Thursday, March 5, 2026
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अनिता रश्मि की चार प्रेम कविताएँ

1.
समुद्र प्रेम से भी
अधिक गहरा
धरती क्या प्यार से भी
अधिक प्यासी
हो सकती है?
अंबर हो सकता
क्या कभी
अनुराग से भी
अधिक ऊँचा
और
क्या यह भी संभव है
मदिरा हो जाए
कभी भी
अधिक मादक
संचित प्यार से?
********
2.
आपने कुछ कहा न था
और मैंने सुन लिया
मैंने कुछ कहा न था
और आपने सुन लिया
ज़ुबां खुलीं भी न थी
कि हमने समझ लिया
ज़ुबां से कहने की
न थीं ये बातें
जो हर कोई हमझ ले
ये बातें थीं
नयनों की सिर्फ
आँखों की इस भाषा को
पहचानती हैं सदियों से
आँखें ही सिर्फ।
*******
3.
ज़िंदगी के उदास
कठोर मोड़ों पर उजास
उसकी राह रोकता है
प्यार उसकी बाँहें गहती है
कहाँ हैं, प्यार से बढ़ कर
अनमोल कुछ भी
पैसा, घर, भूमि, गहने
सब तो बस
हाथ के मैल हैं
सबके पीछे भागने पर भी
बस इक प्यार ही
इंसान को खरीदता बेमोल है।
*******
4.
नदी के
दो किनारों की तरह
हम भी नहीं मिलेंगे
कभी प्रिय
फिर भी
जोड़े रखेगी यह सरिता
सदा-सर्वदा हमें
अपने सूखने तक ।
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