Tuesday, November 3, 2026
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सोलह श्रृंगार की वैज्ञानिकता

भारतीय संस्कृति में सोलह की संख्या का विशेष महत्त्व है।सोलह की संख्या को पूर्ण,दिव्य और समग्र माना गया है, क्योंकि हमारी संस्कृति में जन्म से मृत्यु तक सोलह संस्कार होते है,सोलह ही श्रृंगार होते हैं । यहाॅं पर सौभाग्यशाली महिलाओं के विशेष पर्व करवा चौथ के विषय में बताने का प्रयास किया गया है।इस त्यौहार पर महिलाएं अपने पति की दीर्घायु की कामना से व्रत करती हैं और सोलह प्रकार से श्रृंगार करती हैं।दिनभर भूखी-प्यासी रहकर रात होने पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने व्रत का पारण करती हैं। प्रस्तुत लेख में उन्हीं सोलह श्रृंगार की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डालने का प्रयास कर रही हूॅं।

1- बिंदी-बिंदी मस्तक के बीचों-बीच लगाई जाती है। यहाॅं आज्ञा चक्र होता है,जिसे भगवान शिव का तृतीय नेत्र माना जाता है।आज्ञा चक्र पर बिंदी लगाने से महिलाओं में ऊर्जा की वृद्धि होती है।उनकी दूरदर्शिता में अभिवृद्धि होती है।

2- सिंदूर-विवाह में फेरों के समय ही वर वधू की मांग में सिंदूर लगाता है। सिंदूर का स्वभाव ठंडा होता है। सिंदूर लगाने से महिलाओं का सहस्चरार चक्र संतुलित रहता है।यह चक्र मस्तिष्क के बीचों-बीच होता है। सिंदूर लगाने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है। स्वभाव में संतुलन बना रहता है।

3-गजरा-विवाहित महिलाएं अपने जूड़ा या चोटी में फूलों का गजरा लगाती हैं।गजरा बालों का सौंदर्य तो बढ़ाता ही है, साथ ही फूलों की सुगंध वातावरण को महका देती है। सुगंधित वातावरण महिला के व्यक्तित्व को निखार देता है।

4-टीका- टीका सिर पर मस्तिष्क पर मांग बीचोंबीच पहना है, जो महिलाओं की सुंदरता में चारचाॅंद लगा देता है।टीका पहनने से महिलाओं की सुंदरता तो बढ़ती ही है,शरीर का तापमान भी नियंत्रित रहता है,जो महिलाओं की निर्णय क्षमता को प्रखर करता है।

5-नथ-हिंदू धर्म में किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में विवाहित महिलाएं नथ अवश्य पहनती हैं।नाक में नथ के घर्षण से उठने वाली तरंगें मानसिक संतुलन बनाए रखती हैं।नथ महिलाओं की नाक के बाईं तरफ पहनी जाती है, जिसके घर्षण से उत्पन्न तरंगें उनके गर्भाशय तक जाती हैं जो महिलाओं के मासिक धर्म का समय  नियंत्रित रखती हैं। उनके जीवन में उल्लास जगाती हैं।

6-काजल-काजल लगाने से ऑंखों के सौंदर्य में वृद्धि होती है। वैज्ञानिक आधार पर भी ऑंखों में काजल लगाने से सूरज की हानिकारक किरणों और धूल-मिट्टी के कणों से बचाव होता है। चेतना का विकास होता है।

7-झुमका-यह कान में पहना जाने वाला आभूषण होता है।कुछ लोग इसे कर्णफूल भी कहते हैं आजकल आधुनिक भाषा में ईयर रिंग भी कहते हैं। भारतीय संस्कृति में तो कर्णवेधन संस्कार होता है।

8-मेंहदी- महिलाओं को अपने हाथों में मेहंदी लगाना बहुत अच्छा लगता है। मेंहदी लगे हाथ सुंदर लगते हैं। मेहंदी की तासीर ठंडी होती है।कुछ महिलाएं तो पैरों में भी मेहंदी लगाती है। ठंडी तासीर के कारण महिलाओं की ऊर्जा संतुलित रहती है।

9-मंगलसूत्र या हार-गले में पहना जाने वाला गहना मंगलसूत्र या हार कहलाता है।इससे गर्दन की सुंदरता बढ़ती है। सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। वैज्ञानिक आधार पर यह कहा जा सकता है कि मंगलसूत्र या हार पहनने से मन प्रसन्न होता है। शारीरिक ऊर्जा का क्षरण नहीं होने पाता।

10-बाजूबंद-नाम से ही स्पष्ट हो रहा है कि यह कड़े जैसा गहना बाॅंह में पहना जाता है। आजकल तो बाजूबंद भिन्न -भिन्न आकार के मिलते हैं। बाजूबंद बांह पर दवाब डालता है जिससे रक्त का  संचार अच्छी तरह से होता है।

11-कंगन या चूड़ियाॅं-सामान्यत: चूड़ियाॅं कांच या लाख से बनाई जाती हैं। कहीं -कहीं तो हाथीदाॅंत की चूड़ियाॅं पहनी जाती हैं। चूड़ियों की खनक से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।कलाइयों पर चूड़ियों की रगड़ पड़ने से उत्पन्न खनक से रक्त का संचार सुचारू रूप से होता है।

12-आरसी-दाएं हाथ के अंगूठे में पहनी जाने वाली अंगूठी को आरसी कहते हैं। इसमें शीशा(आइना) जड़ा होता है। पुराने समय में रानियाॅं इस शीशे का प्रयोग श्रृंगार कराते समय अपनी छवि देखने के लिए करती थीं।

13-अंगूठी- अंगूठी ऐसा गहना है जिसे पति-पत्नी के आपसी विश्वास का प्रतीक माना जाता है। अंगूठी पहनने से महिलाओं हाथों की सुंदरता बढ़ती है। अनामिका अंगुली की नसों पर दवाब पड़ता है।शरीर में  जल तत्त्व संतुलित रहता है मस्तिष्क शांत रहता है।

14-करधनी-कमर में पहने जाने वाले आभूषण को करधनी कहते हैं।अधिकतर तो चाॅंदी की होती है पर कहीं -कहीं स्वर्ण की करधनी भी पहनी जाती है।करधनी पहनने से महिलाओं को मासिक धर्म के समय व गर्भावस्था के समय होने वाली पीड़ा से मुक्ति मिलती है।

15-पायल-पायल पैरों में पहना जाने वाला आभूषण होता है।पायल की रगड़ से सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है।टाॅंगों में होने वाले दर्द से मुक्ति मिलती है।पायल चाॅंदी की ही पहननी चाहिए।

16-बिछुआ- बिछुआ महिलाओं के सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। विवाह में फेरों के समय ही दुल्हन को अंगूठे के बराबर की उंगली में पहनाया जाता है।इस उंगली में बिछुए की रगड़ से उत्पन्न ऊर्जा नारी के गर्भाशय तक जाती हैं। अविवाहित बहनें यह आभूषण नहीं पहनतीं। बिछुआ पहनने से मानसिक संतुलन बना रहता है। महिलाओं की निर्णय क्षमता बढ़ती है।

शारदा भाटी
9971210263

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