संपादकीय - यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ इंडिया 3

बहुत बार ऐसा लगने लगता है कि विपक्षी दल नरेन्द्र मोदी का विरोध करते-करते भूल जाते हैं कि वे भारत का विरोध कर रहे हैं। याद किया जाए तो भारत को राष्ट्र के रूप में देखा जाना एक कालजयी अवधारणा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था, “भारत कोई ज़मीन का टुकड़ा नहीं है… यह एक जीवित राष्ट्र है। हज़ारों वर्षों से भारत एक राष्ट्र के रूप में सभ्यता की चेतना का स्थाई तत्व रहा है। इतिहास के किसी भी कालखंड में भारत की राष्ट्रीय अवधारणा तिरोहित नहीं की जा सकती।”

जिस देश पर कांग्रेस पार्टी ने दशकों तक राज किया; भारत को सात-सात प्रधानमंत्री दिये उसी के बारे में वर्तमान प्राइवेट लिमिटिड कंपनी कांग्रेस के वर्तमान मालिक राहुल गांधी ने एक अरब चालीस करोड़ भारतवासियों को संसद के माध्यम से यह संदेश दिया है कि भारत एक राष्ट्र नहीं है!
सुन कर किसी भी इन्सान को शायद ही विश्वास हो कि यह भारत का कोई ज़िम्मेदार राजनीतिज्ञ बोल रहा है। मगर राहुल गांधी तो राहुल गांधी हैं। वे संसद भवन में पारित किये गये बिल की चिंदियां उड़ा सकते हैं… बिना कुछ सोचे समझे कुछ भी बोल सकते हैं। मगर अब तो लगता है कि राहुल गांधी पूरी तरह से बेलगाम हो चुके हैं।
राहुल गांधी का कहना है, “संविधान के अनुसार, भारत एक राष्‍ट्र नहीं है। अंग्रेज़ी में उन्होंने कहा कि – India is described as Union of States – not as a nation… इसके बजाय इसे राज्यों के संघ के रूप में वर्णित किया गया है।
कई बार हैरानी भी होती है कि जो राजनीतिक दल यह कहने नहीं थकता कि स्वतंत्रता संग्राम में उसकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है; जिसके नेता भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संविधान लिखने की समिति बनाई वही राजनीतिक दल आज भारत के राष्ट्र होने पर सवाल उठा रहा है।
दिलचस्प स्थिति यह है कि किसी भी अन्य देश ने भारत के राष्ट्र होने पर सवाल नहीं उठाया। यह सवाल भारत की संसद में भारत के मुख्य विपक्षी दल के नेता ने उठाया है। राहुल गांधी ने आगे कहा, अगर आप संविधान पढ़ें तो आप पाएंगे कि भारत को राज्यों के संघ के रूप में वर्णित किया गया है। इसे एक राष्ट्र के रूप में नहीं बताया गया है। इसका मतलब है कि तमिलनाडु के एक भाई के पास महाराष्ट्र के मेरे भाई के समान अधिकार हैं। निश्चित रूप से यह बात जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, लक्षद्वीप पर भी लागू होती।
राहुल गांधी की आलोचना करने से पहले हमें समझना होगा कि आख़िर हमारे संविधान निर्माताओं ने भारत को यूनियन ऑफ़ स्टेट्स क्यों कहा और फ़ेडरेशन ऑफ स्टेट्स क्यों नहीं कहा। डॉक्टर भीम रॉव अम्बेडकर ने यह बात उस समय स्पष्ट की थी कि ‘फ़ेडरेशन ऑफ स्‍टेट्स’ के बजाय ‘यूनियन ऑफ स्‍टेट्स’ को रखने की दो अहम वजहें हैं। पहला, इंडियन फ़ेडरेशन यानी भारतीय संघ अमेरिकी फ़ेडरेशन की तरह राज्यों के बीच एग्रीमेंट का नतीजा नहीं है। दूसरा… राज्यों को फ़ेडरेशन से अलग होने का कोई अधिकार नहीं है। फ़ेडरेशन एक यूनियन है और यह तितर-बितर नहीं हो सकता है।
राहुल गांधी यहीं नहीं रुके, उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राजा की अवधारणा वापस आ गई है जिसे कांग्रेस ने 1947 में हटा दिया था। अब एक ‘शहंशाह’ है। लोगों पर एक विचार से हमला किया जा रहा है। किसानों ने एक साल तक विरोध किया, राजा नहीं सुनते।
बहुत बार ऐसा लगने लगता है कि जो विपक्षी दल नरेन्द्र मोदी का विरोध करते-करते भूल जाते हैं कि वे भारत का विरोध कर रहे हैं। याद किया जाए तो भारत को राष्ट्र के रूप में देखा जाना एक कालजयी अवधारणा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था, “भारत कोई ज़मीन का टुकड़ा नहीं है… यह एक जीवित राष्ट्र है। हज़ारों वर्षों से भारत एक राष्ट्र के रूप में सभ्यता की चेतना का स्थाई तत्व रहा है। इतिहास के किसी भी कालखंड में भारत की राष्ट्रीय अवधारणा तिरोहित नहीं की जा सकती।”
