सुबह नौ बजे थे कि राजकोट से नेहा के पति राकेश का फोन आ गया,
“… हाँ राकेश बोलो, क्या खबर है राजकोट की…”
“ बस जो न्यूज़ देखती हो, वही खबर है और क्या है ?
“ पता नहीं बाबा कब ये लॉक डाउन खुले, और तुम अहमदाबाद आओ…”
 “अच्छा अपना और जूही का ख्याल रखना, शाम को बात करूंगा…”
फोन रखकर नेहा ने अपनी बेटी को आवाज़ लगाई “जूही कहाँ हो, इधर आओ”
जूही की आवाज ही नहीं आ रही थी । “जूही कहाँ छिपी हो, जल्दी बाहर आओ मैंने सोफा के नीचे, कवर्ड के पास किचिन मे सब जगह देखा, जूही कहीं है ही नहीं । घर के बाहर गार्डेन में भी कहीं । अब तो नेहा को घबराहट होने लगी । उसकी तीन साल की फूल सी बच्ची जूही कहीं दिखाई ही नहीं दे रही थी । इधर-उधर नजर दौड़ाई, पास वाली कोठी में मेहरा दंपत्ति गुनगुनी धूप में चाय का मजा ले रहे थे । वे नेहा के अच्छे पड़ोसी हैं । श्रीमती मेहरा की नजर नेहा पर पड़ी और बोली, क्या हाल है नेहा…?” नेहा ने मिसेस मेहरा को बाउंड्री के पास बुलाया और कहा, “जूही कहीं दिखाई दे रही, मेहरा साहब को बोलो, जरा आस-पास देख लें । वे तपाक से बोली, “नेहा क्या आपको पता नहीं है, घर से बाहर निकलना मना है, मि.मेहरा कैसे बाहर जा सकते हैं” ?  जबकि वह देखती है, वे दोनों दूध लेने, सब्जी लेने, सिगरेट लेने, 2-3 बार घर से बाहर जाते हैं ।
दूसरी तरफ वाले घर पर नजर गई, श्रीमती पटेल बड़े गुस्से में फटकार-फटकार कर कपड़े सुखा रही थीं। नेहा ने बडी उम्मीद से उनकी तरफ देखा और कहा, “पटेल बेन, मेरे बेटी जूही कहीं दिख नहीं रही है, जरा भावेश को बोलो न आस-पास देखकर आए…।”
“नेहा बेन जरा सोच समझ कर बोलो, केरोना में क्या कोई बाहर जाता है ?” जबकि पूरे दिन उनका बेटा स्कूटर लेकर घूमता रहता है । सड़क पर नजर डाली, लोकडाउन में पुलिस वालों का हुजूम लगा हुआ था, उनसे बात करू क्या ?
अचानक सामने से पार्वती, हमारी काम वाली आती दिखाई दी । अरे ये तो वही है, जिसे सब अछूत कहते हैं ।
नेहा ने उसे अपने पास बुलाया, और पूछ “कहाँ जा रही है, भाग भाग कर…”, मैं अपने मर्द को पीने का ठंडा पानी देने जा रही हूँ, उसने नुक्कड़ पर सब्जी का ठेला लगाया है । नेहा ने घबराहट में उससे कहा “जूही कहीं नहीं दिख रही, क्या करूँ? । “ …अरे देवा, हे काय झाला, थंबा, घाबरू नका, मैं काही तरी करते …” वह सीधी पुलिस वाले के पास गई, और ठंडे पानी की बोतल उसको दे दी, फिर पता नहीं उससे क्या बात की और वहाँ से चली गई । थोड़ी ही देर में देखा, पार्वती जूही को गोद में लिए चली आ रही है । जैसी ही वह पास आई, नेहा ने जूही को झट से अपनी गोद में लिया और पूछा “कहाँ थी ये” । “7 नंबर वाली कोठी में, उनकी बेटी के साथ झूला झूल रही थी । वे लोग तो मेरे पहचान वाले हैं, मैंने आवाज देकर उनको बुलाया, वे कहने लगे “हमें ही नहीं पता, ये कब हमारे घर में आ गई, गिलहरी के जैसी, माफ करना, मैं अछूत हूँ और तुम्हारी बिटिया को हाथ लगाया है”। नेहा को तो पार्वती के अंदर 9 देवियाँ दिखाई दे रही थी । क्या कहूँ क्या न कहूँ, दिमाग ने तो काम करना ही बंद कर दिया था । अचानक  पार्वती बोली, “बहिन जी इस बोतल में ठंडा पानी भरकर दे दो, मेरे मर्द को फ्रीज का एकदम ठंडा पानी ही भाता है” । मैं जैसे होश में आई और बोली, “हाँ हाँ लेकर आती हूँ” पार्वती पानी की बोटेल लेकर, बड़े-बड़े कदम भरती हुई वहाँ से चली गई, जैसे कुछ हुआ ही नहीं हुआ है । आस-पास के दोनों मकान “लोक डाउन”  की वजह से बंद थे, वहाँ कोई हल-चल ही नहीं थी ।

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