डॉ निशंक के साहित्य में सामाजिक यथार्थ और युग बोध... 9

डॉ किरण खन्ना द्वारा संपादित पुस्तक ‘डॉ निशंक के साहित्य में सामाजिक यथार्थ और युग बोध’

  • डॉ. परमजीत कुमार छाबड़ा
आधुनिक युग बोध के प्रगतिशील प्रतिष्ठित और सजग साहित्यकार डॉ रमेश पोखरियाल निशंक जी का साहित्य सृजन हाशिए पर धकेल दिए गए लोगों का साहित्य है। इन उपेक्षित लोगों के जीवन के आरोह अवरोह के क्रम का, प्रतिकूल अनुकूल परिस्थितियों का, नकारात्मक और सकारात्मक मानवीय मानसिकता का, तनाव अलगाव से उपजे संत्रास का, निराशा, कुंठा जैसी विसंगतियों का  और अन्य बहुत सी सामाजिक समस्याओं का यथार्थवादी चित्रण डॉ निशंक के साहित्य में मिलता है।
डॉ निशंक जमीनी हकीकत से जुड़े साहित्यकार हैं जिनके अनुसार समाज सामाजिक संबंधों की एक अमूर्त व्यवस्था होती है। इसी व्यवस्था में  एक वर्ग विशेष के अन्तर्गत लोगों के रहने सहन, उनकी संस्कृति, उनके जीवन मूल्य, उनकी आस्था-निजता, उनकी सामाजिक, राजनीतिक और नैतिक अपेक्षाएं, महत्वाकांक्षाएं, आशंकाएं  सभी उसमें सम्मिलित होती हैं । इन सभी संदर्भों को सजगता से अपने साहित्य सृजन में समेटते हुए प्रबुद्ध चिंतक डॉ निशंक ने हिंदी साहित्य की मुख्य धारा में अपनी जानदार और शानदार उपस्थिति दर्ज करवाई है।
भारत के हिंदीतर क्षेत्र पंजाब की गुरु नगरी अमृतसर के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थान डीएवी कॉलेज अमृतसर  में स्नातकोत्तर हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ किरण खन्ना द्वारा डॉ रमेश पोखरियाल निशंक जी के साहित्य सृजन पर संपादित ग्रंथ *डॉ निशंक के साहित्य में सामाजिक यथार्थ और युग बोध* में  संकलित लगभग 20 शोधालेखों में ये विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित विद्वानों विदूषियों द्वारा लिखित इन आलेखों से अलंकृत इस पुस्तक की जानदार भूमिका में लंदन के वरिष्ठ कथाशिल्पी तेजेन्द्र शर्मा एम. बी. ई. बहुत तार्किक शब्दों में डॉ निशंक की राजनीतिक पृष्ठभूमि को सहेजते हुए लिखते हैं ‘जब राजनेता कवि हो जाए तो अभिव्यक्ति और भी मार्मिक और जीवंत हो जाती है।’ इस शांत और गम्भीर साहित्यकार पर विमर्श को अति अनिवार्य बताया तेजेन्द्र शर्मा जी ने और संपादक पर सार्थक कार्य करने का विश्वास भी व्यक्त किया।
केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा के उपाध्यक्ष अनिल जोशी पुस्तक की भूमिका और सारगर्भित आलेख में संवेदना के सर्जकडॉ निशंक के साहित्य में सामाजिक यथार्थ और युग बोध... 10 डॉ निशंक के कथा सृजन को वास्तव में उपेक्षित और तिरस्कृत वर्ग की पीड़ा का सार्थक प्रस्तुतिकरण बताते हैं और राष्ट्र निर्माण हेतु उनकी समस्याओं के समाधान का प्रावधान भी देते हैं।
नीदरलैंड से वरिष्ठतम साहित्य चिंतक डॉ मोहन कांत गौतम डॉ निशंक को जिंदगी का  साक्षात्कार कर्ता साहित्यकार कहते हैं जो यथार्थ वर्णन से परहेज़ नहीं करता।वह पाठकों और श्रोताओं को अस्तित्व रक्षण हेतू डॉ निशंक के साहित्य को पढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
लंदन से डॉ अरुणा अजितसरिया एम.बी.ई. ने अपने अंदाज में डॉ निशंक जी के काव्य संग्रह*मातृभूमि के लिए* के गहन अध्ययन पर आधारित अपने आलेख में डॉ निशंक की राजनीतिज्ञ रूप में बौद्धिक प्रखरता और कवि ह्रदय की भावुक सहृदयता को बहुत सही समीकरणों में प्रस्तुत कर उनके काव्य सृजन को जन मानस में राष्ट्र प्रेम की उदात भावना जागृत करने वाले और राष्ट्रीयता का शंखनाद करने में सक्षम सृजन बताया। डॉ अरुणा अजीतसरिया ने डॉ निशंक की विश्वबंधु और राष्ट्र कल्याण की भावना को अपने निष्कर्षों में सफलता से उतारा।
