Wednesday, September 9, 2026
होमअपनी बातसंपादकीय - ब्रिटेन में बच्चियों का यौन शोषण

संपादकीय – ब्रिटेन में बच्चियों का यौन शोषण

हैरान करने वाली बात तो यह है कि यौन शोषण के मामले में जिन लोगों ने खुली जांच का विरोध किया है उसमें भारतीय मूल के लेबर पार्टी के पंद्रह से अधिक सांसद शामिल हैं तो वहीं टोरी पार्टी के जिन सदस्यों ने इस जांच का विरोध किया है उसमें पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक एवं गृहमंत्री सुएला ब्रैवरमैन भी शामिल हैं। और हम कहते हैं कि यौन शोषण मामले में हम भारतीयों के बहुत ऊंचे आदर्श हैं।

अंग्रेज़ी में एक शब्द है – ‘ग्रूमिंग – Grooming’। यदि आप इस शब्द को गूगल सर्च में डालें तो आपको हैरानी होगी कि इसका अर्थ है घोड़े, कुत्ते या बिल्ली जैसे पालतू पशुओं को साफ़ सुथरा करके उनके बालों को सलीके से कंघी करना। ब्रिटेन में कुत्तों की ग्रूमिंग के लिये हर शहर में ग्रूमिंग स्कूल हैं जहां इस काम का प्रशिक्षण दिया जाता है।
 वैसे ब्रिटेन में ‘फ़िनिशिंग स्कूल’ भी हैं जहां विद्यार्थियों को तहज़ीब के तौर तरीके सिखाए जाते हैं और सिखाई जाती है ग्रूमिंग – यानी कि अपने आपको कैसे संवारा जाये ताकि देखने में उनका व्यक्तित्व आकर्षक लगे। 
आप अवश्य सोच रहे होंगे कि संपादकीय के शीर्षक का भला ग्रूमिंग से क्या लेना-देना है। तो आपको बताते चलें कि लन्दन की मेट्रोपोलिटन पुलिस के अनुसार ‘ग्रूमिंग’ का एक और अर्थ भी होता है – “किसी बच्चे को यौन संबंध बनाने के लिये प्रेरित करने के लिये उससे दोस्ती करने की आपराधिक गतिविधि।” और आज का संपादकीय इसी विषय पर आपसे बातचीत करने वाला है। 
इन दिनों ब्रिटेन का शहर ओल्ड-हैम चर्चा में है कि यहां ‘ग्रूमिंग गैंग्स’ बच्चियों का यौन शोषण कर रहे हैं। ब्रिटेन में ‘ग्रूमिंग गैंग्स’ का मतलब उन लोगों के ग्रुप से है जो बच्चों का शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण करते हैं। इनमें ज्यादातर कम उम्र की लड़कियां होती हैं। ये अपनी बातों में फंसाते हैं, उन्हें विश्वास दिलाते हैं कि वे उनके दोस्त हैं। जब बच्चे उन पर विश्वास करने लगते हैं तो उन पर दबाव बनाकर, डरा-धमका कर काबू में रखते हैं और उनका फायदा उठाते हैं।
देखा गया है कि ‘ग्रूमिंग गैंग्स’ में ज़्यादातर लोग पाकिस्तान से प्रवासी बन कर ब्रिटेन में बसने आए लोग दिखाई देते हैं। ब्रिटेन में ऐतिहासिक गैंग रेप के मामले अभी सुर्खियों मे हैं। खास तौर पर 1997 से 2013 के बीच ‘रॉदरहैम स्कैंडल’ ख़ूब चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे ‘ग्रूमिंग गैंग स्कैंडल’ के नाम से जाना जाता है। हाल ही में कंजर्वेटिव पार्टी ने यौन शोषण कांड के जांच की मांग की थी, लेकिन लेबर पार्टी की सरकार ने इससे इनकार कर दिया कि यह तो काउंसिल का मामला है।
वर्ष 2022 में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी जिसमें बताया गया था कि 1997 से 2013 के बीच ब्रिटेन के रॉदरहैम, कॉर्नवाल, डर्बीशायर, रोशडेल और ब्रिस्टल शहर में कम से कम 1400 नाबालिग बच्चियां यौन शोषण की शिकार बनीं थीं। जिन पर ‘ग्रूमिंग गैंग्स’ के सदस्य होने के आरोप लगे थे उनमें सबसे ज्यादा पाकिस्तानी मूल के लोग थे। 
सोशल मीडिया की लोकप्रियता ने ‘ग्रूमिंग गैंग्स’ को अपने शिकार फंसाने में अतिरिक्त सहायता प्रदान की है। दरअसल ग्रूमिंग गैंग एक प्रकार का अपराधिक गिरोह है जो लड़कियों को अपना शिकार बनाता है। ये समूह आमतौर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जैसे कि सोशल मीडिया, गेमिंग प्लेटफॉर्म्स और चैट रूम्स का उपयोग करके अपने टारगेट को आकर्षित करते हैं।
ग्रूमिंग गैंग में शामिल अपराधी आमतौर पर अपने शिकार को धोखा देने और उन्हें कंट्रोल करने के लिए मैनिपुलेशन और धमकी का उपयोग करते हैं। वे अपने शिकार को अक्सर अश्लील सामग्री भेजते हैं और उन्हें अपनी अश्लील तस्वीरें और वीडियो भेजने के लिये मजबूर कर देते हैं।
बच्चियों को यौन शोषण का नवीनतम मामला इंग्लैण्ड के उत्तरी शहर ओल्डहैम का है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केर स्टार्मर ने सोमवार को यह दावा किया था कि उन्होंने क्राउन प्रोसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) के प्रमुख (2008 से 2013 तक) से कहा है कि ऐसे मामलों की फिर से जांच करवाई जाए जहां ‘एशियाई ग्रूमिंग गिरोह’ के खिलाफ पहली बार मुकदमा दायर किया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सिख एवं हिन्दू संगठनों ने आपत्ति दर्ज करवाते हुए कहा कि इन्हें एशियाई कहना सच्चाई से दूर भागना है। ये लोग पाकिस्तानी मुसलमान हैं, इनके बारे में साफ़गोई बरतना आवश्यक है। 
