Saturday, May 18, 2024
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नवेन्दु उन्मेष का व्यंग्य : कोरोना काल में बदलती दुनिया

जब चीन कोरोना की आढ़त लगाये बैठा था और दुनिया के देशों को खुदरा में इसे दे रहा था तब लोग कह रहे थे कि कोरोना काल में सब कुछ बदल सकता है लेकिन दुनिया नहीं बदल सकती। लेकिन आज जब कोरोना का नागिन डांस पूरी दुनिया देख रही है तब उसे पता चल रहा है कि वास्तव में दुनिया बदल चुकी है। जो लोग कभी शराब से परहेज करते थे और कहते थे कि मैंने कभी शराब को हाथ नहीं लगाया वे सत्तर प्रतिशत अल्कोहल से युक्त सेनिटाइज लगाकर दिनभर में कई बार हाथ कल रहे हैं। अब कोई यह नहीं कह सकता कि मैंने कभी अल्कोहल को हाथ नहीं लगाया।
यहां तक कि शादी के जोड़े पहने वर-वधु भी सेनिटाजर लगाकर मंडप के नींचे बैठ रहे हैं। तबादला होने पर जिले के सीनियर अधिकारी पदभार भी सेनिटाजर लगाकर ग्रहण कर रहे हैं। यहां तक कि वे जब अवैध शराब की फैक्ट्रियों में छापेमारी करने जाते वहां कनस्तर में मौजूद शराब को भी उठाने के लिए सेनिटाइजर लगा रहे हैं। यहां तक कि शराब बनाने वाली अवैध फैक्ट्री के मालिक को गिरफतार करने से पूर्व सेनिटाइजर लगाने को कहते और खुद भी उसे पकड़ने पहले अपने हाथों में सेनिटाइजर मल रहे हैं। सड़कों पर दुनिया ऐसी बदली की वाहन चालक यात्रियों के लिए तरस रहे हैं।
अगर कोई मिल जाता है तो उस पर ऐसे झटपते हैं जैसे गिद्ध अपने शिकार को देखकर झपटता है। बड़े दुकानों में जाइये तो खरीदार का स्वागत सेनिटाइजर हाथ में देकर किया जाता है। उसे देखकर ऐसा लगता है जैसे दुकान का मालिक अभी-अभी सत्यनारायण कथा सुनकर बाहर आया हो और ग्राहकों को चनामृत प्रसाद बांट रहा हो। मंदिरों में भगवान को भक्तों के दर्शन नहीं हो रहे हैं। भगवान भी भक्तों के दर्शन के लिए तरस रहे हैं। भक्त हैं कि भगवान के आॅनलाइन दर्शन कर रहे हैं जिसकी भनक भगवान को भी नहीं लग रही है। आखिर ऐसा हो भी क्यों नहीं भगवान के पास मोबाइल या लैपटाप जो नहीं हैं।
थाने में जाइये तो पता चलेगा कि सारा थाना कंटेनमेंट जोन घोषित किया जा चुका है। पुलिस वाले जो रोज दूसरों को डराते थे वे कोरोना के डर से थाना छोड़कर भाग चुके हैं। चोर-उचक्के सोच रहे हैं-अच्छा हुआ सालों को जो थाना छोड़कर भागना पड़ा। एक पुलिस वाले ने तो एक अपराधी को छोड़ने के लिए डिजिटल क्वांइंस तक रिश्वत में मांग लिया। बोला-कोरोना के दौर में कहीं कोई रिश्वत में रुपये लेता है क्या। मुझे तो डिजिटल क्वाइंस चाहिए।
कोरोना काल में नेताओं के दर्शन भी नहीं हो रहे हैं। कई राज्यों में सरकार खुद क्वारंटाइन में चली गयी है। मंत्री मुख्यमंत्री से और मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों से मिलने से कतरा रहे हैं। विधायक समस्याओं की गठरी लेकर सड़कों पर घूम रहें हैं। जब जनता उनके समक्ष समस्याएं रख रही है तो कहते हैं मैंने सरकार को ट्विट कर दिया है। जब ट्विटर पर आ जायेगा तब पढ़ लेना।
बरसात के दिन हैं। मेरे पड़ोसी के घर में कल सांप निकट आया तो उसने जिले के एसपी को फोन लगाया। उधर से जबाव आया सांप का फोटो खींचकर पुलिस की वेबसाइट में डाल दो अभी थाने में कोरोना बैठा है। उसके जाते ही सांप को पुलिस वाले आकर घर से निकाल देंगे। पडोसी असमंजस में थे। सांप का फोटो खींचे या घर से उसे बाहर निकालें। बाद में उन्होंने किसी तरह उसे घर से बाहर निकाल दिया। बाद में मुझसे कहने लगे लगता है पूरे लोकतंत्र पर कोरोना जड़ जमाये बैठा है। सूली उपर सेज पिया की तर्ज पर कोरोना उपर सेज सरकार की सजी हुई है।
नवेंदु उन्मेष
नवेंदु उन्मेष
सीनियर पत्रकार, दैनिक देशप्राण. संपर्क - navenduunmesh@gmail.com
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