होमग़ज़ल एवं गीतडॉ पुष्पलता की ग़ज़ल - प्यास बैठी है पास पानी के ग़ज़ल एवं गीत डॉ पुष्पलता की ग़ज़ल – प्यास बैठी है पास पानी के By डॉ. पुष्पलता August 20, 2023 0 320 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp रंग सारे उदास पानी के, बस रहें आस-पास पानी के। ओक भी है उदास औ’ लब भी, प्यास बैठी है पास पानी के। आँख छलकी हुयी हैं औ दिल भी, हमसे रिश्ते हैं खास पानी के। तेरा साया सदा निकलता है, यूँ पहन कर लिबास पानी के। आज पानी की है कमी ज़्यादा, यूँ न टुकड़े तराश पानी के। बस वतन के लिये ही लिखते हैं, नृत्य पानी के, रास पानी के। आज पानी का खत़्म है पानी, दर्द भी हैं उदास पानी के। Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखअरुणा सब्बरवाल की कहानी – छोटा-सा शीश महलअगला लेखसूर्य कांत शर्मा की कलम से – बाल साहित्य परंपरा प्रगति और प्रयोग डॉ. पुष्पलतासंपर्क - 09458513369 RELATED ARTICLES ग़ज़ल एवं गीत डॉ. शिवनारायण की ग़ज़लें October 3, 2026 ग़ज़ल एवं गीत बलजीत सिंह की गज़लें August 22, 2026 ग़ज़ल एवं गीत हरकीरत हीर की तीन ग़ज़लें August 8, 2026 कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 शोध आलेख : हिन्दी ग़ज़ल का संक्षिप्त इतिहास एवं नवछंद विधान – हिंदकी March 22, 2020 अपनी बात…… April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest निज़ाम फतेहपुरी के दोहे October 3, 2026 दीपक शर्मा की कहानी कुर्सी के कवि October 3, 2026 सीमा द्विवेदी की दो कविताएँ October 3, 2026 नीलिमा शर्मा की कहानी – लम्हों ने खता की, सदियों ने सजा पायी October 3, 2026 और अधिक लोड करें