सिख और हिन्दू संस्थाओं को महसूस होता है कि मीडिया भी सच बोलने से परहेज़ कर रहा है और इतने संवेदनशील मुद्दे पर ढँके-छिपे ढंग से बात कहने का प्रयास कर रहा है… सरकार और मीडिया का प्रयास यही है कि राजनीतिक तौर पर कोई ऐसी बात ना कही जाए जिससे कोई तबका नाराज़ हो जाए। 
बच्चियों के यौन शोषण को लेकर अमरीका के अरबपति ईलॉन मस्क ने सीधे-सीधे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केयर स्टार्मर की कड़ी आलोचना करते हुए सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर आरोप लगाया है कि, “स्टार्मर ने बड़ी संख्या में हुए बलात्कारों के मामले में गहरी सहभागिता दिखाई थी और उसके बदले वोट हासिल किए। जांच रिपोर्ट में यह साफ़ दिखेगा।”
मस्क ने सुरक्षा मामलों की मंत्री जेस फिलिप्स को भी निशाने पर लिया। मस्क का कहना है कि उन्होंने ओल्डहैम की परिषद से मिले जांच के अनुरोध को ठुकरा दिया। मैनचेस्टर के निकट ही यह एक और कस्बा है जहां ग्रूमिंग गैंग सक्रिय थे। मस्क का कहना है, “उन्हें जेल होनी चाहिए।”
वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक हस्ती मार्टिन डाब्ने ने भी ब्रिटिश प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए लिखा है, “केयर स्टार्मर ने अभी यह बयान जारी किया है कि जो लोग यौन शोषण के मामले में खुली जांच की मांग कर रहे हैं, वे दक्षिणपंथियों की बहती गंगा में हाथ धो रहे हैं।… क्या पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग द्वारा हज़ारों बच्चियों के शोषण की जांच की मांग करना दक्षिणपंथ का समर्थन कहा जा सकता है?”
ब्रिटेन के हेल्थ सेक्रेटरी वेस स्ट्रीटिंग ने कहा, “मुझे लगता है कि ईलॉन मस्क ने जो कुछ आलोचनाएं की हैं, वे गलत हैं और निश्चित रूप से गलत सूचना पर आधारित हैं।” उन्होंने यह भी कहा, “लेकिन हम ईलॉन मस्क के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। मुझे लगता है कि उन्हें अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए इस गंभीर मुद्दे से निपटने में हमारी और दूसरे देशों की मदद करने में बड़ी भूमिका निभानी है। इसलिए अगर वह हमारे साथ काम करना चाहते हैं तो उन्हें अपनी आस्तीन ऊपर चढ़ा लेनी चाहिए। हम इसका स्वागत करेंगे।”
ब्रिटेन में पाकिस्तानी ‘ग्रूमिंग गैंग्स’ को बीजेपी भी मुद्दा बना रही है। बीजेपी के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने ‘ग्रूमिंग गैंग्स’ की चर्चा के बीच लव-जिहाद की याद दिलाई। वहीं, शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केयर स्टार्मर के बयान निशाना साधा है।
मगर सवाल वही है कि क्या इससे कुछ बदलेगा? या फिर हर बार की तरह, कुछ दिन का हल्ला-गुल्ला होगा और फिर सब कुछ दबा दिया जाएगा, भुला दिया जाएगा?
उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ये ‘एशियाई’ नहीं, बल्कि ‘पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग’ हैं। उन्होंने लिखा, “मेरे बाद दोहराइए, ये एशियाई ग्रूमिंग गैंग नहीं बल्कि पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग हैं।” इस पर ईलॉन मस्क ने जवाब दिया ‘सच!’। प्रियंका चतुर्वेदी ने अपनी पोस्ट में कहा, “एक दुष्ट राष्ट्र के लिए एशियाई लोगों को क्यों दोषी ठहराया जाना चाहिए?”
ब्रिटेन की लेबर पार्टी पर वही आरोप लगाए जा रहे हैं जो भारत के इंडी गठबंधन पर लगाए जाते रहे हैं – वोट बैंक राजनीति। यदि एक इतना वीभत्स मुद्दा पिछले दो दशकों में बार-बार उभर कर सामने आ रहा है तो सत्ता चाहे किसी भी सरकार की क्यों ना हों, खुली जांच करवाना सरकार का नैतिक कर्तव्य है। हैरान करने वाली बात तो यह है कि यौन शोषण के मामले में जिन लोगों ने खुली जांच का विरोध किया है उसमें भारतीय मूल के लेबर पार्टी के पंद्रह से अधिक सांसद शामिल हैं तो वहीं टोरी पार्टी के जिन सदस्यों ने इस जांच का विरोध किया है उसमें पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक एवं गृहमंत्री सुएला ब्रैवरमैन भी शामिल हैं। और हम कहते हैं कि यौन शोषण मामले में हम भारतीयों के बहुत ऊंचे आदर्श हैं। 
तेजेन्द्र शर्मा
तेजेन्द्र शर्मा
लेखक वरिष्ठ साहित्यकार, कथा यूके के महासचिव और पुरवाई के संपादक हैं. लंदन में रहते हैं.
RELATED ARTICLES

