Sunday, September 20, 2026
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रूक्मणी राय की कविताएँ

युग परिवर्तन

युग परिवर्तन हो गया,
कुछ भी पता नहीं चला।
पूर्व युग में कपड़े कटे-फटे पहनने पर,
स्वयं को लज्जित महसूस होता था।
पर वर्तमान युग में कपड़े कटे-फटे पहनकर,
स्वयं को लोग गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
युग परिवर्तन…
त्रिलोचन के कपड़े कटे-फटे रहते थे,
तो वह दुःखी होकर उनको ही फैशन कहते थे।
किंतु आज के लोगों का कपड़ा कटे-फटे होने पर,
सुख का अनुभव करते हुए उसको ही फैशन कहते हैं ।
युग परिवर्तन…
हाय रे ! जीवन की कैसी विडम्बना
कि कुछ लोगों के कपड़े फटे होने पर सिल कर पहनते हैं,
और कुछ लोग शान से कपड़े कटे-फटे ही खरीदते हैं।
युग परिवर्तन हो गया कुछ भी पता नहीं चला।

 

मोबाइल अपने पास

टाइम पास,
मोबाइल अपने पास।
मोबाइल से लोग इतने घुल मिल गए है,
कि अपने परिजनों को ही भूल गए हैं।
वे अपने परिजनों का ख्याल ही नहीं रखते हैं,
लेकिन मोबाइल के परिजनों का पूरी तरह से ख्याल रखते हैं।
टाइम पास…
घर में लोग किस हालत में हैं पूछने का उन्हें अवकाश ही नहीं है,
लेकिन मोबाइल के परिजनों का वह हर हाल में उनका समाचार लेते हैं।
टाइम पास…
ये क्या है ? लगता है मनुष्यों की संवेदनाएं ही मनुष्यों के प्रति से खीझ रहा है,
लेकिन मोबाइल के प्रति रीझ रहा है।

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