Sunday, May 31, 2026
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अर्पणा शर्मा ‘स्वधा’ की कविता – अमर शहीद

हे शहीद ,
शत- शत नमन,
तुम्हारे
शौर्य और बलिदान को,
हो गए न्यौछावर ,
रखने देश की,
आन-बान-शान को,
आतंकियों का आक्रमण,
देशद्रोहियों का सम्मिलन,
करता रहा छलनी,
भारत माता के सम्मान को,
तुम डटे रहे वहाँ,
अचल – अडिग,
आंच ना आये
हिन्दुस्तान को,
हे शहीद ,
शत- शत नमन,
तुम्हारे
शौर्य और बलिदान को…
माता-पिता की बूढी आँखें,
तकती सूने आँगन को,
नन्हे-मुन्हे तरसते,
पिता के आलिंगन को,
अर्धांगिनी कराहती,
अपनी सूनी मांग को,
तुम चल दिए सुदूर,
देश भक्ति के
अभियान को,
हे शहीद ,
शत- शत नमन,
तुम्हारे
शौर्य और बलिदान को…
हे वीर,
तुम्हारे रक्त की आहूति,
कभी व्यर्थ न जायेगी,
एक-एक बूँद इसकी,
सहस्त्रों शूरवीर उपजायेगी,
रहोगे अमर सदा,
भारत माँ के आँचल में,
युगों-युगों तुम्हारी,
वीर-गाथा गाई जाएगी,
हे असीमित गर्व तुम पर,
सारे देश की आवाम को,
द्विगुणित कर गए तुम,
देश के स्वाभिमान को,
हे शहीद ,
शत- शत नमन,
तुम्हारे
शौर्य और बलिदान को,
हो गए न्यौछावर ,
देश की,
आन-बान-शान को…
अर्पणा शर्मा
अर्पणा शर्मा
अधिकारी, सूचना प्रौद्योगिकी, देना बैंक, भोपाल. संपर्क - [email protected]
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