60 टिप्पणी

  1. आजकल न्यूज में भी इसी मुद्दे पर खूब बात हो रही है। मासूम बच्चियों के साथ ऐसा होना गलत है। आजकल तो लड़के भी सुरक्षित नहीं। कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए। आपने अपने संपादकीय में इस जरूरी मुद्दे को उठाया, खूब शुभकामनाएं।

    • प्रगति जी, यह बीमारी एक नासूर बनती जा रही है और राजनीतिक दल वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं। टिप्पणी के लिये हार्दिक धन्यवाद।

      • सही विचारणीय विवेचना के लिए साधुवाद तेजिन्दर जी। शुभकामनाएं ।- डॉ के एल सोनकर ‘सौमित्र’

  2. किसी भी मासूम को या किसी एडल्ट को भी, इस तरह के जाल में फंसा कर उसका शोषण किया जाना क्रूरतम अपराधों कि श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
    और हर कीमत पर उसका विरोध किया जाना चाहिए। वास्तव में सारा एशिया बदनाम क्यों हों अगर किसी देश विशेष के ही लोग अपराध में लिप्त होते हुए सिद्ध हुए हैं तो। वोट कि राजनीति ने क्या-क्या बर्बाद ना किया।
    पुनः एक महत्वपूर्ण विषय पर है आपका सम्पदाकीय। आपको साधुवाद और शुभकामनायें।

    • निर्देश जी, आपने सही सवाल उठाए हैं। यह मुद्दा बहुत संगीन है। राजनीति से ऊपर उठ कर देशहित में कार्य करना आवश्यक है।

  3. बेहद गंभीर संपादकीय सर। मैंने इसे पढ़ा लेकिन आवाज कानों में आपकी आ रही थी जैसे आप ये बोलकर बता रहे हों बातचीत में फोन पर।

  4. यह बहुत ही संवेदनशील विषय है। इन लोगों की इस विकृत मानसिकता से सामाजिक व्यवस्था एवं सुरक्षा पर प्रश्न चिह्न लग जाता है। यह तो आपने सही कहा कि सरकार चाहे किसीकी भी हो जाँच होनी चाहिए और कड़े से कड़े दंड भी दिए जाने चाहिए। ईश्वर जाने… यह सबकुछ कब बंद होगा। छोटे बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए इन अपराधीयों को कदापि माफ नहीं किया जाना चाहिए।

    आपका संपादकीय हम पाठकों के लिए एक दर्पण है….. साधुबाद

    • अनिमा जी, विश्व भर के राजनीतिक दल तुच्छ लाभ के सामने देशहित को कहीं पीछे छोड़ देते हैं।

  5. बहुत ही गंभीर मामला आपने उठाया है जिसे वहां की सरकार को भी पढ़ना चाहिए और शर्मिंदा होना चाहिए। पर ऐसी पूर्वग्रहों वाली सोच वालों को अपने हितों के अलावा कुछ नज़र नहीं आता। इस तरह वहां यौन शोषण की खबर बहुत समय से सुनाई दे रही है और यह भी स्पष्ट है। कि पाकिस्तान के गैंग्स की करतूत है। भारत में ऐसा होता है तो यहां भी किसी के कान पर जूं नहीं रेंगती है किन्तु आश्चर्य यह कि इंग्लैंड में भी ऐसा लयुकवार्म रवैया अपनाया जा रहा है जबकि इंग्लैंड को पाकिस्तानी तत्वों की बदमाशी का पता है पर उन्हें देश में आने कैसे जाता है। भारत मूल के पंद्रह सांसद भी जांच के खिलाफत कर रहे हैं, आपने सही कहा कि भारत तो मानव मूल्य और नैतिकता को महत्व देता है पर सब नीचे स्तर की राजनीति के सब भेंट चढ़ जाता है। वहां भी किसी को अपनी बेटियों की फ़िक्र नहीं है। होना तो यह चाहिए कि दोषियों का पता लगा कर उन्हें सख्त सजा दी जाए।

    • संतोष जी, यूरोपीय देशों ने होलसेल में शरणार्थी अपने यहां स्वीकार कर लिये। अब भुगतना पड़ रहा है।

  6. हद है, हमारी बच्चियों का रेप किया जा रहा साफ तौर पर पाकिस्तानियों यानि मुस्लिमों द्वारा और वोट की राजनीति उनको उनके अपराध।की सजा देना तो दूर उन्हें पाकिस्तानी कहने में भी एतराज़ जता रही है । सही कहा भारत में जो इंडी गठबंधन कर रहा है वही ब्रिटेन में किया जा रहा है । बेहद शर्मनाक और निंदनीय। इससे मुस्लिम कौम का भला नहीं बल्कि उस कौम के अपराधियों को प्रश्रय देकर उस कौम का जीवन नारकीय बना रहे हैँ राजनीतिक दल ।

    • आलोक भाई, यह मुद्दा तभी हल होगा जब राजनीति से ऊपर उठ कर, तुच्छ स्वार्थों को ताक पर रख कर इस पर गंभीरता से एक्शन लिया जाएगा।

