डॉ. प्रज्ञा पाण्डेय की दो ग़ज़लें
ख़यालों भरी ज़िन्दगानी मिली है,
जिसे देख कर मेरी आँखें हुई नम,
विचारों की दुनिया महकती रहेगी,
मैं ग़ज़लें सुना कर उसे मोम कर दूँ,
मेरी ज़िन्दगी में वो आया है जब से,
लड़कपन,जवानी, बुढ़ापा भुला दूँ,
नहीं भूल पाओगी अब ज़िन्दगी भर,
मायावी जीवन से इंसानों ने इतना प्यार किया,
राम के जब किरदार पे उँगली लोग उठाते फिरते हैं,
दुनिया भर के अस्त्र शस्त्र तो रक्खे रह गये एक तरफ,
अक्सर मैं तन्हाई में ये बातें बैठ के सोचती हूँ,
घर के अंदर रहने का निर्देश दे दिया एक पल में,
ग़ैरों का एहसान के मेरे मुश्किल वक़्त में काम आये,
मैं तो तन्हाई की गोद में हर पल तन्हा रहती थी,
RELATED ARTICLES
