Monday, July 22, 2024
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डॉ. कृष्ण कन्हैया की ग़ज़ल

ओछी हरक़त तीखे लोग
छोड़े तब तो  सीखें लोग
जीवन  है- अंधा  क़ानून
चुनते  हैं-  तारीख़ें  लोग
जब भी होता सच ऐलान
छिपते, भेंड़ सरीखे लोग
कुछ क़ौमी क़ायरता देख
घर में दुबके, चीख़ें लोग
मुद्दा कड़वा, विपदा ठोस
छीलें   कैसे-  ईंखें   लोग
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