  7. यह बेहद चिंताजनक है कि वोट की राजनीति के कारण अपराधों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सभ्य समाज में इन दरिंदों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए लेकिन इन्हें शरण दी जा रही है।
    निंदनीय कृत्य है और
    ब्रिटिश सरकार को न सिर्फ इसकी जांच करनी चाहिए बल्कि दोषियों को सजा भी मिले, यह भी सुनिश्चित करना चाहिए।

  8. महत्वपूर्ण सम्पादकीय। सही मुद्दा आपने उठाया है। अपराधियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इस विषय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

  9. वोटों की राजनीति ने भारत ही नहीं बल्कि विश्वभर के राजनैतिक दलों के विवेक और मानवीय संवेदनाओं को दरकिनार कर दिया है। पाकिस्तानी मुस्लिमों की निकृष्ट मानसिकता पर प्रहार करने के स्थान पर उन्हें खुलकर दोषी क़रार करना भी मुश्किल प्रतीत होता है। हमें लगता है इन घटनाओं के पीछे और भी बहुत कुछ ऐसा है जिसका ख़ुलासा होना अभी बाकी है।
    कारण जो भी हो, अपराधी को दण्ड नहीं दिया गया तो एक दिन अपराध का सामान्यीकरण हो जायेगा…… वहीं से शायद दुनिया के अंत की शुरुआत हो जाये।

    • रचना, आपने ठीक कहा कि पहले तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिये कि बीमारी क्या है और उसका इलाज क्या किया जाए।

  10. आदरणीय आपका संपादकीय एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रित है। इस प्रकार किसी को जाल में फंसा कर उसका शोषण किया जाना निस्संदेह क्रूरतम अपराधों की श्रेणी में आता है और इसका हर स्तर पर विरोध होना चाहिए। वास्तव में, पूरे एशिया को क्यों बदनाम किया जाए, यदि किसी विशेष देश के लोग ही इस प्रकार के अपराधों में लिप्त पाए गए हैं?
    वोट की राजनीति ने समाज को कितना नुकसान पहुंचाया है, यह विचारणीय है। इस महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाने के लिए आपको साधुवाद और शुभकामनाएं।

    • वंदना जी, आप तो ब्रिटेन में रहती हैं और मुद्दे की गंभीरता से वाक़िफ़ हैं… हमारे प्रधानमंत्री को संज्ञान लेना होगा वर्ना बीमारी फैलती जाएगी। अपराधियों के मन में डर बैठाना आवश्यक है।

  11. पुरवाई के संपादकीय विगत कई सप्ताह में बेहद अनूठे और ऐसे सच को उजागर करते हैं जिनके बारे में बात करने से लोग कतराते हैं और कहीं ना कहीं एक बड़ा वर्ग जो सियासत या सत्ता में है उस पर अब उसके कुत्सित कार्यों के छींटे आते हैं। ऐसा ही एक वीभत्सता से भरा हुआ विषय ग्रूमिंग गैंग्स इस बार का संपादकीय है।
    संपादकीय के अनुसार, पहले इसे एशियाई ग्रूमिंग गैंग्स का नाम दिया गया। बाद में इसे पड़ोस के देश या देशों के लोगों की घिनौनी मनोवृति के रूप में बताया गया है।
    यदि इसके ऐतिहासिक और प्रासंगिक संदर्भ में जाएं तो महाभारत में इसका साफ-साफ उदाहरण मिलता है। याद कीजिए कौरव पांडवों के बीच में द्युत सभा या जुआ खेलने की सभा।
    देखा जाए तो आज भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या रमी
    या इस तरह के खेलों में वही द्युत ही तो है। जिसमें पैसा, क्रेडिट प्वाइंट्स या गिफ्ट्स की बात होती है वही द्युत सभा में जब शकुनि के कारण पांडव हार गए तो अंत में एक बड़ा सा प्रलोभन दिया गया कि यदि द्रौपदी को दांव पर लगा दें और आप जीत जाएं ।तो सब कुछ जो हारा है।तो वह सब वापिस हो जाएगा।
    तो ग्रूमिंग गेम्स की बात यहां से भी बड़े परिपुष्ट होती है। एक और औचित्य पूर्ण बात यदि धर्म अपने स्थान से हटा है तो वह धर्म अनाचार और अनीति की तरफ बढ़ता है ।यह एक बड़े मानवीय युद्ध की ओर अग्रसर होता है ।जिसके कारण आज भारत और उस अखंड भारत के हिस्से जो वर्ण संकरता का दंश झेल रहे हैं ।
    यह उसी की परिणिति अब सामने आई है ,जिसे हम ग्रूमिंग गैंग्स के नाम से जान रहे हैं।
    अविकसित और विकासशील देशों में तो यह सरे आम , सरे राह, सरे रोज़ होता है कभी दबंग जाति या सत्ता या घिनौने अपराधों को दबाने हेतु ऐसा करते हैं और प्रशासन और व्यवस्था भीष्म पितामह और द्रोण की मानिंद मातम मनाते रहते हैं। भारत में यह ग्रूमिंग गैंग्स का अपराध अभी तो सुर्ख रूँ होना है।
    भई अंग्रेज यहां दो सौ साल राज कर के गए हैं जब वे और यूरोपी थकेगा तब ना यहां उसकी नकल होगी।
    ब्रिटेन का राजनैतिक परिदृश्य भी तो अखंड भारत के ही कारण आज घटिया हुआ है जिसमें वोट की रिश्वत ने उसकी रवायत निभाई है ।
    यूं भी जैसी संगत वैसी रंगत,,,आप गौरांग प्रभु अखंड भारत में रहे ,,, लूट मचाई और मेहनत करने की प्रवृत्ति गड़बड़ाई और यही अब ग्रूमिंग गैंग्स के रूप में है आई।
    हमारे भारतीय संदर्भ में कहावत है
    करनी करे तो क्यूं डरे
    और करके क्यूं पछताय
    बोए पेड़ बबूल के तो
    आम कहां से खाय।
    संपादकीय ब्रिटेन को अपनी गिरते सांस्कृतिक मूल्यों को बता रहा है।और ऐसा करके वह MBE पुरस्कार दिए जाने के औचित्य को व्यावहारिक रूप से सत्यता के आलोक में दिखा रहा है।यह संपादकीय एक और मूल भूत भारतीय संस्कृति की झलक अंग्रेज सरकार को बता रहा है और वह है।
    निंदक नियरे राखिए
    आंगन कुटी छवाय
    बिन पानी बिन साबुनों
    निर्मल हो तो सुभाय।
    उम्मीद है संपादकीय का असर क्रिकेट के टी २० फॉर्मेट में ना होकर पांच दिवसीय टेस्ट मैच की मानिंद होगा।
    शानदार और निडर संपादकीय।

