सोन पापड़ी हमारे देश की सबसे नामी गिरामी मिठाई है,यही वो मिठाई है जिस पर सबसे ज्यादा मीम बनते हैं। दीवाली आते ही हर तरफ इसके चर्चे शुरू हो जाते हैं। नाम सब जानते हैं पर इसके भाग्य में इस हाथ से उस हाथ का सफर ही लिखा है।
इसी तरह साहित्य में भी एक सोन पापड़ी है वो हैं सम्मान के शॉल। साहित्यकार जीवन भर सम्मान कि जुगत में लगा रहता है कुछ लेखक तो लिखने से ज्यादा सम्मान प्राप्त करने पर फोकस करते हैं। सम्मान में मिले शॉल और श्री फल को प्राप्त करने में जितने हथकंडे अपनाए जाते हैं। उसके बाद उस शॉल को कोई नहीं ओढ़ता बल्कि तरह तरह के उपाय खोजे जाते हैं।


बहुत ही सटीक उपमा दी है… मजा ही आ गया