संपादकीय : सुशांत सिंह राजपूत प्रकरण और पल पल खुलते नये राज़ 3

पुलिस को दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्याओं में कहीं कोई संबन्ध दिखाई नहीं दिया। आज जब यह राज़ खुला कि आत्महत्या के समय दिशा सालियान के बदन पर कपड़े नहीं थे, तो बेचारी मुंबई पुलिस की मासूमियत पर और भी प्यार आया। मुंबई पुलिस के अधिकारियों को इसमें कुछ संदेहास्पद नहीं लगा कि एक लड़की आत्महत्या करने से पहले अपने कपड़े क्यों उतारेगी। ज़ाहिर है कि उसका उद्देश्य गिनीज़ बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में अपना ना दर्ज करवाने का तो नहीं ही रहा होगा।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत एक ऐसा पिटारा बनती जा रही है जिसमें से हर रोज़ कुछ नये राज़ निकल कर सामने आ खड़े होते हैं। लगभग दो महीने बाद भी मुंबई पुलिस ने अब तक कोई एफ़.आई.आर. दर्ज नहीं की है। बिहार पुलिस के पास एफ़.आई.आर. दर्ज भी हो चुकी है और उन्होंने मुंबई पुलिस द्वारा सहयोग ना मिलने पर मामला सी.बी.आई. को सौंप भी दिया है।
सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद पुलिस ने वहां पहुंचते ही करीब दो घन्टे में यह निर्णय ले लिया कि सुशांत ने आत्महत्या की है। हालाँकि सुशांत की लाश के पास कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। 
सुशांत के दोस्त सिद्धार्थ पिठानी ने ही सुशांत के दरवाज़े के ताले की चाबी बनवाई… वही सबसे पहले अन्दर घुसा और उसी ने सुशांत की लाश को नीचे उतारा। सिद्धार्थ के अनुसार सुशांत ने पंखे से लटकने के लिये सिद्धार्थ के हरे रंग के कुर्ते का इस्तेमाल किया।
बेचारी मुंबई की पुलिस इतनी मासूम है कि उसने इतने अहम विटनेस को मुंबई छोड़ कर हैदराबाद जाने की अनुमति दे दी। सिद्धार्थ ने कदम कदम पर अपना बयान बदला और पुलिस को उस पर कोई संदेह नहीं हुआ।
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दिशा सालियान
पुलिस को दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्याओं में कहीं कोई संबन्ध दिखाई नहीं दिया। आज जब यह राज़ खुला कि आत्महत्या के समय दिशा सालियान के बदन पर कपड़े नहीं थे, तो बेचारी मुंबई पुलिस की मासूमियत पर और भी प्यार आया। मुंबई पुलिस के अधिकारियों को इसमें कुछ संदेहास्पद नहीं लगा कि एक लड़की आत्महत्या करने से पहले अपने कपड़े क्यों उतारेगी। ज़ाहिर है कि उसका उद्देश्य गिनीज़ बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में अपना ना दर्ज करवाने का तो नहीं ही रहा होगा। 
मुंबई पुलिस को समझ ही नहीं आया कि सुशांत की मित्र रिया चक्रवर्ती क्या कुछ कर चुकी है और कर रही है। वह बांद्रा के डी.सी.पी. अभिषेक त्रिमुखे से बात करती है। और वे भी उसे फ़ोन करते हैं। वह एक दिन देश के गृह मंत्री को चिट्ठी लिखती है कि सुशांत की मृत्यु की जाँच सीबीआई द्वारा करवाई जानी चाहिये। मगर जब बिहार पुलिस मामले की तहकीकात करने आती है तो रिया उनसे बचती फिरती है। और फिर वो सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाती है कि मामले को सीबीआई के सुपुर्द न किया जाए और केवल मुंबई पुलिस की देखरेख में ही मामले की जाँच की जाए। 
कांग्रेस पार्टी का कुछ अजीब सा ढुलमुल रवैय्या दिखाई दे रहा है। उनके नेताओं के वक्तव्यों से लगता है जैसे वे भी किसी को बचाने के प्रयास में जुटे हैं।