    • भाई सूर्य कांत जी, पुरवाई हमेशा सच के साथ खड़ी होती है। जो ग़लत है वो ग़लत है चाहे कोई भी करे। हम किसी राजनीतिक विचारधारा के समर्थक नहीं हैं… मानवता हमारा मुख्य मुद्दा है। पूरे विश्व में राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते मूल्यों का अवमूल्यन हो रहा है। आपने तो महाभारत काल से इस समस्या को जोड़ कर नये आयाम प्रदान किये हैं। धन्यवाद।

  12. सभ्य समाज का एक घिनौना चेहरा… आपने पाठकों को सचेत किया है। बढ़िया प्रस्तुति

  13. तेजिंदर शर्मा जी,
    आपका लेख पढ़कर मन विचलित हो गया, लेकिन साथ ही आपको इस विषय पर लिखने के लिए धन्यवाद कहना चाहता हूँ। आपने जिस गंभीरता और निर्भीकता से ब्रिटेन में ‘ग्रूमिंग गैंग्स’ के मुद्दे को उजागर किया है, वह सराहनीय है। यह बेहद दुखद और चिंताजनक है कि इतने संवेदनशील और वीभत्स मामलों को बार-बार दबाने और राजनीतिक स्वार्थों के चलते नजरअंदाज करने की कोशिश की जाती है।
    आपने सही कहा कि इन मामलों में ‘एशियाई’ शब्द का प्रयोग करके सभी भारतीयों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, जबकि सच तो यह है कि इनमें ज्यादातर अपराधी पाकिस्तानी मूल के लोग हैं। सच्चाई को तोड़-मरोड़कर पेश करना, और भारतीयों की छवि को खराब करना सरासर गलत है।
    यह बेहद जरूरी है कि ऐसे मामलों में अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और इन मुद्दों पर खुली जांच हो। आपकी लेखनी ने एक बार फिर साबित किया है कि मीडिया की जिम्मेदारी सिर्फ खबरें देना नहीं, बल्कि सच्चाई को उजागर करना और न्याय के लिए आवाज उठाना भी है। [email protected]

  14. सर!आप अपने संपादकीय में बहुत ही गंभीर और आँखें खोल देने वाले विषय उठा रहे हैं…मन विचलित होता है पढ़कर लेकिन साथ ही निरंतर सचेत रहने की भी प्रेरणा मिलती है।
    कोई भी देश हो, कोई भी पार्टी सभी को ऐसे सम्वेदनशील मुद्दे पर एकमत होना ही चाहिए।

    • जया हमारा प्रयास रहता है कि हर बार समाज से जुड़ा कोई मुद्दा उठाया जाए। आप सबका समर्थन हमारी शक्ति है।

  15. बच्चियों का शोषण होता है उन्हें धोखे से फंसाते हैं। यह एक बहुत ही आम और मुश्किल समस्या हो गई है। यह एक वैश्विक समस्या है ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अपराधियों के लिए सबसे सहज माध्यम है और छोटे बच्चों के हाथों में मोबाइल व माता-पिता की निगरानी व उपस्थिति की कमी इस धोखे की समस्या को और भी बढाये दे रही है। राजनीतिक दल अपनी वोटो के लालच में बहुत कुछ इतना गलत कर रहे हैं, जिसकी भरपाई मुश्किल होगी।
    एक देश को सीधे-सीधे दोष न देकर पूरे एशियाई देशों को दोष देना, इस बात को लेकर आवाज उठाई जानी चाहिए।

