Tuesday, November 3, 2026
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 डॉ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’ की कविता- विश्व पटल पर राज करे

सर्वमान्य है जग में हिन्दी, 
यह जन-गण की भाषा।
विश्व पटल पर राज करे यह, 
है सबकी अभिलाषा॥
 
सब विधान शुचि सुंदर इसके, 
है सबकुछ मर्यादित।
अभिव्यक्ति की भाव भंगिमा, 
है पावन प्रतिपादित॥
कब होगी जन-जन की भाषा,
नित है यह प्रत्याशा।
विश्व पटल पर राज करे यह, 
है सबकी अभिलाषा॥
 
भाषा भारत की अति सुंदर, 
सर्व सुपोषित हिन्दी।
महिमा इसकी सर्व-विदित है,
रची भाल पर बिन्दी॥
सत्य सनातन संस्कृतियों ‌की, 
यह मधुरिम मधुमासा।
विश्व पटल पर राज करे यह, 
है सबकी अभिलाषा॥
 
शब्द-कोष है समृद्ध सबसे, 
सुंदर मनमोहक‌ है।
ताल छंद रस अलंकार शुभ,
सबकुछ सम्मोहक है॥
स्वर व्यंजन संपोषित समृद्ध,
सुंदर है परिभाषा।
विश्व पटल पर राज करे यह, 
है सबकी अभिलाषा॥
 
कम्प्यूटर पर हिन्दी का नित,  
है विस्तार सुहावन।
यूनिकोड का फॉण्ट मनोरम, 
है मधुमय मनभावन॥
मंदारिन अंग्रेजी छोड़ो, 
है यह नमन नताशा।
विश्व पटल पर राज करे यह, 
है सबकी अभिलाषा॥
 
जैसा लिखते वैसा पढ़ते, 
वैसा ही उच्चारण।
वैज्ञानिकता पर आधारित, 
वर्ण सभी है धारण॥
देवनागरी लिपि है सुंदर, 
सब लिपियों की आशा।
विश्व पटल पर राज करे यह, 
है सबकी अभिलाषा॥
 
© डॉ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’
 प्रयागराज, उत्तर प्रदेश, भारत
मोबाइल-9452252582
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