होम अपनी बात संपादकीय : एक और आतंकवादी मुठभेड़, पाकिस्तान और हाफ़िज़ सईद

संपादकीय : एक और आतंकवादी मुठभेड़, पाकिस्तान और हाफ़िज़ सईद

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संपादकीय : एक और आतंकवादी मुठभेड़, पाकिस्तान और हाफ़िज़ सईद 1
सांकेतिक चित्र (साभार : गूगल)

पाकिस्तान ने जमात-उद-दावा के सरगना हाफ़िज़ सईद को दस साल की कैद की सज़ा सुना दी है। वह पहले ही तथाकथित 11 साल की सज़ा काट रहा है और अब ये दोनों सज़ाएं साथ साथ चलेंगी। हाफ़िज़ सईद पहले भी पाकिस्तान सरकार के दामाद की तरह रह रहा था। और अब भी उसकी स्थिति वही बनी रहेगी। 

नगरौटा (जम्मू) में चार आतंकवादियों के साथ हुए एनकाउंटर ने बहुत से सवाल फिर से खड़े कर दिये हैं। गुरुवार को हुई मुठभेड़ में मारे गए जैश-ए-मुहम्मद के आतंकी भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद ले जा रहे थे। उनके पास से 11 एके-47 राइफ़लें और पिस्तौलें भी बरामद की गई हैं। पूरी संभावना है कि वे कोई बड़ी योजना बना रहे थे। ये चारों कश्मीर की ओर जाने वाले एक ट्रक में यात्रा कर रहे थे।
भारतीय सेना और जम्मु कश्मीर पुलिस ने अपनी सक्षमता का परिचय देते हुए चारों को पहले चेतावनी दी और बात न माने जाने पर मार गिराया। 
नगरोटा एनकाउंटर की जांच कर रही सुरक्षा एजेंसियों ने एक और बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसियों को शक है कि पाकिस्तान से आने वाले आतंकियों ने भारत में घुसपैठ के लिए सुरंग का इस्तेमाल किया है। ये आतंकी पाकिस्तान के शकरगढ़ से सांबा सेक्टर में सुरंग के जरिए घुसे थे। शक है कि आतंकियों के पास से बरामद सामान में से हथियार और बारूद पहले से ही ट्रक में मौजूद थे। 
आम तौर पर प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ऐसी घटनाओं पर न तो ट्विटर करते हैं और न ही कोई टिप्पणी। मगर इस बार स्थिति अवश्य ही गंभीर रही होगी क्योंकि उन्होंने तत्काल एक मीटिंग भी बुलाई और टिप्पणी भी दी। मीटिंग में गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल भी शामिल थे।
पीएम मोदी ने कहा, पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 4 आतंकवादियों का मार गिराया जाना और उनके पास बड़ी मात्रा में हथियारों व विस्फोटकों की मौजूदगी का होना यह संकेत देता है कि वे बहुत बड़े हमले की तलाश में थे, लेकिन उनके प्रयासों को एक बार फिर से विफल कर दिया गया है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के आईजी मुकेश सिंह ने बताया कि नगरोटा में मारे गए आतंकियों से गोला-बारूद के अलावा 11 एके-47 राइफल, 6 एके-56 राइफल, 3 पिस्टल, 29 ग्रेनेड, मोबाइल फोन, बंपर, पिट्ठू बैग, मोबाइल सेल, मैगजीन बरामद हुआ. उन्होंने कहा, पिछले कुछ सालों के इतिहास में ये सबसे बड़ी खेप है।
पाकिस्तान ने हमेशा की तरह इस वारदात में अपना किसी प्रकार का हाथ होने से इन्कार कर दिया। वैसे पिछले कुछ अरसे से पाकिस्तान ग़लत कारणों से ख़बरों में है। वहां के विपक्षी दल लगातार आंदोलन कर रहे हैं। वहां गिलगिट और बाल्टिस्तान में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। बलोचिस्तान में आज़ादी के नारे लग रहे हैं। वहां के विपक्षी और सरकारी नेताओं के बयान पाकिस्तान को शर्मसार कर रहे हैं। 
जैसे इतना ही काफ़ी नहीं था, पाकिस्तान ने जमात-उद-दावा के सरगना हाफ़िज़ सईद को दस साल की कैद की सज़ा सुना दी है। वह पहले ही तथाकथित 11 साल की सज़ा काट रहा है और अब ये दोनों सज़ाएं साथ साथ चलेंगी। हाफ़िज़ सईद पहले भी पाकिस्तान सरकार के दामाद की तरह रह रहा था। और अब भी उसकी स्थिति वही बनी रहेगी। 
सवाल उठता है कि आख़िर यह नाटक पाकिस्तान को करना क्यों पड़ा। सच तो यह है कि पाकिस्तान एफ़.ए.टी.एफ़. की ग्रे-लिस्ट में है और उसका वहां से निकलना बहुत ज़रूरी है। पाकिस्तान के पास अब पुराने कर्ज़ों का ब्याज़ चुकाने तक के पैसे नहीं हैं। शायद एफ़.ए.टी.एफ़.को ख़ुश करने के लिये यह क़दम उठाया गया है। सईद की यह गिरफ्तारी भी दुनिया को एक ढोंग ही मालूम पड़ रही है। सईद और उसके साथी जेल में जरुर रहेंगे लेकिन इमरान-सरकार के दामाद की तरह रहेंगे। अब उनके खाने-पीने, दवा-दारु और आने-जाने का खर्चा भी पाकिस्तान सरकार ही उठाएगी। उन्हें राजनीतिक कैदियों की सारी सुविधाएं मिलेंगी।
पाकिस्तान अब तक नकारता आया है कि 26 नवम्बर के मुंबई हमले में उसका कोई हाथ नहीं था। मगर पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (FIA) ने स्वीकार किया है कि भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई हुए 26/11 के हमले में पाकिस्तान के आतंकियों का हाथ था। उनके नामों की एक सूची भी जारी की गयी है। 
एक ध्यान देने लायक बात यह भी है कि भारत में किसी भी विपक्षी दल ने खुल कर इस आतंकवादी मुठभेड़ पर कोई बयान नहीं दिया और न ही सेना के जवानों की तारीफ़ की है। 
पाकिस्तान सच में अगर इस क्षेत्र में शांति चाहता है तो उसे भारत के विरुद्ध आतंकवाद पर सही मायनों में रोक लगाने के उपाय करने होंगे। वरना पाकिस्तान अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारता रहेगा और पूरा क्षेत्र अशांत बना रहेगा।
लेखक वरिष्ठ साहित्यकार, कथा यूके के महासचिव और पुरवाई के संपादक हैं. लंदन में रहते हैं.

2 टिप्पणी

  1. सम्पादकीय में बहुत अच्छा सन्देश भारत के नाम है ।
    विरोधीदल की ओर आपका संकेत सटीक है, ये देश की सुरक्षा और अखंडता का प्रश्न है।

  2. पाकिस्तान न कभी सुधरा है, न कभी सुधरेगा।
    भारतीय सेना के जवानों को सैल्यूट किया जाना चाहिए।
    विपक्षी दल का कोई बयान न आना और फ़ौजियों की तारीफ़ न करना उनके संकुचित सोच का परिचायक है।
    बहुत अहम् मुद्दे पर यह सम्पादकीय सराहनीय है।

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