    आपके संपादक विभिन्न विषय पर चर्चा को स्थान देते हैं और उन्हें चर्चा में लाते हैं

    • प्रिय सुधा, आपने संपादकीय को सही परिप्रेक्ष्य में समझा है। हार्दिक धन्यवाद।

  16. पुरवाई पत्रिका के संपादकीय – “ब्रिटेन में बच्चियों का यौन शोषण” में तेजेन्द्र सर जी ने इस मुद्दे को उठाकर अपने लेखकीय धर्म का अच्छे से निर्वाह किया है। सभ्य समाज में इस तरह की घटनाएं हमें आज भी जंगलीपन का एहसास कराती हैं। इससे ज्यादा वहशीपन क्या हो सकता है कि जिस देश ने उन्हें रोजी-रोटी दी है उन्हीं के यहां घिनौना काम करते हैं। पाकिस्तान की मीडिया इस पर ज्यादा नहीं बोल रही है।इंग्लैंड मानवीय मूल्यों की बहुत हिफाजत करता है, ये लोग उसी का नाजायज़ फायदा उठाते हैं। सभ्य लोगों के बीच में असभ्य लोगों का प्रवेश बड़ी दिक्कत देता हैं।
    ये लोग ग्रुप बनाकर पूरी योजना के साथ बच्चियों को भरमा लेते हैं और उनका शोषण करते हैं। इन्होंने पूरी दुनिया को हलकान कर रखा है। सारे देश परेशान हैं। कुछ देश खासकर साऊदी अरब तो मार-मारकर भगा रहे हैं पर कुछ अपने स्वार्थवश इन्हीं की हिमायत करते दिखते हैं।इनका समाज ऐसे मामलों में बुरी तरह से चुप्पी साधे रहता हैं। एलन मस्क जैसे जागरूक लोग जब आवाज उठाते हैं तो इन्हें शर्म तो दूर की बात उल्टे बायकॉट मस्क की मुहिम चलाने लगते हैं। कुछ समाजों में दूसरे की बहू बेटियों को अपनी हवस का सामान समझने की प्रवृत्ति होती हैं। ऐसे में आज नहीं तो कल खामियाजा इस समाज के अच्छे लोगों को भुगतना पड़ेगा। आश्चर्य तो इस बात का होता है कि इंग्लैंड जैसे सुशिक्षित देश में (ये भी सुशिक्षित हैं) भी ये लोग अपने समाज के वहशी तत्वों पर कुछ नहीं बोलते हैं।
    राजनेताओं का रवैया भी बहुत खेदजनक है। अपने लाभ के लिए ये लोग इनकी पैरवी करते दिखते हैं। या सीधे तौर पर न कहकर आय-बाय करके इनके पक्ष में खड़े हो जाते हैं।देखते हैं इंग्लैंड के लोग कितना और कब तक सबर करते हैं। बढ़िया संपादकीय के लिए आपको बहुत बहुत बधाई

    • भाई लखनलाल पाल जी, आपकी टिप्पणी की प्रतीक्षा रहती है। हमें एक नया दृष्टिकोण मिलता है आपकी टिप्पणी से।

  17. अत्यंत निंदनीय एवं ख़ौफ़नाक कृत्य। ग्रूमिंग का नया अर्थ आज पता चला। आश्चर्य की बात यह हैं कि यह सब ब्रिटें में हो रहा है। जवळन्त पमुद्दे पर संपादकीय के लिए साधुवाद।

  18. आज की सम्पादकीय सराहनीय है लेकिन चर्चा में इसलिये आ गई क्योंकि ये यूरोप से जुड़ गई है। इसमें कोई शक नहीं कि इसमें सर्वाधिक पाकिस्तान का नाम आया है क्योंकि इस जगह पलनेवाला मत बच्चियों और महिलाओं में कोई अंतर नहीं समझता लेकिन हमारे देश में भी अध्ययन किया जाय तो छोटी बच्चियों का अपहरण और उनकी ग्रूमिंग भी बड़े स्तर पर होता है। इसके प्रमाण पुलिस के पास होते हैंं। मैं स्वयं आपराधिक मामलों की सिरीज़ देखती हूँ और इस तरह के मामले संज्ञान में तभी आते हैं, जबकि पुलिस सफल होती है। कितने ग्रूमिंग सेंटर तो नामी गिरामी लोगों के संरक्षण में भी होते हैं। रेड लाइट एरिया में बच्चियाँ क्यों और कैसे पहुँचती हैं? फिर उनकी ग्रूमिंग की जाती है, उनका इतना बड़ा नेटवर्क होता है कि पकड़ना मुश्किल होता है।
    अगर एशिया के नाम हम तिलमिलाने लगें तो सच पर परदा नहीं डाला जा सकता है। हम क्यों विपक्ष में खड़े हैं क्योंकि चनमें से किसी की बेटी इसका शिकार नहीं हुई। सच पर परदा डालने से सच छिपता नहीं है।

    • रेखा जी, बच्चियों के दैहिक शोषण को भारतीय परिवेश में तुलनात्मक रूप से समझाने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

  19. आदरणीय तेजेंद्र शर्मा जी अपने संपादकीय में हमेशा वर्तमान ज्वलंत मुद्दों और घटनाओं का वर्णन कर सच्चाई सामने लाने का प्रयास करते हैं। कई समस्याएं और मुद्दे तो पाठकवर्ग को ज्ञात ही नहीं होते जिनको विस्तार से है पुरवाई के संपादकीय में पढ़कर जागरूक होते हैं।
    ग्रूमिंग की समस्या बहुत समय से चली आ रही है। इसके लिए जो जिम्मेदार हैं वे तो सजा के पात्र हैं ही वे भी सजा के हकदार हैं जो इसकी जांच में रोड अटकते हैं।
    वोटों की राजनीति ने आम जनता के जीवन में विष घोल दिया है।

    • पद्मा, आपकी स्नेहपूर्ण टिप्पणी हमारा हौसला बढ़ाती है। आपने संपादकीय को सही परिप्रेक्षय में पकड़ा है।

  20. ऐसी खबरें वर्तमान ही नहीं भविष्य के प्रति भी डर पैदा करती हैं। आपका सवाल कि इससे कुछ बदलेगा, का जवाब है कि इससे कुछ नहीं बदलेगा, हर बार की तरह, कुछ दिन का हल्ला-गुल्ला होगा और फिर सब कुछ दबा दिया जाएगा, भुला दिया जाएगा। पीछे बचा रह जाएगा सिर्फ एक डर !

