कितनी भी घृणा हो प्रेम बचा रहेगा – कुमार विश्वास
प्रेम की कविता लिखना और प्रेम करना स्त्रियाँ ही जानती हैं – पंकज सुबीर
दिल्ली। मंगलवार को शहर के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र का समवेत सभागार खचाखच भरा हुआ था। सभागार में शिवना प्रकाशन से प्रकाशित कवयित्री स्नेह पीयूष के प्रथम कविता संग्रह ‘इतना तुम मय होकर’ का विमोचन तथा पुस्तक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन शाम 7.30 बजे किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुविख्यात लेखिका ममता कालिया ने की, तो वहीं बतौर मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध कवि तथा विचारक डॉ. कुमार विश्वास मौजूद रहे।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता साहित्यकार पंकज सुबीर रहे। कार्यक्रम का गरिमामय संचालन देश के जाने-माने मंच संचालक शशिकांत यादव ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई। इसके बाद मंचासीन अतिथियों का स्वागत लेखिका स्नेह पीयूष और उनके पति प्रत्यक्ष कर विभाग के ओएसडी पीयूष सोनकर ने पौधा तथा शॉल भेंट कर किया।
कार्यक्रम में सबसे पहले बोलते हुए लेखिका स्नेह पीयूष ने इन कविताओं के बारे में बताया कि किस तरह ये कविताएँ उनके मन में उपजीं और इसके बाद किस तरह उन्हें लिखा और फिर प्रकाशन के बाद उनके हाथ में किताब आने तक की पूरी प्रक्रिया को बताया। इसके बाद शिवना प्रकाशन के संचालक शहरयार खान ने अतिथियों के हाथों किताब का विमोचन करवाया।

विमोचन के बाद मुख्य वक्ता पंकज सुबीर ने कहा कि इसमें प्रेम की कविताएँ हैं। जिनको पढ़कर लगता है कि प्रेम पर लिखना और प्रेम करना स्त्रियाँ ही जानती हैं। पुरुष प्रेम करना नहीं जानता। यह प्रेम और समर्पण की कविताएँ हैं। वहीं मुख्य अतिथि डॉ. कुमार विश्वास ने किताब में प्रकाशित कविताओं पर लंबी चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस कविता संग्रह की कविताएँ प्रेम की बात करती हैं। जिससे लगता है कि घृणा कितनी भी बढ़े, पर प्रेम बचा रहेगा। यह एक स्त्री की कविताएँ हैं इसलिए इनका छप कर सामने आना बहुत ज़रूरी था।


