Thursday, May 21, 2026
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आशीष मिश्रा की कविता – नया साल आने को है

नया साल आने को है और पुराना जाने को
हम एक राह के राही, कुछ पल यहाँ बिताने को
देकर खूब शिकायत शिकवे
लौट रहा है सिकुड़ा-सा
पूरे बारह नग बिखरे
समेट रहा हूँ टुकड़ा-सा।
कुछ नग में, नग़मे काफ़ी
बाकी में सपनों की झाँकी
खेला है हमने महीनों से
कुछ चमके, कुछ में स्याही

लाखों पल बेकार गये, था काफ़ी एक सिखाने को
हम एक राह के राही, कुछ पल यहाँ बिताने को

कैलेंडर के पन्ने-पन्ने
लिपटे हैं लमहें-लमहें
कुछ तारीख़ें याद रहेंगी
कुछ की यादों में अपने
पहली से तीस की गिनती
कई-कई बार करी होगी
लेकिन सबकी बात अलग
परिणामों में निश्चित होगी

कहाँ ठहर पाती तारीखें, स्वयं को फिर दोहराने को
हम एक राह के राही, कुछ पल यहाँ बिताने को

जीवन की है सीख बड़ी
जो बीत गया सो बीत गया
चाहे हारा या विफल रहा
अनुभव लेकर जीत गया
नया समय उम्मीद भरा
पर जीतोगे, कठिनाई भला
कुछ और परिश्रम करना होगा
सच! मन के हारे कुछ ना होगा

फूलों की पंक्ति तैयार, स्वागत में गूँथ जाने को
हम एक राह के राही, कुछ पल यहाँ बिताने को

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1 टिप्पणी

  1. प्रिय आशीष जी नव वर्ष के आगमन पर बीते हुए पलों पर बचे हुए अंतिम समय पर एक बहुत सुंदर कविता आपकी
    नव वर्ष आने को है

    साल के बारह महीने 12 रतन के मानिंद उनके यादों के टुकड़े समेटे हुए यह कविता मैं आपने बहुत सुंदर झांकी दर्शाई है बीते दिनों की
    कुछ दिन मधुर नगमों के थे,कुछ तारीखें ऐसी जो याद रहेंगी हमेशा ,कुछ ऐसे पल जिनसे हमने कुछ सीख ली ,कुछ मिला कुछ खोया जिसे पाने के लिए हार नहीं मानना ,हे फिर से यथा कर्म परिश्रम से करना होगा
    नए साल के स्वागत में आगे बढ़ना होगा
    नव साल आने को हे
    हार्दिक बधाई

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