदी कविताओं और राइम्स का अभ्यास करने की प्रेरणा दी। उनके सहज एवं व्यावहारिक सुझावों ने यह संदेश दिया कि हिंदी सीखना केवल कक्षा तक सीमित न रहकर परिवार और घर के वातावरण का भी हिस्सा बन सकता है।

विभिन्न स्थानों से जुड़े प्रतिभागियों को तकनीक के माध्यम से एक मंच पर लाने और उन्हें कार्यक्रम से जोड़ने में असमिता जी का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा।

उनका सहयोग केवल तकनीकी समन्वय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने बच्चों एवं अन्य प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ाया।

गुरुकुल नॉरफ़ॉक एवं विश्व हिंदी परिषद – यूके की ओर से उनके समर्पण और सहयोग के लिए हार्दिक धन्यवाद एवं कृतज्ञता व्यक्त की गई।

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक एवं भावपूर्ण पक्ष बच्चों और वयस्क प्रतिभागियों की प्रस्तुतियाँ रहीं। सभी प्रतिभागियों ने उत्साह एवं आत्मविश्वास के साथ मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

बाल प्रतिभाएँ

  1. झान्नवी जेतानी – गीता अध्याय15
  2. रिया सिंह – कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
  3. शाओनी मलिक- कत्थक
  4. मेहुल एवं तिलक – हिंदी भजन
  5. कुंज – संस्कृत श्लोक
  6. आयुक्ता लेपाक्षी साहू-कत्थक
  7. मेहर नायसा भाटेजा
  8. लेक्षणा गायत्री लोकेश
  9. लोहिताक्ष लोकेश
  10. राम जेतानी, 5 वर्ष
  11. रिया शर्मा- हिंदी मेरी मातृभाषा
  12. सिमरन चावला – भारतीय गीत ऐ वतन

सभी बच्चों ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। उनकी प्रतिभा, उच्चारण और हिंदी के प्रति उत्साह ने उपस्थित दर्शकों को प्रभावित किया।

विशेष रूप से पाँच वर्षीय राम जेतानी की भागीदारी ने समारोह में बाल प्रतिभा की सुंदर झलक प्रस्तुत की और उपस्थित सभी लोगों ने उनका उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम भोजन उपरांत नौका विहार पर सम्पन्न हुआ । आशुतोष जी ने एक सुंदर एवं भावपूर्ण गजल की प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में एक नई विधा जोड़ी तथा श्रोताओं ने उनकी रचना का आनंद लिया।

बच्चों के साथ-साथ वयस्क प्रतिभागियों ने भी हिंदी साहित्य एवं कविता के प्रति अपने प्रेम को प्रस्तुतियों के माध्यम से व्यक्त किया।

  1. गौरव – विश्व को भारत का अनुदान
  2. किरण – हिंदी कविता
  3. अरुण – हिंदी कविता
  4. पारुल – हिंदी कविता
  5. सुष्मिता मुंगरा – भजन
  6. डॉ. सतीश एस. – हिंदी कविता

इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को साहित्यिक विविधता प्रदान की और यह दर्शाया कि हिंदी भाषा के प्रति प्रेम विभिन्न आयु-वर्गों में समान रूप से जीवंत है।

हिंदी से संस्कृति और पीढ़ियों का जुड़ाव

समारोह के दौरान यह भावना विशेष रूप से उभरकर सामने आई कि विदेश में हिंदी को बढ़ावा देना केवल भाषा के संरक्षण का कार्य नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा, साहित्य, मूल्यों और पहचान को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम भी है।

गुरुकुल नॉरफ़ॉक का उद्देश्य विभिन्न भारतीय भाषाओं एवं संस्कृतियों के प्रति सम्मान और रचनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना है। हिंदी दिवस समारोह इसी व्यापक उद्देश्य की एक महत्वपूर्ण कड़ी रहा।

कार्यक्रम में बच्चों की भागीदारी ने यह आशा और विश्वास मजबूत किया कि यदि परिवार, समुदाय और संस्थाएँ मिलकर प्रयास करें, तो प्रवासी परिवेश में भी भारतीय भाषाओं को अगली पीढ़ी के साथ जीवंत रूप से जोड़ा जा सकता है।

गुरुकुल नॉरफ़ॉक एवं विश्व हिंदी परिषद – यूके, लंदन की ओर से सभी मुख्य अतिथियों, विशिष्ट अतिथियों, साहित्यकारों, प्रतिभागियों, बच्चों, अभिभावकों, स्वयंसेवकों तथा उपस्थित सभी श्रोताओं के प्रति हृदय से आभार एवं कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।

आप सभी की गरिमामयी उपस्थिति, स्नेह, सहयोग और उत्साह ने इस हिंदी दिवस समारोह को विशेष एवं यादगार बनाया।

हम विशेष रूप से डॉ. अनुराधा पाण्डेय जी, डॉ. देवी प्रसाद मिश्र जी, डॉ. विपिन कुमार जी , तेजेन्द्र शर्मा जी एवं आशुतोष जी के प्रति कृतज्ञ हैं, जिन्होंने अपना बहुमूल्य समय देकर बच्चों एवं सभी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन और उत्साहवर्धन किया।

डॉ. अनुराधा पाण्डेय जी द्वारा गुरुकुल नॉरफ़ॉक और पूरी टीम के प्रयासों की सराहना हमारे लिए विशेष रूप से प्रेरणादायी है। उनका प्रोत्साहन हमें भारतीय भाषा, संस्कृति एवं विरासत के लिए अपने प्रयासों को और अधिक समर्पण के साथ आगे बढ़ाने

सभी अभिभावकों का विशेष आभार, जिन्होंने अपने बच्चों को हिंदी सीखने, बोलने और मंच पर प्रस्तुत होने के लिए प्रोत्साहित किया। बच्चों की प्रत्येक प्रस्तुति के पीछे परिवारों का निरंतर सहयोग और समर्पण दिखाई दिया।

यह हिंदी दिवस समारोह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भाषा, साहित्य, संस्कृति और पीढ़ियों को जोड़ने का एक सामूहिक प्रयास था।

गुरुकुल नॉरफ़ॉक एवं विश्व हिंदी परिषद – यूके, लंदन आगे भी इसी भावना के साथ हिंदी एवं भारतीय भाषाओं, साहित्य और संस्कृति को समुदाय के बीच बढ़ावा देने तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।

श्रीमती वंदना खुराना
अध्यक्ष, विश्व हिंदी परिषद – यूके, लंदन
चेयर, गुरुकुल नॉरफ़ॉक
वैश्विक साहित्यिक संगठन

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