डेनमार्क से अर्चना पैन्यूली ने अपनी अभिव्यक्ति में डॉ निशंक को संपूर्ण भारतीय संस्कृति का सजग प्रहरी और संवाहक बताते हुए इंडोनेशिया भ्रमण के दौरान उनसे मिलने और उनको भारत में  अपने  (अर्चना जी के) मूल क्षेत्र उत्तराखंड के अति स्नेहिल प्रतिबिंब के रूप में पा कर उनके साहित्यिक व्यक्तित्व से प्रभावित होने का बहुत आत्मीय वर्णन किया है। डॉ निशंक के अति आधुनिक कथेतर साहित्यिक विधा पर्यटन/यात्रा साहित्य सृजन की महत्वपूर्ण कृति को आलेख का आधार बनाकर कर  डा निशंक द्वारा इंडिया और इंडोनेशिया की सांस्कृतिक सहिष्णुता को सार्थकता से व्याख्यायित किया है।
बहुत ही संवेदनशील शीर्षक *आम आदमी के दुःख सुख की कहानियां* के साथ कनाडा से डॉ शैलजा सक्सेना निशंक जी के कहानी संग्रह विपदा जीवित है के आधार पर उनके जन सामान्य के प्रति लगाव और उनकी समस्याओं के प्रति उनकी कथात्मक अभिव्यक्ति को वर्णित करती है। डॉ शैलजा बहुत बारीकी से डॉ निशंक के जीवन दर्शन *संघर्ष से हारना नहीं* को पाठक के समक्ष लाने में सफल हैं बहुत कुशलता से उनके उद्देश्य को भी संप्रेषित कर देती है कि विपदा में भी घबराना नहीं और निरंतर चलते जाना ।वह निशंक जी को साहित्यिक वाद विवाद से परे का लेखक मानती है।
पंजाब के फिरोजपुर से प्रिंसिपल डॉ सीमा अरोड़ा डॉ निशंक जी के कहानी संग्रह मील का पत्थर की कहानियों को आधुनिक संदर्भों में प्रासंगिक बताती हुई बहुत संजीदगी से उनकी समसामयिक सार्थकता को सिद्ध करती हैं तो गुरु नगरी अमृतसर से विदुषी डॉ अतुला भास्कर जी ने  डॉ निशंक जी के कहानी संग्रहों *टूटते दायरे* तथा *अंतहीन* से जीवनमूल्यों का अन्वेषण बहुत सराहनीय ढंग से प्रस्तुत किया है। पंजाब के राज्य अबोहर से वरिष्ठ लेखिका डॉ किरण ग्रोवर ने कहानी संग्रह *अंतहीन* की सम्पूर्ण कहानियों के माध्यम से इस कहानी संग्रह को डॉ निशंक जी द्वारा ग्रामीण और शहरी मानसिकता को दर्शाती श्रेष्ठ जनकृति बताया। गांवों से शहरों में रोज़गार की तलाश में आए लोगों के जीवन में बड़े पैमाने पर आ रहे परिवर्तनों को डॉ किरण ने बहुत बारीकी से बांचा और डॉ निशंक के सृजन की सार्थकता को सिद्ध किया है।
डॉ कमलेश सरीन ने बहुत महत्वपूर्ण पक्ष को रेखांकित करते हुए निशंक जी के पर्वतीय प्रेम को और उनके साहित्य में आंचलिकता को वर्णित कर हिमालय के प्रति और पर्वत परिवेश को अपने आलेख का विषय बनाया है। अमृतसर से युवा लेखक डॉ संजय चौहान डॉ निशंक जी को मानवीय सारोकारों से जुड़ा कहानीकार स्वीकार कर ते है तो मेधावी डॉ दीप्ति साहनी ने निशंक जी के सृजन में वैश्विक कुटुंबकम् की सद्भावना को स्पष्ट करते हुए उनके साहित्य में वैश्विक परिवेश में परिवारवाद की पावन भावना का सम्पुष्टिकरण किया है।
हैदराबाद से डॉ पठान रहीम खान डॉ निशंक की समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण की परिपक्वता को वर्णित करते हैं तो पंजाब के बटाला से डॉ सरोज बाला ने वाह जिंदगी कहानी संग्रह की चयनित कहानियों का शैलीवैज्ञानिक अध्ययन प्रस्तुत कर साहित्यकार की कथा शिल्प को ध्वनि रूप शब्द वाक्य प्रोक्ति और अर्थ की कसौटी पर बहुत प्रवीणता से कसा है।
