Sunday, June 23, 2024
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डॉ पुष्पलता की ग़ज़ल – प्यास बैठी है पास पानी के

रंग सारे उदास पानी के,
बस रहें आस-पास पानी के।
ओक भी है उदास औ’ लब भी,
प्यास बैठी है पास पानी के।
आँख छलकी हुयी हैं औ दिल भी,
हमसे रिश्ते हैं खास पानी के।
तेरा साया सदा निकलता है,
यूँ पहन कर लिबास पानी के।
आज पानी की है कमी ज़्यादा,
यूँ न टुकड़े तराश पानी के।
बस वतन के लिये ही लिखते हैं,
नृत्य पानी के, रास पानी के।
आज पानी का खत़्म है पानी,
दर्द भी हैं उदास पानी के।
डॉ. पुष्पलता
डॉ. पुष्पलता
संपर्क - 09458513369
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