संपादकीय – भारतीय मीडिया… एक मज़ाक!

यह पूरी पटकथा लगता है जैसे किसी बॉलीवुड फ़िल्म से उधार ली गयी है। एक ईमानदार पुलिस अफ़सर है जो किसी बड़े राजनीतिज्ञ के दामाद और सिने अभिनेता के पुत्र को ड्रग्स के मामले में गिरफ़्तार करता है। राजनीतिज्ञ कसम खाता है कि ईमानदार...

संपादकीय – बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले के ख़िलाफ़ लंदन में भूख हड़ताल

ऐसे में यह सवाल अवश्य उठता है कि एक मित्र सरकार के चलते भला बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के दौरान हिन्दू मंदिरों पर हिंसात्मक हमले कैसे और क्योंकर हुए। ज़ाहिर है कि सवाल विश्व के अधिकांश देशों और भारत के तथाकथित सेक्युलर नेताओं एवं...

संपादकीय – ब्रिटेन के सांसद की चाकू से गोद कर हत्या

हत्या के इस मामले में राजनीतिक दलों ने घटिया राजनीति को तिलांजलि देते हुए एकता का परिचय दिया है। मैं यह सोच रहा था कि यदि ऐसी घटना भारत में घटी होती तो अब तक सभी विपक्षी दलों ने भारत के प्रधानमंत्री को इस...

संपादकीय – जब रक्षक ही भक्षक बने

मित्रों बहुत अच्छा लगता है जब आप मुझे व्हट्सएप पर पुरवाई के संपादकीय के बारे में संदेश भेजते हैं। कुछ मित्रों के लिये तो यह साप्ताहिक ख़ुराक जैसा होता जा रहा है। आप ने इस बार बहुत से विषय सुझाए हैं। एक मित्र का कहना...

संपादकीय – न ड्राइवर न लारी पेट्रोल की मारामारी

आजकल वह्टसएप पर एक मज़ाकिया पोस्ट वायरल हो रही है जिसमें प्रधान मंत्री बॉरिस जॉन्सन पत्रकार लॉरा से बात करते हुए कह रहे हैं, “मोटापे का इलाज तो मैं कर रहा हूं कि सुपर मार्केट तक खाद्य सामग्री नहीं पहुंचने दे रहा। न खाने...

संपादकीय – बकरी ने दूध दिया मगर मेंगनी डाल कर

विकसित और विकासशील देशों के बीच जो खाई बनी है ब्रिटेन उस खाई को और अधिक बड़ी बना रहा है। एक तरफ़ अमरीका और ब्रिटेन में बनी वैक्सीन बहुत महंगी है तो वहीं भारत में बनी कोवीशील्ड और कोवैक्सीन उनके मुकाबले बहुत सस्ती हैं।...