Saturday, October 3, 2026
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ब्रिटेन में आठ दिनों तक गूँजी हिन्दी  

गुरुकुल यूके के हिन्दी पखवाड़े में साहित्य, संस्कृति, संवाद और नई पीढ़ी की सहभागिता

लंदन/चेम्सफोर्ड। हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में गुरुकुल यूके द्वारा 19 से 26 सितम्बर तक आयोजित आठ दिवसीय ‘हिन्दी पखवाड़ा’ विविध साहित्यिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों के साथ सम्पन्न हुआ। ब्रिटेन से लेकर यूरोप और अन्य देशों तक जुड़े हिन्दी प्रेमियों की सहभागिता ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। पखवाड़े का प्रमुख उद्देश्य विदेश में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के साथ नई पीढ़ी को अपनी भाषा, साहित्य और भारतीय संस्कृति से जोड़ना रहा।

पखवाड़े का शुभारंभ 19 सितम्बर को ब्रिटेन में रह रहे बच्चों के काव्य-पाठ से हुआ। बच्चों ने हिन्दी कविताओं के माध्यम से अपनी भावनाओं और भाषा के प्रति जुड़ाव को अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम में डिप्टी हाई कमिश्नर की गरिमामयी उपस्थिति विशेष रही। उन्होंने बच्चों का उत्साहवर्धन किया और विदेश में हिन्दी सीख रही नई पीढ़ी को प्रोत्साहित किया।

 

20 सितम्बर को ब्रिटेन के कवियों के साथ काव्य-पाठ आयोजित किया गया। विभिन्न रसों और भावों से सजी रचनाओं ने साहित्यिक वातावरण निर्मित किया। डॉ. अनुराधा जी की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।

21 सितम्बर को ‘विदेशों में देवनागरी लिपि—स्थिति, संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय परिचर्चा हुई। नीदरलैंड्स, जर्मनी, क़तर और बुल्गारिया सहित विभिन्न देशों से जुड़े हिन्दी वक्ताओं ने देवनागरी लिपि के शिक्षण, वैश्विक स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर अपने अनुभव साझा किए।

22 सितम्बर को ‘ब्रिटेन में हिन्दी—वर्तमान स्थिति, चुनौतियाँ और भविष्य की संभावनाएँ’ तथा 23 सितम्बर को ‘भारतीय संस्कृति और हिन्दी’ विषय पर विचार-विमर्श हुआ। विद्वानों, शिक्षकों और हिन्दी प्रेमियों ने विदेश में हिन्दी के संरक्षण तथा भाषा और संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।

24 सितम्बर को ऑनलाइन हिन्दी अंताक्षरी ने पखवाड़े में संगीत और स्मृतियों का एक अलग रंग भर दिया। यह केवल अंताक्षरी नहीं, बल्कि हिन्दी गीतों के बहाने अपनी पुरानी यादों को फिर से जीने का अवसर बनी। प्रतिभागियों ने अपने व्यस्त जीवन से कुछ पल निकालकर गीत-संगीत के माध्यम से हिन्दी से अपने भावनात्मक जुड़ाव को साझा किया।

25 सितम्बर को यूके में रह रहे बच्चों ने हिन्दी भाषा के प्रति अपने विचार और भावनाएँ व्यक्त कीं। कुछ बच्चों ने कविताएँ भी प्रस्तुत कीं। विदेश में पली-बढ़ी नई पीढ़ी को हिन्दी में आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखते देखना इस आयोजन का एक विशेष आकर्षण रहा।

पखवाड़े का समापन 26 सितम्बर को चेम्सफोर्ड में आयोजित समारोह एवं पुरस्कार वितरण के साथ हुआ। बच्चों और वयस्कों ने अपनी काव्य प्रस्तुतियों से समारोह को साहित्यिक रंग प्रदान किया। इस अवसर पर हिन्दी भाषा के शिक्षण, संरक्षण, सेवा और प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले समर्पित व्यक्तियों को गुरुकुल यूके की ओर से ‘हिन्दी संवाहक सम्मान’ प्रदान किया गया।

पूरे हिन्दी पखवाड़े में भारतीय उच्चायोग का सहयोग और प्रोत्साहन गुरुकुल यूके के लिए महत्वपूर्ण संबल रहा। विशेष रूप से DHC की उपस्थिति ने बच्चों का मनोबल बढ़ाया। गुरुकुल यूके ने डॉ. अनुराधा जी के प्रति भी विशेष आभार व्यक्त किया, जिन्होंने पूरे पखवाड़े के दौरान अपनी उपस्थिति, आत्मीयता और निरंतर प्रोत्साहन से आयोजन को सहयोग प्रदान किया।

गुरुकुल यूके के लिए यह आयोजन केवल हिन्दी दिवस का उत्सव नहीं, बल्कि विदेश में हिन्दी को जीवंत बनाए रखने का एक सतत प्रयास है। संस्था ने कार्यक्रम से जुड़े वक्ताओं, कवियों, शिक्षकों, अभिभावकों, बच्चों, प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी हिन्दी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे प्रयास जारी रखने का संकल्प दोहराया।

आठ दिन बीत गए, कार्यक्रम सम्पन्न हो गए, लेकिन हिन्दी की यात्रा यहीं समाप्त नहीं होती। विदेश की धरती पर बोया गया हिन्दी का प्रत्येक शब्द आने वाली पीढ़ियों में अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ाव का बीज बने—यही गुरुकुल यूके के इस हिन्दी पखवाड़े का संदेश रहा।

  • इंदु बारोठ

ई-मेल – [email protected]
मोबाइल – +44 7478 743029 

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