भोपाल : वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार एवं समीक्षक (प्रोफेसर) डॉं. क्षमा पाण्डेय रचित काव्य संग्रह “मर्यादा कानूनों की” का ऑनलाइन लोकार्पण समारोह  मध्यप्रदेश हिन्दी भवन संस्था द्वारा दिनांक 05 नवम्बर 2020 को गूगल मीट पर आयोजित किया गया। 
इस ऑनलाइन लोकार्पण कार्यक्रम में ब्रिटेन से डा. वंदना शर्मा ने काव्य संग्रह पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पुस्तक बहुआयामी है तथा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विषयों का सुन्दर समन्वय है। निश्चय ही यह काव्य संग्रह साहित्य जगत में स्वागत योग्य है।

डॉं. क्षमा पाण्डेय द्वारा रचित काव्य संग्रह "मर्यादा कानूनों की" का ऑनलाइन लोकार्पण 3

मुम्बई से आमंत्रित वरिष्ठ गीत एवं ग़ज़लकार देवमणि पाण्डेय  ने विवेचना करते हुए कहा कि पुस्तक घर-घर जानी चाहिए। पुस्तक अपने आप में संपूर्ण है।
भोपाल की वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती संतोष श्रीवास्तव ने रचनाकार डॉ. क्षमा पाण्डेय को “मौलिक सृजन की पैरोकार” ठहराया।
ब्रिटेन की प्रतिष्ठित साहित्यकार श्रीमती उषा राजे सक्सेना ने काव्य-संग्रह को मानव जाति के उत्थान का केन्द्र कहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नई-दिल्ली के प्रतिष्ठित व्यंग्यकार हरीश नवल जी ने काव्य रचना को सत्यं शिवम् सुंदरम् की जय बताया। 
समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री रमेशचंद्र शाह ने कथ्य व रागात्मकता से समृद्ध कृति की महत्ता प्रतिपादित की। उन्होंने कहा कि विषयों का चयन अद्वतीय व चुनौतीपूर्ण है। अपने आशीर्वचन स्वरूप वक्तव्य में कहा कि ओजपूर्ण राष्ट्रीय विषयों से ओतप्रोत काव्य संग्रह उनके पूर्वजों से प्राप्त प्रेरणा तथा सद्संस्कारों का परिचायक है ।
लोकार्पण समारोह के स्वागत भाषण में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति (हिंदी भवन) के मंत्री संचालक तथा वरिष्ठ हिंदी सेवी, पत्रकार श्री कैलाश चंद्र पंत जी ने देश विदेश से उपस्थित सभी अतिथियों का अभिनंदन किया तथा रचनाकार क्षमा पांडेय का पुष्पगुच्छ से स्वागत कर आशीर्वाद प्रदान किया। 
समारोह का संचालन राष्ट्रीय साहित्यिक पत्रिका अक्षरा की संपादक जया केतकी ने कुशलतापूर्वक किया।
समारोह की आयोजक संस्था हिंदी भवन के निदेशक व प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ जवाहर करनावट जी ने सभी राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। 
कार्यक्रम के दौरान डॉ. क्षमा पांडेय ने अपनी चुनिंदा काव्य रचनाओं का पाठ भी किया।

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