गत 24 मई की शाम नई दिल्ली के एलटीजी सभागार के ब्लैक कैनवास में प्रासंगिक संस्था की रीवा और दिल्ली इकाई ने आलोक शुक्ला के लेखन और निर्देशन में नाटक ‘ख़्वाब’ और नाटक ‘उसके साथ’ का भावपूर्ण मंचन किया गया।
इस शाम की क़रीब एक घंटे की पहली प्रस्तुति ‘उसके साथ’ लेखक के सामने 1997 में मुंबई में घटी एक सत्य घटना पर आधारित रेप विक्टिम पर नाटक था, जहां मुंबई के एक व्यस्त गली के डिवाइडर पर एक औरत बच्चे को जन्म दे रही थी। इसी घटना को केंद्र में रख कर एक लड़की के पूरे जीवन को इस नाटक में दर्शाया गया था। इस नाटक की केंद्रीय भूमिका में कविता के मार्मिक अभिनय ने दर्शकों को बेहद प्रभावित किया, ऐसे ही इंस्पेक्टर, अजनबी, पति, बेटे, अटेंडेंट आदि विभिन्न भूमिकाओं को निभा रहे एडवोकेट टेकचंद राजपूत और लेखक की भूमिका में आलोक शुक्ला तथा डॉक्टर व शेल्टर होम संचालिका की भूमिका में विजय लक्ष्मी, साहब और चाचा की भूमिका में प्रताप सिंह, मंदार की भूमिका में विनय शर्मा और कांस्टेबल की भूमिका में अंजली माथुर तथा छोटी बच्ची की भूमिका में माही ने बेहतरीन काम किया।
नाटक का बेहतरीन संगीत अभ्युदय मिश्रा और आशीष मित्तल ने दिया, प्रकाश और मंच सज्जा थी टेकचन्द और सहायक की भूमिका निभाई विनय और निखिल कुमार ने जबकि ध्वनि सज्जा विनय शर्मा ने की थी। वस्त्र सज्जा में थीं विजय लक्ष्मी और नीतू शुक्ला ने भूमिका निभाई थी।
इसके बाद इस शाम की क़रीब एक घंटे की दूसरी प्रस्तुति नाटक ‘ख़्वाब’ थी जो बुजुर्गों की दशा पर आधारित मूलतः एक एकल नाटक था, जहां एक बुढ़ा आदमी अपने को भरा पूरा कहते हुए दर्शकों को ऐसा एहसास देता है कि वो पूरे परिवार के साथ बड़ी ख़ुशी से रह रहा है, लेकिन अंत में खुलता है कि वो एक वृद्धाश्रम में रह रहा है, जिसे उसके बच्चों ने घर से निकाल दिया है।
इस नाटक की केंद्रीय भूमिका को ख़ुद नाटक लेखक और निर्देशक आलोक शुक्ला ने बखूबी अंजाम दिया, तो अजनबी और वृद्धाश्रम के अटेंडेंट की भूमिका में एडवोकेट टेकचन्द राजपूत और पत्नी की आवाज़ में विजय लक्ष्मी जी तथा बहु की आवाज़ में कविता ने अपने काम को बेहतरीन तरीके से निभाया। नाटक का बेहतरीन संगीत संदीप मुखर्जी और नवनीत पांडेय ने दिया, प्रकाश और मंच सज्जा और ध्वनि संयोजन टेकचन्द का था। सहायक की भूमिका विनय और निखिल ने निभाई। दोनों ही नाटकों के नेपथ्य प्रमुख की भूमिका में थे प्रताप सिंह और सहयोगी थे मृदुल कुमार और सौरभ शक्ति।
नाटकों के कुछ दृश्य:-


दोनों ही नाटकों की प्रस्तुतियों को उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा। गौरतलब है कि इन दोनों ही नाटकों का ये दसवां मंचन था। इसके पूर्व इन नाटकों का रीवा, मुंबई, दिल्ली, नोएडा, सहारनपुर, गिरिडीह , अलवर, रुड़की, केरल और इंदौर में हो चुका है।