  21. अत्यंत क्षोभजनक। मुल्लाओं का इस्लाम तो कहीं काफिरों के प्रति ऐसी गतिविधियों को नहीं उकसाता? एक ही मजहब के लोग इस दुराचार में क्यों इतना अधिक संलिप्त हैं?

  22. एक सफल और विकसित कहे जाने वाले देश में ऐसी घिनौनी राजनीति सोचने पर विवश करती है कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा किसी तीसरे के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती है|

  23. इतना घिनौना आजकल लड़के भी सुरक्षित नहीं हैं यह एक मानसिक बिमारी है
    ऐसे लोग मानसिक रोगी होतें हैं
    पागल कुत्तों के साथ जो सुलूक होता है वो ही होना चाहिए इनके साथ सख़्त क़ानून
    आप इस तरह के बोल्ड और जरूरी मुद्दों पर बात करतें हैं
    यह बेहद जरूरी है

  24. बच्चियों का यौन शोषण सिर्फ ब्रिटेन में ही नहीं पूरे विश्व की समस्या होती जा रही है। ब्रिटेन में ‘ग्रूमिंग गैंग्स’ बच्चियों का फंसा कर अपने उद्देश्य को कार्यान्वित कर रहे हैं तो भारत में भी लव जिहाद के मामले इसी प्रकार के हैं किन्तु यहाँ भी इन कुकृत्यओं पर किसी का मुँह नहीं खुलता। इस गैंग कों एशियायी कहकर समस्या से मुख मोड़ना है। इस गैंग में शामिल लोग पाकिस्तानी मुस्लिम हैं तो स्वीकारने में क्या आपत्ति है? न जाने इन राजनीतिक पार्टियों की वोटों की भूख कितनी है जो सच को सच नहीं कह पाती हैं।

    ऐसी घटनाओं पर भी सरकार और मीडिया का प्रयास यही है कि राजनीतिक तौर पर कोई ऐसी बात ना कही जाए जिससे कोई तबका नाराज़ हो जाए, सांप्रदायिक सौहार्द न बिगड़ जाये। अगर इस समस्या से निजात पानी है तो हमें मानसिकता को बदलना होगा। गलत कों गलत कहना सीखना होगा।

    वैसे भी आज इंसान की मानसिकता इतनी विकृत हो गई है कि यौन शोषण सिर्फ लड़कियों का नहीं लड़कों का भी हो रहा है। कभी-कभी तो अपनी ही जान पहचान वालों के द्वारा।

    इसका कारण आजकल बच्चों का सोशल मिडिया पर अधिक समय बिताना भी है। माता-पिता भी अपनी व्यस्तता के कारण बच्चों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। मुझे लगता है कि यह समस्या माता-पिता के बच्चों को आवश्यकता से अधिक छूट देने, उन्हें नैतिक शिक्षा न देने या उन पर अति विश्वास के कारण हुई है। अक्सर माता-पिता सोचते हैं कि उनके बच्चे गलती कर ही नहीं सकते। ज़ब समस्या उनके सामने आती है तो वे विवशता से हाथ मलते रह जाते हैं।

    आपने इस कटु समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट कर समाज, माता-पिता और किशोरावस्था में प्रवेश करते बच्चों को सचेत करने का प्रयास किया है। काश! आपका प्रयास सफल हो।

    • सुधा जी आपने एकदम सही कहा है कि, “ऐसी घटनाओं पर भी सरकार और मीडिया का प्रयास यही है कि राजनीतिक तौर पर कोई ऐसी बात ना कही जाए जिससे कोई तबका नाराज़ हो जाए, सांप्रदायिक सौहार्द न बिगड़ जाये। अगर इस समस्या से निजात पानी है तो हमें मानसिकता को बदलना होगा। गलत कों गलत कहना सीखना होगा।”

      इस समस्या पर कुछ कठोर निर्णय लेने ही होंगे।

  25. जितेन्द्र भाई, अपने इस सम्पादकीय में जो आप ने मुद्दा उठाया है उसके बारे में मैं ने कहीं थोड़ा पढ़ा था। आपने तो पूरी किताब लिखकर सब की आंखें ही खोल डाली। आपके सम्पादकीय को पढ़कर और असलियत क्या है उसे जानकर मन बहुत विचलित हुआ। अपने आप को दुनिया का सभ्य देश कहलाने वाले देश में जब ऐसी हर्कतें 16 साल तक होती रही हों और political correctness के चक्कर में वहाँ की सरकार उसपर कोई भी ठोस कदम उठाने से इंकार करदे तो इस से ज़्यादा शर्मनाक बात और क्या हो सकती है। जब पता है कि बच्चियों के यौन शोषण की कर्तूतों में मुख्य हाथ पाकिस्तानियों का है तो फिर इस गैंग को उनके असली नाम ‘पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग’ न कहकर ‘एशियन ग्रूमिंग गैंग’ कहकर क्या अधिक वोटें मिल जाएंगी। आप ने जो १८ फ़ोटो लगाई हैं, उन्हें देखकर तो, इन में से, कोई भी टीनेजर नहीं लगता। सब पूरे आदमी लगते हैं। अगर छोटी छोटी बच्चियों के साथ यह आदमी यौन शौषण की घिनौनी हर्कत कर रहें हैं और इन के कारनामों पर केयर स्टार्मर की सरकार पर्दा डाल रही है तो आने वाले कल में क्या होगा उसका तो भगवान ही रखवाला है।
    वैसे, मानो या न मानो, ऐसे दुशकर्मों को बढ़ावा देने के लिये सोशल मीडिया का बहुत बड़ा हाथ है। अकसर माँ बाप को पता ही नहीं चलता कि उनका बच्चा सोशल मीडिया पर इतना समय क्यों बिता रहा/रही है। खुली छूट के जब परिणाम सामने आते है तो तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
    लेबर पार्टी और टोरी पार्टी के मैम्बरों से मेरा यह खुला सवाल है कि अगर तुम्हारे में थोड़ी सी भी ज़मीर बाकी है तो ‘अपने गरेबाँ में झाँक कर देखो और बताओ’ कि अब तक जो तुमने झूट को छुपा कर सच को सामने नहीं आने दिया और, अपनी वोटों की ख़ातिर, असलियत को नज़र अंदाज़ करते हुए किसी भी किस्म की जाँच कराने में हिचक दिखाई है; उसकी तुम को क्या सज़ा मिलनी चाहिए? अपनी सज़ा का फ़ैसला आज तुम स्वयं करोगे।

