होमHomeदिविक रमेश की कविताएँ Home दिविक रमेश की कविताएँ By Editor July 21, 2019 0 593 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp दिविक रमेश 1- सिवा तुम्हारे हथेलियों में कहां रह गई थीं लकीरें हथेलियां ही आ बसी थीं तुम्हारी । कुछ झुका –झुका– सा नहीं लगा था क्या आसमान और धरती कुछ उठी –उठी– सी ? मैंने गाया खुल-खुल कर गाया। अच्छा है न उसे कोई नहीं सुन पाया सिवा तुम्हारे। पेट में कुछ भी न पचाने वाली मेरी कविता भी नहीँ। 2- मैं मुआवजा हूं ‘मैं मुआवजा हूं’ उसने कहा तो लगा भला यह भी कोई परिचय हुआ! आपके पिता? आपकी माता? मैंने पूछा तो बोला- `तुम भी हो सकते हो। और रंडी की संतान से यह क्या पूछते हो?’ रंडी? मां को रंडी कहते हो क्या तौहीन नहीं औरत की? मैंने डांटा, डांटने के लहजे में। वह मुस्कुराया गैर मुस्कुराने की तरह। मैं चुप रहा देखता कनखियों से कुछ देर । `नेता चलेगा?’, वह बोला। नेता! यह तो बहुत ही उलझा हुआ भ्रामक शब्द है भाई! कौंनसा नेता किस दल का? ‘लगता है डर रहे हैं आप! चाहें तो निकल लें। वरना समझ लें दो ही तरह के होते हैं नेता- एक, जो दिलाते हैं और दूसरे जो देते हैं मुआवजा।‘ इस बार वह जोर से हंसा जैसे हंसा हो किसी बेवकूफ की मासूम जिज्ञासा पर। चलते-चलते मेरे गाल को छूआ, न छूने की तरह और कहा- मुआवजा हूं मैं समझो! इस युग का सबसे बड़ा रहस्य! न अफसोस हूं मैं न अपराध-बोध ही। न मैं काटा जा सकता हूं न मारा ही। न मुझे आग जला सकती है न जल ही डुबो सकता है। मैं मुआवजा हूं। कफन हूं मैं हर कुकृत्य की लाश का। अचूक सांत्वना हूं सर्वोच्च बड़े से बड़े आघात की। शक्ति हूं मैं काट हूं न्यायालयों के द्वार की। अक्षत हूं मैं अक्षत योनि की अवधारणा सा। इसे समझो! समझो इसे! मैं मुआवजा हूं। Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखसामयिक व्यंग्य स्वयं को राजमार्ग पर चलने का दंभ पाल रहा है – प्रेम जनमेजयअगला लेखसुपर 30 – फ़िल्म समीक्षा (तेजेन्द्र शर्मा) Editor RELATED ARTICLES Home इंदिरा बत्रा की कविता – आध्यात्मिक चश्मा January 10, 2026 Home मेरा मित्र (लघुकथा) – विश्व दीपक त्रिखा July 13, 2025 Home सूर्यकांत शर्मा की कविता – ऑपरेशन सिंदूरी May 17, 2025 कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 अपनी बात…… April 6, 2018 पुस्तक समीक्षा – डॉ अरुणा अजितसरिया एम बी ई April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest संपादकीय – बा…बा… ब्लैक शीप…! April 11, 2026 डॉ. जमुना कृष्णराज की पुस्तक ‘अव्वैयार की अमृतवाणी’ का लोकार्पण। April 5, 2026 पुस्तक-समीक्षा – मेरे भगत सिंह – डॉ. शिवजी श्रीवास्तव April 5, 2026 गणेश शंकर विद्यार्थी के द्विशताब्दी वर्ष एवं हिंदी पत्रकारिता के 200 साल के सफर पर सप्रे संग्रहालय में कार्यक्रम April 5, 2026 और अधिक लोड करें