करुँ क्या बात, क्या बोलूँ, किसी से
मेरा दिल भर गया है दिल्लगी से
ज़माना ये बता दे आज मुझको
सभी क्यूँ हो गए हैं  मतलबी से
ज़रुरत से जो रिश्ते है बनाता
नहीं मिलना है ऐसे आदमी से
पिघल जाएगा पत्थर दिल तुम्हारा
ज़रा गुज़रो मुहब्बत की गली से
यूँ मिलते रोज़ हैं तुमसे मगर तुम
अभी तक लग रहे हो अजनबी से
अँधेरे में सुकूं मिलने लगा है
लगे है डर हमें अब रौशनी से
बचाकर मौत मुझको ले गई जब
मेरा दम घुट रहा था ज़िन्दगी से

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