  26. विजय भाई, आपकी टिप्पणी आपके भीतर की नाराज़गी का सही प्रतिनिधित्व करती है। आपने ब्रिटेन की दोनों मुख्य राजनीतिक पार्टियों से सही सवाल पूछा है। उन्हें जवाब देना ही होगा।

  27. तेजेन्द्र जी!
    संपादकीय का विषय इतना गंभीर और अमानवीय है कि इसके विरुद्ध विश्व स्तर पर ठोस व त्वरित कार्यवाही होनी चाहिये।
    विकसित देशों का यह काला सच है। कुछ कृत्य ऐसे होते हैं, जिन मामलों में दलगत नीति से हटकर हर पार्टी को एकजुट होकर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिये।
    जब हमने पहली बार इस संपादकीय पढ़ा था उस समय हमें बहुत ज्यादा तकलीफ हुई थी। लेकिन यह विषय ही ऐसा है कि जितनी बार इसे पढ़ा जाएगा तकलीफ हर बार होगी।
    पाकिस्तान एक क्रूर राष्ट्र है। और मुस्लिम आतंकवाद भी उतना ही क्रूर है। बच्चियों अगर दुधमुही भी हैं तो इनसे दया की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
    बात गैंग की है इसलिए चिंताजनक है वरना इस तरह के कांड व्यक्तिगत तौर पर हिंदुस्तान में भी होते हैं।
    सब कुछ अंधेर नगरी चौपट राजा की तरह है। राजनीतिक पार्टियों को तो क्या ही कहा जाए!!!! आश्चर्य इस बात का हू कि क्या सोचकर इस जघन्य अपराध को टाला जा रहा है!!!! हमें तो यह आश्चर्य होता है कि ऐसे गंभीर अमानवीय अपराधों के समर्थन के पीछे क्या उद्देश्य हो सकता है ? इन लोगों का मन अशांत नहीं होता?
    सारे संसार में इतने अधिक मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे,गिरजाघर!! और इतने जघन्य अपराध!! भगवान के नजरों के सामने भगवान को धोखा दिया जा रहा है!
    काश इंसान एक इंसान बन पाता।
    अब आपको क्या ही कहें तेजेन्द्र जी! संसार की जहरीली सच्चाइयों से साक्षात्कार कराने के लिये आपकी हिम्मत व हौसले को दाद देते हैं।
    एक क्षणिक दैहिक सुख के लिए इंसान कितना वहशी हो सकता है जिसकी कोई सीमा नहीं।
    हम आपके हौंसले को दाद देते हैं।
    जितना अभूतपूर्व आपका संपादकीय रहता है, उतना ही अभूतपूर्व आपका साहस है। हैट्स ऑफ आपको।

    • आदरणीय नीलिमा जी, आपकी टिप्पणी हमेशा महत्वपूर्ण होती है। जब ऐसे अपराध धर्म को दिमाग़ में रख कर किये जाते हैं तो और अधिक पाश्विक हो जाते हैं। उद्देश्य केवल उस देश के कल्चर को तहस-नहस करना है जिसने आपको पनाह दी है।

  28. आपकी यह बात तो 100% सही है तेजेन्द्र जी!धर्म को ध्यान में रखकर किए गए इस तरह के अपराध वास्तव में बहुत पाश्विक हो जाते हैं क्योंकि इसमें कहीं ना कहीं एक बदले का भाव आ जाता है धार्मिक श्रेष्ठ का भाव आ जाता है इसलिए दमन का भाव क्रूरता से नजर आता है। बड़ों से नहीं तो बच्चों से ही सही, मासूम बच्चियों से ही सही। पता नहीं कुरान में ऐसा भी कुछ लिखा है क्या? कुरान की दुहाई देने वाले एक बार कुरान को पढ़ते और समझ पाते तो बेहतर होता।
    कोई धर्म या कोई भी धर्म ग्रंथ ऐसा नहीं है जिसमें अमानवीयता का समर्थन किया गया हो या उसमें बदले लेने की बात की गई हो। हर धर्म मानवता का संदेश देता है।
    शुक्रिया पुनः।

  29. आपके संपादकीय हमेशा महत्वपूर्ण मुद्दों पर आधारित होते हैं।बच्चियों का यौन शोषण अत्यंत जघन्य अपराध है; इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। इतने विस्तार से जानकारी देने के लिए आपका आभार।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Most Popular

Latest