पंजाब के होशियारपुर से डॉ दीपक कुमार डॉ निशंक को बेसहारों का मसीहा लेखक स्वीकार करते हैं तो डॉ सीमा शर्मा को डॉ निशंक का अनूभूति पक्ष  अपनी अभिव्यक्ति की तरलता में समस्त समष्टि और व्यष्टि के मानस का दर्पण अनुभव होता है जहां से साधारण सामाजिक की विषमताओं को भली भांति समझा जा सकता है। अबोहर से डॉ अनुपाल भारद्वाज और उत्तर प्रदेश से डॉ रुपाली चौधरी भी  निशंक सृजन से मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं को आत्मसात कर अपने आलेख में उतारते हैं।
जालंधर से डॉ ज्योति गोगिया  डॉ निशंक जी को कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी की आदर्शोन्मुखी यथार्थवादी परंपरा को निरंतर निभाते साहित्यकार के रूप में प्रतिष्ठित करती हैं तो डॉ रवि गौड़ खड़े हुए प्रश्न कहानी संग्रह की कथाओं का पुनर्मूल्यांकन करते हुए सामाजिक राजनीतिक आर्थिक और नैतिक जीवन मूल्यों की धज्जियां उड़ाते कुछ यक्ष प्रश्नों का उत्तर निशंक सृजन के माध्यम से प्रस्तुत कर डॉ ज्योति गोगिया के निष्कर्षों को और भी सम्पुष्ट करते हैं।
प्रस्तुत पुस्तक की संपादक अमृतसर पंजाब से डॉ किरण खन्ना ने बहुत सटीक और तार्किक ढंग से अपने संपादकीय मेंडॉ निशंक के साहित्य में सामाजिक यथार्थ और युग बोध... 11 स्वयं डॉ निशंक जी के साहित्य के प्रति आसक्ति पैदा होने और निशंक कथा सृजन के गहन अध्ययन के पश्चात पंजाब सहित राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित और नवोदित लेखकों को इस साहित्य के चिंतन अध्ययन का आग्रह करने का ब्यौरा दिया है। डॉ निशंक जी के सृजन को इंटरनेट से खोज खोज कर अपने सहयोगियों को प्रेषित करना वास्तव में उनकी निशंक जी के साहित्य के प्रति समझ और *सभी इसको पढ़ें*  की ललक से सबको सम्पर्क करना और निरंतर उनके सम्पर्क में रहना प्रशंसनीय है। इस अध्ययन से प्राप्त प्रतिपुष्टि से वह अत्यधिक प्रभावित हुई कि उनका निशंक जी को पंजाब में भी हर संवेदनशील पाठक तक पहुंचाने का यह उपक्रम इस पुस्तक के रूप में हम सब तक पहुंचना नितांत सराहनीय है। उनके अपने आलेख में भी निशंक जी के  साहित्य को सामाजिक यथार्थ का  साहित्यिक पटल लिखना अत्यंत सार्थक प्रतीत होता है।
केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद और विश्व हिंदी सचिवालय की तरफ से प्रस्तुत पुस्तक पर आयोजित औपचारिक विमर्श में स्वयं डॉ रमेश पोखरियाल निशंक जी ने लेखकों की सधी हुई लेखनी, सम्पुष्ट भाषा शैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि शब्द और विचार किसी भी लेखक की वास्तविक ताकत होते हैं। विचार उसकी संकल्प शक्ति को सशक्त करते हैं तो शब्द सार्थक व प्रासंगिक अभिव्यक्ति देने में उसे सक्षम बनाते हैं।
संवेदनशीलता प्रत्येक साहित्यकार में होती है किन्तु उस की कलम को प्रौढ़ता  तीक्ष्णता और सार्थकता वह परिस्थितियां प्रदान करतीं हैं जिनसे वह साहित्य रूबरू होता है।जो परिवेश से उसे प्राप्त होता है वह उसी में से सृजन का स्त्रोत ढूंढ लेता है और अपने समाज का प्रतिबिंब बनता है। डॉ निशंक जी ने प्रतिष्ठित के साथ नवोदित लेखक समूह को आह्वान किया साहित्यकार को सदैव  सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे संतु निरामया के आदर्श को आत्मसात कर लेखन करना होगा ताकि समाज पर कभी संकट का समय आए तो साहित्य समाज का मार्गदर्शन करने में समाज में परिवर्तन लाने में पूर्णतः समर्थ हो।
डॉ निशंक के साहित्य में सामाजिक यथार्थ और युग बोध... 12डॉक्टर परमजीत कुमार छाबड़ा, प्रिंसिपल, गुरुनानक देव पब्लिक स्कूल, भिक्खीविंड, पंजाब।
ई-मेल: paramjit.dav007@gmail.com

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