कांग्रेस मुख्यालय में जैसे ही चिट्ठी आयी कुछ लोग गाने लगे ’-चिट्ठी आयी है आयी है, चिट्ठी आयी है। बड़े दिनों के बाद कांग्रेसियों की चिट्ठी आयी है।‘ यह सुनकर वहां बैठे कुछ कांग्रेसी पदधारी बौखला गये। उन्होंने मुख्यालय से बाहर निकलकर गीत गाने वाले कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को समझाया कि अगर चिट्ठी आ गयी है तो आने दो। तुम लोग चिट्ठी आने पर गीत क्यों गा रहे हो ?
तभी एक कार्यकर्ता ने कहा कि बहुत दिनों के बाद वतन के कांग्रेसियों की चिट्ठी कांग्रेस मुख्यालय में पहुंची है। पहले गांव में चिट्ठी आने से पूरा गांव यह जानने को उत्सुक हो जाता था कि आखिर अमुक व्यक्ति के घर पर किस तरह की चिट्ठी आयी है। चिट्ठी को पढ़ने के लिए गांव में पढ़े-लिखे लोगों की तलाश की जाती थी। लेकिन कांग्रेस मुख्यालय में तो पढ़े लिखे लोगों की कमी है नहीं।
मुख्यालय में बैठे लोगों ने तो चिट्ठी पढ़ ली होगी कि उसमें क्या लिखा है। इसलिए हम कार्यकर्ताओं को यह बताना चाहिए कि चिट्ठी में आखिर क्या बातें लिखी हैं। इस पर कांग्रेस के उक्त पदधारी ने कहा कि अंदर कांग्रेस की चिट्ठी चिंतन बैठक आनलाइन चल रही है। चिट्ठी पढ़ने के बाद सभी कांग्रेसियों को बता दिया जायेगा कि चिट्ठी में लिखा क्या है।
चिट्ठी चिंतन बैठक में चिट्ठी पढ़ने के बाद राहुल गांधी ने सीधे चिट्ठी लिखने वालों के माथे पर ठीकरा फोड़ा कि कुछ लोग भाजपा से मिले हुए हैं और वे भाजपा के एजेंट हैं। फिर क्या था चिट्ठी चिंतन बैठक भाजपा पर ठीकरा फोड़ो बैठक में तब्दील हो गयी। बांग्ला में कहावत है ’ सब दोष नंदो घोष।‘
फिर क्या था सभी कांग्रेसी देश की सभी समस्याओं के लिए भाजपा को दोषी ठहराने लगे। इसी बीच एक कांग्रेसी ने कहा कांग्रेस की सभी मुसीबतों की जड़ तो नरेंद्र मोदी हैं। यह आदमी न गुजरात से दिल्ली आया होता और न कांग्रेस की लुटिया डूबी होती। उसने आगे कहा कि कांग्रेस को उस व्यक्ति की तलाश करनी चाहिए जो मोदी को गुजरात से दिल्ली लेकर आया था। बैठक के बाद घोषणा हो गयी कि कांग्रेस में ’ बिन गांधी सब सून’।
अब सोनिया ही अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी। यह बात वैसे भी पूरे देश को मालूम है कि कांग्रेस गांधी परिवार के बगैर एक कदम आगे नहीं चल सकती है। मुख्यालय के बाहर चिट्ठी आयी है का गीत गाने वाले कांग्रेस कार्यकर्ता ढोल-नगाड़े बजाने लगे। इसके बाद गाना शुरू हो गया ’आयी-आयी अब तो आ जा।‘
इसी बीच एक विरोधी दल के नेता फेसबुक पर लिखा कि कांग्रेस ’आई’ और ’माई’ के सहारे ही चलती है। यह हर कोई जानता है। एक बार कांग्रेस टूटी थी तो कांग्रेस ’आई’ हो गयी थी। तब इंदिरा गांधी कांग्रेस अध्यक्ष थी। अब कांग्रेस ’आई’ नहीं रही तो कांग्रेस ’माई’ के सहारे चल रही है।
एक समय था जब कांग्रेस का चुनाव चिन्ह भी गाय और बछड़ा हुआ करता था। तब इंदिरा गांधी के साथ संजय गांधी हुआ करते थे। मेरा मानना है कि अगर कांग्रेस में शिव का धनुष तोड़ो प्रतियागिेता हो तो धनुष भी गांधी परिवार ही तोड़ेगा, बाकि कांग्रेसियों को सिर्फ धनुष के दर्शन होंगे।

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