Sunday, April 19, 2026
होमकविताशैलेश शुक्ल की दो कविताएँ

शैलेश शुक्ल की दो कविताएँ

1.

जो कल होना था, वो आज हो, तो होता रहे

सच सुनकर,अगर वो नाराज हो, तो होता रहे।
******
बोलेंगे हम हर देशद्रोही सुर-तान के खिलाफ
खराब होता उनका साज हो, तो होता रहे।
******
देशहित में जरूरी हर कदम उठाएंगे हम
खिलाफ होता ‘वो समाज’ हो, तो होता रहे।
******
अधिकार अपना हम भला कब तक छोड़ें?
कमजोर होता उनका राज हो, तो होता रहे।
******
हिंसा का विरोध हम करते हैं, करते रहेंगे
हमसे दुश्मनी का आगाज हो, तो होता रहे।

 

2.

अगर आज नहीं बोले, तो फिर कब बोलोगे?

भला कैसे, किस मुंह से, अपना मुंह खोलोगे?

******

हो सके अगर, तो आज हिम्मत कर ही लो

नहीं तो कल, हर अपने की लाशें तोलोगे।

******

देश जिंदा है, कोशिश करो कि जिंदा रहे

बाद में कुछ हो न सकेगा, तुम सिर्फ रो लोगे।

******

बचने के उपाय, अभी से कर लो अपने लिए

बाद में सिर्फ उनके दिए जख्मों को टटोलोगे।

******

सब मतभेद भुलाकर, आपस में मिलकर रहो

एक होकर तुम, अब तक के सब पाप धो लोगे।

******

जो हुआ, सो हुआ, अब कुछ अनिष्ठ ना हो पाए

कब तक इस हवा में भेदभाव का जहर घोलोगे?

RELATED ARTICLES

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Most Popular

Latest