राहुल गॉंधी ने लोकसभा में तमिलनाडु, सिक्किम एवं जम्मू कश्मीर का जिस भाव से ज़िक्र किया है, यह भविष्य में काफ़ी ख़तरनाक साबित हो सकता है। उनके वक्तव्य से कहीं यह भी अर्थ निकाला जा सकता है कि राज्यों को केन्द्र के प्रति एक अलगाव  रुख अपनाना चाहिये। उनके इस वक्तव्य से कहीं ऐसा नहीं महसूस होता कि कोई ज़िम्मेदार किस्म का नेता संसद में अपनी बात रख रहा है। 
केन्द्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने राहुल गांधी के वक्तव्य पर टिप्पणी करते हुए कहा, राहुल गांधी कहते हैं कि भारत एक राष्ट्र नहीं है. जबकि वो चीन की प्रशंसा करते हैं। जोशी ने कहा, ‘वह (गांधी) अपने वंश के कारण कांग्रेस नेता और सांसद बने। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों का दिल जीता था। प्रधान मंत्री मोदी लोकतांत्रिक रूप से चुने गए लोकप्रिय नेता हैं।  जोशी ने आगे कहा, ‘राहुल बुद्धिहीन हैं. भारत एक देश ही नहीं है, ऐसा बोलते हैं… इनको सांस्कृतिक भारत के बारे में कुछ पता ही नहीं है।
राहुल गांधी यहीं नहीं रुके। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार की ग़लत नीतियों के कारण पाकिस्तान और चीन साथ-साथ हो गये हैं। राहुल गांधी के इस बयान पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उनकी आलोचना की। एस. जयशंकर ने कहा, राहुल गांधी ने लोकसभा में आरोप लगाया कि इस सरकार के कारण पाकिस्तान और चीन एकजुट हो गए हैं। कुछ ऐतिहासिक तथ्य इस प्रकार हैं –  1963 में, पाकिस्तान ने अवैध रूप से शक्सगाम घाटी को चीन को सौंप दिया था… चीन ने 1970 के दशक में पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर के रास्ते से कारा कोरम राजमार्ग का निर्माण किया… दोनों देशों के बीच 1970 के दशक से घनिष्ठ परमाणु सहयोग भी रहा है… 2013 में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा शुरू हुआ… तो, अपने आप से पूछें कि क्या चीन और पाकिस्तान तब दूर थे?
एक सोच यह भी चल रही है कि मुहम्मद अली जिन्ना ने तो केवल टू-नेशन थियोरी दी थी, राहुल गांधी ने तो मल्टी-नेशन थियोरी पेश कर दी है। यदि इस थियोरी को राज्यों ने गंभीरता से ले लिया तो कई राज्य विद्रोह पर भी उतर सकते हैं। 
मंत्री पद की शपथ लेने वाला हर व्यक्ति सौगंध खाता है कि “देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखूंगा.”  कांग्रेस के नेताओं ने भी यह सौगंध कई बार ली है… तो फिर यहां किस अखंडता की बात हो रही है। राहुल गांधी  को शायद इस बात का भी जवाब देना होगा  कि अगर भारत राज्यों का संघ ही है तो राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ में हम किस माता कि वंदना करते हैं? पंजाब माता… बंगाल माता… केरल माता या फिर भारत माता की?
याद रहे कि कांग्रेस पार्टी का संविधान के अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल करते हुए 91 बार ग़ैर कांग्रेसी सरकारों को हटाने का काम कर चुकी है। 1951 में पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने पंजाब सरकार को बर्ख़ास्त किया गया था। नेहरू जी के कार्यकाल में ही केरल में ई.एम.एस. नंबूदरीपाद की पहली वामपंथी सरकार को भी 1959 में हटा दिया गया था। यदि भारत एक देश… एक राष्ट्र न होता तो केन्द्र सरकार 91 बार विपक्षी  राज्य सरकारों को कांग्रेस कैसे बर्ख़ास्त कर सकती थी। राहुल गांधी अपने ग़लत बयानों के कारण बहुत बार मज़ाक का पात्र बन चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी तो पहले ही उन्हें अपना स्टार प्रचारक कहती है। उन्हें अपनी बयानबाज़ी पर रोक लगानी आवश्यक है।
लेखक वरिष्ठ साहित्यकार, कथा यूके के महासचिव और पुरवाई के संपादक हैं. लंदन में रहते हैं.

