होमग़ज़ल एवं गीतडॉ. कृष्ण कन्हैया की ग़ज़ल ग़ज़ल एवं गीत डॉ. कृष्ण कन्हैया की ग़ज़ल By डॉ. कृष्ण कन्हैया May 14, 2023 0 159 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp ओछी हरक़त तीखे लोग छोड़े तब तो सीखें लोग जीवन है- अंधा क़ानून चुनते हैं- तारीख़ें लोग जब भी होता सच ऐलान छिपते, भेंड़ सरीखे लोग कुछ क़ौमी क़ायरता देख घर में दुबके, चीख़ें लोग मुद्दा कड़वा, विपदा ठोस छीलें कैसे- ईंखें लोग Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखशिक्षक से संवाद : देश को एकता के सूत्र में बांधने का काम हिंदी कर रही है – प्रो. आनंद वर्धन शर्माअगला लेखडॉ. राजेश शर्मा का लेख – मंटो हर समाज के लिए हमेशा जरूरी रहेगा डॉ. कृष्ण कन्हैया RELATED ARTICLES ग़ज़ल एवं गीत बेचैन कण्डियाल की ग़ज़लें April 4, 2026 ग़ज़ल एवं गीत डॉ. विनोद प्रकाश गुप्ता की ग़ज़लें April 4, 2026 ग़ज़ल एवं गीत मनीष बादल की ग़ज़लें March 8, 2026 कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 अपनी बात…… April 6, 2018 पुस्तक समीक्षा – डॉ अरुणा अजितसरिया एम बी ई April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest गोवर्धन यादव की पांच लघुकथाएँ April 18, 2026 ‘पिता एक फरिश्ता’ काव्य गोष्ठी April 18, 2026 प्रदीप गुप्ता की कविता- चेरी ब्लॉसम April 18, 2026 डॉ. मनीष मिश्रा का संस्मरण- चिरोयली April 18, 2026 और अधिक लोड करें