होमग़ज़ल एवं गीतमयंक राजेश की ग़ज़ल ग़ज़ल एवं गीत मयंक राजेश की ग़ज़ल By मयंक राजेश November 8, 2020 0 151 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp करुँ क्या बात, क्या बोलूँ, किसी से मेरा दिल भर गया है दिल्लगी से ज़माना ये बता दे आज मुझको सभी क्यूँ हो गए हैं मतलबी से ज़रुरत से जो रिश्ते है बनाता नहीं मिलना है ऐसे आदमी से पिघल जाएगा पत्थर दिल तुम्हारा ज़रा गुज़रो मुहब्बत की गली से यूँ मिलते रोज़ हैं तुमसे मगर तुम अभी तक लग रहे हो अजनबी से अँधेरे में सुकूं मिलने लगा है लगे है डर हमें अब रौशनी से बचाकर मौत मुझको ले गई जब मेरा दम घुट रहा था ज़िन्दगी से Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखरिम्मी सिंह की कहानी – पगलीअगला लेखसुमन शर्मा की कविता – शरद ऋतु मयंक राजेशसंपर्क - [email protected] RELATED ARTICLES ग़ज़ल एवं गीत सुरेश कुमार ‘सौरभ’ अकवि की ग़ज़ल January 24, 2026 ग़ज़ल एवं गीत अमरेंद्र कुमार की ग़ज़लें December 13, 2025 ग़ज़ल एवं गीत सरस दरबारी का गीत October 5, 2025 कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 अपनी बात…… April 6, 2018 पुस्तक समीक्षा – डॉ अरुणा अजितसरिया एम बी ई April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest रितेश ऽ निगम की कविता – यादों के तार February 8, 2026 कमलेश कुमार दीवान की नज़्म – ओ दस्तगीर February 8, 2026 दिलीप कुमार का व्यंग्य – माफी की दुकान February 8, 2026 डॉ मुकेश असीमित का व्यंग्य – हुक्का-वार्ता February 8, 2026 और अधिक लोड करें