भोपाल में ‘तुमसे मिलकर’…. का लोकार्पण
दिल्ली से आए वरिष्ठ लेखक सुभाष नीरव ने कहा, “इस संग्रह की कमाल की बात
अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ कवि राजेश जोशी ने संग्रह की कविताओं का उल्लेख करते हुए ‘नमक का स्वाद’ , ‘बदलाव ’
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यह है कि पहली कविता जो पाठक की उंगली थामती है तो अंतिम कविता तक का सफर करा देती है। जिसे पढ़कर पाठक बंध जाए, डूब जाए, व संवाद करे वही कविता की सार्थकता है। इन कविताओं ने छीजती संवेदना को उठाकर प्रेम के बीज बोए हैं।”
और ‘बचा लेता है ’ कविता को सर्वश्रेष्ठ कविता बताया। उन्होंने इन तीनों कविताओं का विस्तार से ज़िक्र किया। ‘बचा लेता है ’ कविता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि काग़ज़ जब नोट बनता है तो पावर में आते ही नष्ट कर डालता है मानवीय रिश्तो को, संवेदनाओं को, जीवन मूल्यों को। ज्ञान वर्धन की कविता पिकासो में इसी पावर का जिक्र है कि दुनिया की किसी भी करेंसी से महंगा वह चार इंच का कागज है जिस पर पिकासो के हस्ताक्षर हैं। लेकिन किताब का पन्ना बनते ही वह सब कुछ को सहेज लेता है। मैं संतोष जी को साधुवाद देता हूँ कि उन्होंने कागज को किताब का पन्ना बनाने की महत्वपूर्ण कोशिश की है।”