Friday, June 21, 2024
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डॉ. सुनीता श्रीवास्तव की लघुकथा – ‘क्या वह दोषी है?’

“अब जाकर घर आ रही हैं…!! तुम्हारे कारण माॅं चल बसी, एक भी फोन नहीं उठाया तुमने?”- उत्तम (राशि का पति) भरी भीड़ में सबके सामने राशि पर भड़क उठा! 
राशि अस्पताल की चिकित्सक हैं, पति का ग़ुस्सा और सासु माॅं के मृत्यु के समाचार सुनकर राशि अवाक रह गई… इस वक्त कुछ न बोलना ही उचित समझते हुए, वो चुपचाप अंदर चली गई। अंदर का सारा दृश्य देखकर वो और भी स्तब्ध रह गई! 
उसके मायके वाले भी आ चुके थे, और उसे कुछ खबर ही नहीं? जब अंदर जा कर अपना फोन निकाला तो देखा उसमें अंगिनत मिसकॉल थे। कॉल देखकर उसे पछतावा तो हो रहा था… 
पर रात को अचानक यातायात दुर्घटना के कारण आपातकालीन केस आने से रात भर नींद त्याग कर घायलों के उपचार करने के बाद, थक कर वो सुबह 5 बजे घर को रवाना हुई।
अस्पताल में ही मोबाइल की बैट्री खत्म होने से, वह फोन नहीं उठा पाई।
और यह सारा सिलसिला राशि ने अपनी बहन को बताते हुए पूछा- “उत्तम ने माँ की मृत्यु का दोषी मुझे क्यों ठहराया?” 
वह बोली- “डॉक्टर ने बताया कि माँ को रात में दवाई नहीं मिली जिससे उनकी मृत्यु हो गई। जब सभी ने पूछा कि दवाई क्यों नहीं दी गई? तो उत्तम ने कहा- “यह राशि का काम था, पर वह तो रात भर अपने डॉक्टर सहकर्मियों के साथ गपशप कर रहीं होगी?”
अपनी बहन की यह बात सुन राशि की आँखें अश्रुओं से नम हो चुकी थीं, मन ही मन दुख और पीड़ा से सोचने लगी- “माँ की देखभाल पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी, लेकिन उत्तम ने तो यह जिम्मेदारी केवल मुझ पर डाल दी… कितना कायर है उत्तम? उसे क्या पता मैं अभी कितने यात्रियों की जान बचाकर आई हूं…!”
डॉ सुनीता, वर्तमान में शुभ संकल्प समूह की निर्देशिका, संस्थापक और संपादक हैं। पूर्ववृति, स्वदेश, नव भारत टाइम्स, संझा लोकस्वामी, चौथा संसार, जैसे समाचार पत्रों में ब्यूरो इन चीफ और डिस्ट्रिक्ट एडिटर इन चीफ के पद से कुल 18 साल के अनुभव के साथ पत्रकारिता का कार्यभार संभाला। सैंट पॉल और सैंट पैट्रिक्स स्कूल में बायोलॉजी, अप्लाइड केमिस्ट्री और हिंदी साहित्य का अध्ययन 11वी और 12वी कक्षा को कराया, शिक्षा के क्षेत्र में कुल 8 साल का अनुभव।
प्रकाशन: कई पुस्तके प्रकाशित हुई हैं, जिसमे प्रमुख: “चिन्मय”, “बस्ती का दर्द”, “यथार्थ चित्रण”, “यथार्थ पीड़ा”, “उड़ान”, “शुभ संकल्प”, “चाह”, “सत्यमेव-जयते”, “दर्द” व “कसौट” हैं।
सम्मान और पुरस्कार: इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल में हिन्दी साहित्य में योगदान हेतु विशेष सम्मान। केंद्र केबिनेट मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा नेशनल आइकन अवार्ड से सम्मानित। और भी अनेक सम्मानों से सम्मानित।





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4 टिप्पणी

  1. बहुत ही अच्छी लघुकथा,एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करती रचना।बहुत बहुत साधुवाद ,,,एक सशक्त प्रस्तुति के लिए

  2. सुनीता श्रीवास्तव जी! आपकी लघुकथा “क्या वह दोषी है?”पढ़ी।
    अगर घर में कोई रोगी है, तो घर के हर सदस्य का दायित्व होता है कि जो भी घर में उपस्थित हो,दवा देने के संबन्ध में सभी लोग बराबरी से ध्यान दें।
    डॉक्टर की बहुत सी व्यस्तताएँ होती हैं इन्हें घर के लोगों को समझना चाहिये।
    एक सकारात्मक संदेश देती अच्छी लघुकथा। सुनीता जी आपको बहुत-बहुत बधाइयाँ

  3. बहुत ही सहज और सार्थक लघुकथा है।अक्सर यह बीते ज़माने की मानसिकता है कि पुरुष काम पर है तो व्यस्त और स्त्री तो है तो गप्पबाज़ी। इतनी अच्छा लघुकथा के लिए बधाई तो बनती है।

  4. आदरणीय सूर्यकांत जी, नीलिमा जी, रेनू जी व सभी सम्माननीय पाठको का ह्रदय तल आभार

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