कश्मीर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग ने प्रतिष्ठत विदुषि, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा की कुलपति तथा साहित्य अकादमी, नई दिल्ली की उपाध्यक्ष प्रो. कुमुद शर्मा का एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया। यह व्याख्यान “आत्मबोध से विश्वबोध” (स्व-चेतना से वैश्विक चेतना तक) विषय पर था।
हमारी सांस्कृतिक उद्भावना में , हमारी चिंतन धारा में , हमारी दार्शनिक संवेदना में , आत्मबोध से वैश्विक बोध के जो सूत्र समाहित हैं उनके परिप्रेक्ष्य में डॉ कुमुद शर्मा ने अपनी बात रखी।
अपने व्याख्यान में प्रो. शर्मा ने साहित्य, आत्म-जागरूकता और वैश्विक चेतना के बीच संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि साहित्य व्यक्तियों को संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर व्यापक मानवीय दृष्टिकोण विकसित करने में सहायता करता है। विभाग की साहित्यिक पत्रिका ‘वितस्ता’ के नये अंक का लोकार्पण कार्यक्रम की एक प्रमुख उपलब्धि रही।

प्रो. कुमुद शर्मा ने कुलपति प्रो. नीलोफर ख़ान से भी भेंट की। प्रो. खान ने उनका स्वागत किया और साहित्य तथा शैक्षणिक जीवन में उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने विभाग द्वारा साहित्यिक और बौद्धिक संवाद को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की तथा आशा व्यक्त की कि ऐसे संवाद विभिन्न संस्थानों के बीच शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और मजबूत करेंगे।
इस कार्यक्रम में वरिष्ठ शिक्षाविदों, लेखकों, विद्वानों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में प्रो. ज़मान अज़ुर्दा, पूर्व विभागाध्यक्ष (उर्दू विभाग) एवं पूर्व डीन, स्कूल ऑफ आर्ट्स, लैंग्वेजेज़ एंड लिटरेचर्स; प्रो. शाद रमज़ान, पूर्व विभागाध्यक्ष (कश्मीरी विभाग); तथा डॉ मुक्ति शर्मा शामिल थीं। उपस्थित संकाय सदस्यों में प्रो. रुबी ज़ुत्शी, विभागाध्यक्ष (हिंदी विभाग); प्रो. ज़ाहिदा जबीन; डॉ. बी. के. पाठक; तथा डॉ. मुदासिर अहमद भट शामिल थे।

डॉ. मुक्ति शर्मा
कश्मीर
संपर्क – +91 97977 80901
