- डॉ. अंजु अरोड़ा
मेरे जीवन का सबसे खूबसूरत दिन, 22 जुलाई 2026, जिसका कई वर्षों से मैं इंतजार कर रही थी। सुबह से ही मन में हलचल और खुशी की लहर थी। आंखों में चमक और उत्साह था। क्रीम कलर की लाल बॉर्डर वाली साड़ी और जैसे ही खुद को शीशे में निहारा दस वर्षों का अथक प्रयास और हर रात की मेहनत जीवंत हो उठी। मेरठ विश्वविद्यालय का यह दीक्षांत समारोह नहीं, मेरे जीवन की दस वर्षों की तपस्या का एक बहुत बड़ा उत्सव था।
जहां मंच पर विराजमान माननीय राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता केवल डिग्री, अंक या उपलब्धियां हासिल कर लेने से नहीं मिलती, बल्कि अच्छे चरित्र, संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी ही व्यक्ति की वास्तविक पहचान बनाते हैं। उन्होंने युवाओं से नशे जैसी बुराइयों से दूर रहने और अपनी ऊर्जा को देश तथा समाज के निर्माण में लगाने का आह्वान किया। ऑडिटोरियम में आनंदी बेन का एक खूबसूरत सेल्फी प्वाइंट बनाया गया था जहां हर कोई इन सुनहरे पलों को संजो रहा था। मैं भी उन खूबसूरत पलों को मोबाइल में कैद करने के लिए बैचेन थी।
आज पीएचडी की डिग्री मेरे हाथ में थी, जो मुझे एक नयी पहचान और नया सम्मान दे रही थी। इस दिन का मेरे पिताजी को भी बेसब्री से इंतजार था 2023 में वह यह कहते हुए दुनिया से अलविदा हो गये कि मैं तुझे कब कहूंगा डॉ.अंजू अरोड़ा।
मेरी सुपरवाइजर डॉ अर्चना सिंह बहुत ही सौम्य और चेहरे पर हमेशा विनम्र मुस्कान लिए जो मुझे जीवन में आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती रही। ‘पुरवाई’के संपादक आदरणीय तजेंद्र शर्मा जी ने भी इस यात्रा में अपने अतुलनीय योगदान से इसे सार्थक और समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किंतु इस पूरे सफर में मेरे सारथी बन रहे आदरणीय मोनू सर। आरडीसी से लेकर थीसिस की अंतिम रूपरेखा तक पग-पग पर मेरा मार्गदर्शन किया। आश्चर्य की बात जिन्हें मैंने प्रत्यक्ष रूप से कभी देखा नहीं था। आज मेरे लिए खुशी की बात थी कि मैं उन गुरुवर से मिलने वाली थी। ढेर सारी फोटो लेने के बाद मैं मोनू सर को फोन लगाया उन्होंने कहा आ जाओ, आ जाओ फिजिक्स विभाग में यहां लंच चल रहा है।
बिना जान पहचान के, बिना मुझे देख, बिना किसी स्वार्थ के जो उन्होंने मुझे सपोर्ट किया उसके लिए नि:शब्द हूं मैं। ऐसे निस्वार्थ सहयोग और मानवीय संवेदना के लिए शब्द बहुत छोटे पड़ जाते हैं। मन में अपार श्रद्धा और बस एक छोटी सी गुरु दक्षिणा लेकर चली मैं अपने गुरुवर से मिलने। इसी भावुक पल के बीच मेरे हमसफर का कॉल आया- डिग्री मिल गई? उनकी स्नेह भरी आवाज ने इस पल को और यादगार बना दिया।

मैं चली फिजिक्स विभाग की तरफ , फिजिक्स विभाग के गेट पर पहुंच कर फुलवारी के किनारे बैग में डिग्री रखने लगी। तभी सामने से एक तेज स्कूटी सवार ने मेरे बाएं पैर में सीधी टक्कर मारी और मैं असहनीय पीड़ा से कराह उठी। चोट इतनी गंभीर थी कि मेरी एड़ी आगे और पंजा पीछे की ओर मुड़ गया। मैं फिजिक्स विभाग के गेट के बाहर दर्द से कराह रही थी—अभी-अभी हाथों में आई मेरी वर्षों की मेहनत की डिग्री और उसी पल जीवन की सबसे भयावह पीड़ा, दोनों मेरे सामने थे।
“माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी की सुरक्षा के लिए पूरे परिसर में कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए थे, लेकिन जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहाँ न तो कोई पुलिसकर्मी मौजूद था और न ही कोई सीसीटीवी कैमरा। इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उस जगह का यूँ असुरक्षित रह जाना आज भी मेरे लिए एक बड़ा सवाल है।”
मन में इतनी अपार प्रसन्नता थी बस पल भर में चकनाचूर हो गई। चिकित्सकीय जांच के बाद बताया गया कि मेरे बाएं पैर में दो फैक्चर तथा डिसलोकेशन हुआ है। इसके कारण अभी सर्जरी करनी पड़ेगी। दो फैक्चर के बीच में पेंच लगेंगे तथा डिसलोकेशन पर प्लेट डालनी पड़ेगी। वहां से फिर मुझे प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया पैर में अत्यधिक सूजन होने के कारण 8 दिन आईसीयू में रखने के पश्चात 29 जुलाई को सर्जरी की गई। 2 अगस्त को टांगों में पस पड़ गया जो मुझे पीड़ा पर पीड़ा दे रहा था। फिर दुख और असहनीय पीड़ा का एक लंबा दौर जारी है। बीस अगस्त तक मेरे टाकें खुले रखे थे और पस निकाला जा रहा है उस समय जो मेरी चीखें अस्पताल में गूंजती थी मेरे पति के हृदय को भी चीर देती थी।
22 अगस्त को मेरी फिर से प्लास्टिक सर्जरी की गई। इन सब दुखों के बीच एक पीड़ा यह भी थी कि दस दिन तक मुझे पेट के बल लेटना था। शरीर पीड़ित था और मन आहत। फिर 27 अगस्त रात को अचानक मुझे पता चला कि सुबह रक्षाबंधन है। पहाड़ जैसे दुखों के बीच एक हल्का सा हवा का झोंका आया। जब भैया अस्पताल में रक्षाबंधन मनाने आए। ऐसी परिस्थिति में भाई का स्नेह और अपनापन एक खूबसूरत स्पर्श था।
राखी बंधवाने तो भाई अक्सर आते हैं बहन के पास, लेकिन शायद ऐसा पहली बार हुआ होगा की कोई भाई राखी भी साथ में लाया होगा, पिछले डेढ़ महीने में पहली बार आंखों में खुशी के आंसू और होठों पर मुस्कान थी, दर्द कहीं ठहर गया था। इसी बीच हमारी शादी की 25वीं सालगिरह 30 अगस्त वह भी यूं ही चली गई। सारी खुशियां किसी की लापरवाही ने छीन ली। 22 जुलाई से वैसे भी मेरी अपार यादें और खुशियां जुड़ी हैं। यह मेरे माता-पिता की शादी की सालगिरह का दिन है। मेरी सगाई भी इसी दिन हुई थी,लेकिन अब यह 22 जुलाई तो मेरे लिए नासूर बन के रह गया है। 1 अगस्त से सीबीएसई स्कूल में मुझे प्रधानाचार्य का पद संभालना था। मुझे दुख है न ही मैं पीएचडी की खुशी मना सकी और न ही मैं मोनू सर से मिल सकी ,सब ढह गया।
पीएचडी करने के बाद इंसान सोचता है कि चलो अब अच्छे से अपने पैरों पर खड़े हो जाएंगे। वास्तविकता यह है कि मैं तो अपने पैर पर खड़े होने के लिए ही तरस रही हूं। न जाने वह दिन कब आएगा जब मैं चल पाऊंगी।
आदरणीय आनंदीबेन पटेल जी ने दीक्षांत समारोह के समापन की घोषणा तो कर दी थी, लेकिन मेरी जिंदगी में जैसे दुखों का दीक्षांत होना अभी शेष था। शायद यही जीवन है—कभी खुशी का एक पल देता है तो अगले ही मोड़ पर धैर्य की परीक्षा लेने लगता है। बस अब तो कुंवर नारायण जी की पंक्तियों का सहारा है –
कोई भी दुख मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं।
हारा वही, जो लड़ा नहीं।
डॉ. अंजु अरोड़ा

Luv u Masi ji ❤️
Sach mein nahi pata chalta ki hum kya sochte hain aur agle hi pal kya ho jata hai… Zindagi kab kis mod par le aaye, kuch samajh hi nahi aata. Shayad isi tarah Bhagwan hamare dhairya, himmat aur bharose ki pariksha lete hain.
