(1) – पेनड्राइव
वह कमाऊ ऑफिस में नया-नया आया था और बात-बात पर सच्चाई, ईमानदारी और कर्तव्य पालन की बातें करता था। वह न खुद खाता था, न किसी कर्मचारी को खाने देता था। उसकी इस गुस्ताखी के कारण ऑफिस के कर्मचारी उससे त्रस्त आ चुके थे क्योंकि उसकी वजह से उनकी ऊपरी कमाई नहीं हो पा रही थी। वे लोग आपस में बात करते हुए कहते थे कि न जाने वह कैसा प्राणी है, जो बहकी-बहकी सी बातें करता है। लगता है उसकी मेमोरी में कोई ‘वाइरस’ आ गया है, जिससे उसका ‘डाटा करप्ट’ हो गया है। उसके वाइरस को बेइमानी के एण्टीवाइरस से ‘स्कैन’ (समझाना) करना होगा, न माने तो उसे ’फाॅरमेट’ (पत्ता साफ) करना होगा।
 आज वह इस धरती से फाॅरमेट होकर अपने वाइरस समेत न जाने कहाँ किस लोक में जा रहा है? वह ’पेनड्राइव’ (पेन = दर्द, ड्राइव = लेकर चलने वाला) जो ठहरा!
(2) – इंसानियत
रात 8 बजे का समय, दोनों ओर से हर-हर महादेव और अल्लाहू अकबर का शोर जारी था। अयोध्या में 06 दिसंबर,1992 के बाद से यह मोहल्ला मानों जलता हुआ आग का ढेर बन गया था। चारों तरफ धुँआ ही धुँआ, जलते हुए मकान और सुनसान सड़कें। ऐसे में मैं भी अपने घर की छत पर अद्धे बटोरे, लाठी डण्डे लिए रात की कुड़कुड़ाती सरदी में किसी खतरे की आशंका से चुपचाप एक कोने में बैठा पहरा दे रहा था और प्रभु श्रीराम से प्राण रक्षा की प्रार्थना कर रहा था। बोतल बम व ढेले आस-पास आ-आकर गिर रहे थे, जिनमें यह जानना मुश्किल था कि कौन सा बम या ढेला हिन्दू है या कौन सा मुसलमान ?
इतने में नीचे सड़क से किसी बच्चे के रोने की आवाज़ सुनाई दी। मैंने नीचे सड़क पर झांककर देखने की बमुश्किल हिम्मत जुटाई। देखा, नीचे कल्लू मियाँ की इकलौती छह वर्षीया बेटी टाॅफी की जिद करते हुए माँ का हाथ छुड़ाकर सड़क पर भाग आई थी और जगह-जगह बम और ढेले गिरते देखकर सहम गई थी और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी थी। उसे देखकर मेरे मन में कोई बच्चा न होने की कसक और तेज़ हो उठी थी और मैं उसे बचाने के लिए तेज़ी से जीने से नीचे उतरने लगा था।

प्रो. पुनीत बिसारिया

संपर्क – puneetbisaria8@gmail.com

6 टिप्पणी

  1. समाज को उद्वेलित करती लघुकथायें ।बिसारिया जी को बधाई ,शुभकामनायें ।

  2. दोनो अपने आप में अद्वितीय व अग्रेजी को हिन्दी के भावों पर तौलने से पाठक को रुचिकर जानकारी भी प्रदान करती दिख रहीं हैं।शुभकामनायें

  3. बहुत बेहतर ढ़ंग से लिखी व सुसज्जित की है।आगे की असीम ऊँचाइयाँ कल आपके कदमों पर हों इसी आकांक्षा के साथ शुभकामनायें

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