1.

जो कल होना था, वो आज हो, तो होता रहे

सच सुनकर,अगर वो नाराज हो, तो होता रहे।
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बोलेंगे हम हर देशद्रोही सुर-तान के खिलाफ
खराब होता उनका साज हो, तो होता रहे।
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देशहित में जरूरी हर कदम उठाएंगे हम
खिलाफ होता ‘वो समाज’ हो, तो होता रहे।
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अधिकार अपना हम भला कब तक छोड़ें?
कमजोर होता उनका राज हो, तो होता रहे।
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हिंसा का विरोध हम करते हैं, करते रहेंगे
हमसे दुश्मनी का आगाज हो, तो होता रहे।

 

2.

अगर आज नहीं बोले, तो फिर कब बोलोगे?

भला कैसे, किस मुंह से, अपना मुंह खोलोगे?

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हो सके अगर, तो आज हिम्मत कर ही लो

नहीं तो कल, हर अपने की लाशें तोलोगे।

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देश जिंदा है, कोशिश करो कि जिंदा रहे

बाद में कुछ हो न सकेगा, तुम सिर्फ रो लोगे।

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बचने के उपाय, अभी से कर लो अपने लिए

बाद में सिर्फ उनके दिए जख्मों को टटोलोगे।

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सब मतभेद भुलाकर, आपस में मिलकर रहो

एक होकर तुम, अब तक के सब पाप धो लोगे।

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जो हुआ, सो हुआ, अब कुछ अनिष्ठ ना हो पाए

कब तक इस हवा में भेदभाव का जहर घोलोगे?

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