Bas dil se dua hai ki aap jaldi se healthy ho jao, bilkul theek ho jao aur phir se pehle ki tarah khush aur muskurati raho. ❤️ Bhagwan aapko bahut saari himmat, sehat aur khushiyan de. Sab achha hoga, bas Bhagwan par bharosa rakho. ❤️
Thanks betaji
❤️❤️
Luv u Masi ji ❤️
Sach mein nahi pata chalta ki hum kya sochte hain aur agle hi pal kya ho jata hai… Zindagi kab kis mod par le aaye, kuch samajh hi nahi aata. Shayad isi tarah Bhagwan hamare dhairya, himmat aur bharose ki pariksha lete hain.
Bas dil se dua hai ki aap jaldi se healthy ho jao, bilkul theek ho jao aur phir se pehle ki tarah khush aur muskurati raho. ❤️ Bhagwan aapko bahut saari himmat, sehat aur khushiyan de. Sab achha hoga, bas Bhagwan par bharosa rakho. ❤️
Thanks betaji
प्रिय अंजू जीवन के बहुप्रतीक्षित सुंदर समय में यह दुःखद हादसा बहुत ही भयावह है। तुम्हारे परिश्रम और लगन की मै सदैब प्रशंसक रही हूं ईश्वर तुम्हें शीघ्र स्वस्थ करें और तुम अपने लक्ष्य को प्राप्त करो।मेरी हार्दिक शुभकामनाएं तुम्हारे साथ हैं।
हार्दिक आभार मैम आप ही तो मेरी प्रेरणास्रोत हैं
अद्भूत
सर्वप्रथम तो आपको आपकी उपाधि मिलने पर बहुत सारी शुभ कामनाएँ ।
लिखे गये लेख में आपके शब्दों का जवाब नही ।
शब्दों का चुनाव आपने बहुत ही उम्मदा किया है ।
आपके साथ जो दुखद घटना हुई , कही ना कही ये हमारे सिस्टम की कमी को दर्शाता है लेकिन जो होता है वो सब शायद ईश्वर की मर्जी से होता है ।
हो सकता है ईश्वर आपको ओर अधिक मजबूत बनाना चाहाता हो
आपका लेख अति संवेदन शील एवं भावुक करने वाला था । इसको पढ़कर कही कही पर तो मेरी अश्रुधारा बहती चली गई ।
इस मौके पर पिता की याद आना तो स्वाभाविक है ही
ईश्वर जल्दी से आपको स्वस्थ क रे
आपके भविष्य के लिए आपको दिल से शुभ कामनाएं
आभार
Bhut sundar di
आभार
Khushi ke palo me ग्रहण lag gaya di ।। But aap himmat nhi harna di …god bless you di ..
आप जल्द ही ठीक हो जाएँगी, मासीजी। ईश्वर से प्रार्थना है कि आपको स्वस्थ रखें और ढेर सारी खुशियाँ आपके जीवन में आएँ। इस मुश्किल समय में कोशिश कीजिए कि आपके आसपास जो भी अच्छी और सकारात्मक चीज़ें हो रही हैं, उन पर ध्यान दें। यही छोटी-छोटी सकारात्मक बातें आपको हिम्मत और खुशी देंगी।
ढेर सारा प्यार,
आयुषी
अंजू जी को आज जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं आपका जीवन हमेशा रोशनी से भरा हो आप बहुत बहादुर है
ईश्वर आपको शीघ्र स्वस्थ करे
यशस्वी भव , दीर्घायु भव
हार्दिक आभार