उधर जब शोर मचता है कि रिया चक्रवर्ती ने सुशांत सिंह राजपूत के 15 करोड़ रुपयों के साथ हेराफेरी की है, तो एनफ़ोर्समेण्ट डायरेक्टोरेट भी सक्रिय हो जाता है। आठ घन्टे से अधिक रिया से सवाल जवाब किये जाते हैं।
अधिकांश सवालों के जवाब टालने का प्रयास करती है रिया। सवाल यह भी है कि जब उसकी आमदनी इतनी सीमित है तो फिर भला उसने इतनी प्रॉप्रटी कैसे ख़रीद ली है। एनफ़ोर्समेण्ट डायरेक्टोरेट ने रिया के पिता, माता और भाई को भी इन्क्वायरी के लिये बुलावा भेज रखा है।
एक तरफ़ महाराष्ट्र के गृहमंत्री और मुख्यमंत्री शोर मचा रहे हैं कि यह हादसा मुंबई में हुआ है तो यह हक़ मुंबई पुलिस का ही बनता है कि वे केस की तफ़तीश करे। लगता है जैसे कोई प्रॉपर्टी का मामला है और मुंबई पुलिस परेशान हो रही है कि सारी प्रॉपर्टी कहीं बिहार पुलिस न ले भागे। मज़ेदार बात तो यह है कि बिहार पुलिस के तेज़ तर्रार अधिकारी विनय तिवारी को मुंबई में लैण्ड करते ही क्वारन्टीन कर दिया गया… सीधे शब्दों में कहा जाए तो नज़रबन्द कर दिया। और दूसरी अधिकारी ऑटो रिक्शा में चलते दिखाई दिये।
बिहार पुलिस के डायरेक्टर जनरल गुप्तेशवर पाण्डेय ने मुंबई पुलिस पर आरोप लगाया है कि उनका रवैय्या ग़ैर-ज़िम्मेदाराना है। उनके अफ़सरों को न तो किसी प्रकार की तहकीकात करने की इजाज़त दी गयी और न ही किसी प्रकार के सुबूत दिखाए गये। बिहार पुलिस के अधिकारी वापिस पटना लौट गये और बिहार के मुख्यमंत्री ने सुशांत के पिता जी से बात करके सीधे सीबीआई को मामला सौंप दिया।
कांग्रेस पार्टी का कुछ अजीब सा ढुलमुल रवैय्या दिखाई दे रहा है। उनके नेताओं के वक्तव्यों से लगता है जैसे वे भी किसी को बचाने के प्रयास में जुटे हैं। 
इस बीच संदीप सिंह कहीं ग़ायब ही हो गया है। कहां तो हर मामले को वह तय कर रहा था… हर सेलेब्रिटी को कन्धों पर हाथ रख कर फ़ोटो खिंचवा रहा था। उसकी पी.आर. टीम सुशांत की मौत को पूरी तरह से कैश कर रही थी। 
सैम्युअल जो ग़ायब था वो अचानक अर्णव गोस्वामी के प्रोग्राम में वापिस आ गया। लगता है कि मुंबई पुलिस का मामले में कोई ज़ोर नहीं चल रहा। जिसका जब जी आता है मीडिया के सामने आ जाता है जब जी चाहता है ग़ायब हो जाता है। बेचारी मुंबई पुलिस को न जाने कितने प्रकार के निर्देश रोज़ाना मिल रहे होंगे कि आज मुंबई पुलिस विश्व की सबसे नकारा पुलिस दिखने को मजबूर है।
वैसे मुंबई पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट एक सीलबन्द लिफ़ाफ़े में  जमा करवा दी है। मगर जो पुलिस दो महीने में एफ़.आई.आर. दर्ज नहीं कर पाई; जिसने रिया से आजतक पूछताछ नहीं की। जो  दामन फैला कर लोगों से दिशा पालियाँ की मौत के बारे में सुबूतों की भीख माँग रही है… भला उसकी रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट के जज कैसे विश्वास करेंगे।
इल्ज़ाम तो बॉलीवुड की हस्तियों पर भी हैं और राजनेताओं पर भी। दिशा पालियाँ और सुशांत सिंह राजपूत की मौतों को हत्या साबित करने के लिये सीबीआई ने कमर कस ली है। इस बीच टाइम्स नाऊ टीवी (नाविका और राहुल शिवशंकर), रिपब्लिक टीवी (अर्णव गोस्वामी) औऱ बॉलिबुड ठिकाना की ख़ुश्बू शर्मा हज़ारे ने तय कर लिया है कि शशांक सिंह राजपूत के हत्यारों को चैन से नहीं बैठने देंगे। 
तेजेंद्र शर्मा
लेखक वरिष्ठ साहित्यकार, कथा यूके के महासचिव और पुरवाई के संपादक हैं. लंदन में रहते हैं.

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