22 टिप्पणी

  1. सच कहें तो राहुल गांधी भारत को राजनीति के विदूषक हैं उन्हे गंभीरता से लेने वाले उनसे बड़े विदूषक हैं, अरे जो व्यक्ति अपनी पार्टी को गंभीरता से नहीं लेता, कोई भी अन्य पार्टी उन्हे अपने पास नहीं फटकने देती। और बीजेपी भी उनके बुद्धिहीन बयानों को महज इस्तेमाल करती है अपने वोट बैंक को बढ़ाने के लिए , ये बात न राहुल समझ पाते हैं और न वे लेफ्ट साथी जो उनके हर बयान को शास्त्र युक्त बता कर समझते हैं मोदी का विरोध करते हैं जबकि इसे मोदी का समर्थन और बढ़ा रहे होते हैं,

    • क्षमा करें आलोक जी, देश की अखण्डता पर संसद में प्रश्न उठाने वाले विपक्ष ने नेता और गाँधी परिवार के चश्मोचिराग़ राहुल गांधी को विदूषक कह कर नज़रंदाज नहीं किया जा सकता है। भारत मात्र BJP, या भारतीय जनता के दृष्टिकोण तक सीमित नहीं है, इसकी अंतरराष्ट्रीय छवि भी है। वहाँ राहुल गांधी एक गैरजिम्मेदार विदूषक नहीं, भारत की प्राचीनतम पार्टी, काँग्रेस पार्टी के नेता हैं। राहुल का यह बयान संगीन है,इसे मज़ाक की तरह नहीं लेना चाहिए। आपकी टिप्पणी से ऐसी ध्वनि निकल रही है, जैसे राहुल का बयान BJP ने लिख कर अपने स्टार प्रचारक को दिया है। विचार करें, उत्तर की अपेक्षा है।

      • शैली जी दरअसल राहुल गांधी की देश और विदेश में दी गयी कुछ टिप्पणियां भारत की छवि को धूमिल करती हैं।

  2. बेवकूफी से भरा बयान जब कोई सांसद भारत की संसद में देता हो तो उत्तर देना आवश्यक हो जाता है वरना मूर्खता को सत्य मान लिया जाता है।
    अकाट्य तर्क हैं आपके संपादकीय में, तेजेंद्र जी बधाई हो !

  3. सम्पादकीय में भारत की अखंडता और एक जुटता पर गहन चिंतन है।जो दल इस बात का दावा करता रहा है कि राष्ट्र के निर्माण में उसी का योगदान सर्वाधिक था,उसी दल का मुखिया देश के टुकड़े करने के विचार रख रहा है गलत तरीके से संविधान को परिभाषित करना देशद्रोह है।सम्पादकीय में संविधान, मौलिक अधिकार और नीतिगत तत्वों पर ध्यानाकर्षण हेतु साधुवाद
    Dr prabha mishra

  4. हाल ही में हुए घटनाक्रम पर विचारणीय संपादकीय। ये बात वाकई विचार योग्य है कि आख़िर अखंड राष्ट्र की अवधारणा किस मानसिकता के तहत की गई है क्या वास्तव में ये कॉंग्रेस के युवराज की सोच है या एक सोची समझी नीति के उनके मुख से कहलवाया गया है। आप ने सही कहा कि उनका ये वक्तव्य आजादी के बाद की सभी सरकारों (जो अधिकतर कॉंग्रेस की ही रही हैं) के इस संदर्भ में किये गए निर्णय पर भी प्रश्न उठाता है और राहुल गांधी की अल्प बुद्धि की सोच पर भी।
    सुंदर और सटीक सामायिक संपादकीय के लिए हार्दिक सादुवाद आद: भाई जी।

  5. You have touched a hot brick here.
    It has been a talking point on many channels too with eminent journalists,some calling Rahul Gandhi’s statements made in the Parliament as highly objectionable and others saying these statements need not be wholly ignored.
    Deepak Sharma

  6. सही कहा , तजिंदर जी । राष्ट्र की अखंडता से खेलने का अधिकार किसी को नहीं है ।—– नीलम सेठी ।

  7. गम्भीर विषय को गम्भीरता से प्रस्तुत करने के लिए आभार, संपादकीय प्रशंसनीय है।

  8. गांधी परिवार के चश्मोचिराग के गैर जिम्मेदाराना और तर्क हीन बयानों की वजह से ही आज कांग्रेस को वैशाखियों की आवश्यकता पड़ रही है। कुछ व्यक्तिगत कारणों से आज लोग तर्क दे रहे हैं कि मोदी जी के अलावा हमारे पास ऑप्शन नहीं है। ऑप्शन क्यों नहीं है।इस बात को भी हमें गहराई से समझना होगा बाकी समझने वाले समझ गए जो ना समझे वो अनाड़ी है।

  9. तजेंद्र जी संपादकीय के माध्यम से राहुल गांधी की बचकाना हरकत के बारे में बताया है वह बिल्कुल सही है राहुल गांधी को कुछ भी पता नहीं चलता वह कभी भी कुछ भी बोल देते हैं उनको यह पता नहीं लगता कि वह क्या बोल रहे हैं। जिस इंसान को यह पता नहीं हो कि मैं अपने राष्ट्र के खिलाफ बोल रहा हूं वह इंसान ही नहीं है।

  10. क्षोभजनक टिप्पणी । विघटनकारी सोच । विस्फोटक हो सकती है। पूर्व निर्धारित योजना तो नहीं यह खतरे की घंटी? यहाँ तो पूरी दाल ही काली नज़र आ रही है । अक्षम्य अपराध है भारत की अखंडता को चुनौती देने का दुस्साहस ।

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