संपादकीय – इमरान ख़ान कपिल शर्मा शो के लिये सही रहेंगे…!

इमरान ख़ान पिछले दिनों भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों की तारीफ़ें करते दिखाई दिये। मगर वह यह भूल गया कि भारत ने पहले अपनी आर्थिक स्थिति मज़बूत की, उसके बाद ही वह अमरीका और चीन की आँखों में आँखें डाल कर देख...

संपादकीय – विल स्मिथ के थप्पड़ की गूंज

पुरवाई पत्रिका किसी भी प्रकार की हिंसा के विरुद्ध है। मगर हमारा मानना है कि जो काम क्रिस रॉक ने किया वो भी किसी हिंसा से कम नहीं है। कॉमेडी का पहला उसूल होता है कि कभी भी किसी पर निजी तंज़ नहीं कसा...

संपादकीय – रूस युक्रेन युद्ध में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण

अंग्रेज़ी में एक कहावत है कि ‘चैरिटी बिगिन्स एट होम।’ यदि अमरीका के साथी युरोपीय संघ  के देश ही अमरीका की बात मानने को तैयार नहीं तो फिर भारत ऐसा क्यों करेगा। दरअसल अमरीका इस मामले में डबल गेम भी खेल रहा है। लंदन...

संपादकीय – ‘दि कश्मीर फ़ाइल्स’… कितनी हक़ीकत कितना फ़साना…!

यह एक सच्चाई है कि कश्मीरी पंडितों का नरसंहार हुआ और उन्हें पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा। पाँच से सात कमरों में रहने के आदी परिवारों को 10 बाई 12 फ़ुट के टेंट में वर्षों रहना पड़ा। इस कारण उनकी एक पूरी पीढ़ी...

संपादकीय – दि कश्मीर फ़ाइल्स… कितनी हकीकत, कितना सिनेमा

मगर जहां तक कृष्णा की अंतिम स्पीच का प्रश्न है, मुझे पूरे साहित्य और सिनेमा में केवल एक ही और ऐसी स्पीच याद आती है जिसने सुनने वालों की पूरी मानसिकता को बदल दिया हो। शेक्स्पीयर के नाटक जूलियस सीज़र में मार्क एंटनी की...

संपादकीय – भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष को 4-1 से हराया

एक बात हैरान कर देने वाली है कि मायावती और बसपा का तो मतदाताओं ने फ़ातिहा ही पढ़ दिया लगता है। लगता है कि उनके लिये कम-बैक करना आसान नहीं होगा। कल तक राष्ट्रीय राजनीति में एक अहम् नाम – ‘मायावती’ जैसे पूरी तरह...