उषा साहू, मुंबई
संपादक जी नमस्कार,
पुरवाई के 24.10.2021 के अंक का संपादकीय पढ़ा। सचमुच हिन्दू और हिन्दू धर्म एक भूल-भुलैया ही है । जितने हिन्दू परिवार है, उतने ही नियम और कानून हैं। दुर्ग पूजा जैसे महत्वपूर्ण त्यौहार पर, बांग्लादेश में इतना बड़ा हादसा हो गया, तो हिंदूओं के खून में उबाल क्यों नहीं आया ? जिस देश में एक पशु की हत्या भी हो जाय (या कर दी जाए) तो बबाल मचा देते हैं, वे कौन-से हिन्दू हैं ? और बांग्लादेश में हिंदूओं (मनुष्यों की) हत्या होने पर भी मौन बैठे हैं, वे कौन-से हिन्दू हैं।
वहीं इस कांड को लेकर, लंदन की लेबर काउन्सिलर, पुष्पिता गुप्ता अनशन पर बैठी हैं, जो कि प्रशंसनीय है। अब मुद्दा ये है, जब भारत सरकार ही इस पर गौर नहीं कर रही है तो ब्रिटिश सरकार को क्या पड़ी है कि दो (भाई) देशों के बीच में दखलंदाज़ी करे। 
यह हिंसक वारदात, कमिला जिले से शुरू होकर, बांग्लादेश के एक बड़े भाग में फ़ेल गई । जब पाकिस्तान ऐसी हरकतें करता है तो दुःख तो होता है, पर आश्चर्य नहीं होता। पाकिस्तान की तो नियति ही यही है। मुझे याद है, एक बार स्कूल दिनों में, “बांग्लादेश बनना चाहिए या नहीं” इस विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता हुई थी, उस समय मैंने बोला था, ‘बांग्लादेश बनाकर हम अपने पड़ोस में एक और पाकिस्तान खड़ा कर रहे हैं’ उस समय तो बोल दिया, पर आज ये बात सत्य सिद्ध हो रही है। 
पाकिस्तान में चाहे किसी की भी सरकार रही हो, कभी भी ‘सुखद समाचार’ जैसी बात नहीं रही। रही बात कश्मीर की, तो पाकिस्तान खुद भी ये बात जानता है कि कश्मीर तो हमें मिलने से रहा, हाँ इस विषय पर भारत का समय-समय पर टशन अवश्य देते रहना है। 
वहीं खालिदा जिया, जो भारत को अपना मित्र नहीं मानती, अनाथ बच्चों का, करोड़ो रुपयों का गबन करने के जुर्म में आज जेल में हैं। 
दुर्गा पूजा के समय हिंदूओं की हत्या के लिए, अब शेख हसीना, अपनी चमड़ी बचाने के लिए, इस घटना को विरोधी पक्ष का कार्य बता कर, लीपा-पोती करने की कोशिश कर रही हैं। 
अंतत: सबसे महत्वपूर्ण बात कि जिस भयंकर घटना को, सरकार ने और तथा-कथित मीडिया ने दरकिनार कर दिया, उसी घटना को, पुरवाई के संपादक श्री तेजेन्द्र शर्मा जी ने गंभीरता से उठाया है । यही उनकी जागरूकता का प्रतीक है । इसके लिए उनकी जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है । ये तो हम 21 अक्तूबर को हुई गोष्ठी में देख ही चुके हैं, सभी विद्वान उनके संपादकीय को कितना पसंद करते हैं। 
संपादक जी, समसामयिक विषयों पर तीव्र नजर रखने के लिए और उन्हें सिलसिलेवार प्रस्तुत करने के लिए साधुवाद।
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डॉ. ऋतु माथुर, प्रयागराज
आदरणीय तेजेन्द्र जी,  आपके बेबाक संपादकीय किसी भी राष्ट्र,समाज, शासन, प्रशासन सम्बन्धी अव्यवस्था को झकझोरने में पूर्णत: सक्षम हैं 🙏
बांग्लादेश में हुए इस अमानवीय कृत्य के पश्चात, हिंदूओं के हितों के संरक्षण पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। हालांकि इस संदर्भ में इस्कॉन समर्थकों द्वारा (प्रयागराज में भी) शांतिपूर्ण विरोध जताया गया है, हिंदुओं के संरक्षण की मांग की गई है ,पर प्रश्न यह उठता है कि मात्र कुछ हिंदू परिषद व मंदिरों से जुड़े लोगों को ही इस प्रकार के घृणित कार्य के विरोध में प्रदर्शन करना पर्याप्त है? क्या इससे समस्याएं हल हो जाएंगी? मेरी समझ से कभी नहीं.. जब तक संपूर्ण राष्ट्र एकीकृत जागृत होकर, जिसमें प्रत्येक वर्ग, धर्म जाति के जन हो,आंदोलित नहीं होता, ऐसी घटनाएं प्रत्येक अल्पसंख्यक वर्ग के साथ घटित होती रहेंगी। इस प्रकार के  जिहादी हमले होते रहेंगे और बेकसूर,मासूम बेमौत मरते रहेंगे। 
विभिन्न राष्ट्रों धर्मों, समुदायों के बीच यह वैमनस्य, क्रूरता पूर्ण कृत्य एक ऐसी विषैली खाद का काम कर रहा है, जिससे शत्रुता का वटवृक्ष अपनी जड़े विस्तृत करने में अत्यधिक सक्षम होगा। धर्मनिरपेक्षता व लोकतंत्र के मूल्य किसी भी राष्ट्र की नींव को सुदृढ़ रखने में मजबूत स्तंभ का कार्य करते हैंऐसे राष्ट्रों को वैश्विक पटल पर जवाबदेही करनी ही होगी, जहां अल्पसंख्यकों के संपूर्ण मान व रक्षा का दायित्व निर्वहन अक्षम सिद्ध हो रहा हो। जो राष्ट्र मानवाधिकार के कर्तव्यों को नहीं निभा सकता, वह स्वयं में एक संपूर्ण राष्ट्र हो ही नहीं सकता क्योंकि फिर तो वह मात्र एक बर्बर कबीले का सरदार ही माना जाएगा!   
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शन्नो अग्रवाल, लंदन
बहुत कठिन समस्या है, तेजेन्द्र जी। 
धर्म के नाम पर हिंसा बेकाबू होती जा रही है। बांग्लादेश में भी काश्मीर की तरह हिंदूओं के विरुद्ध आतंकवाद फैलता जा रहा है। कब तक यह होता रहेगा? और कब यह आतंकवाद समाप्त होगा? सोचती हूँ कि इस बारे में क्या होना चाहिये?
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मधु मेहता, मुंबई
तेजेन्द्र जी, संपादकीय पढ़ा… 
यह समाचार अभी भारत के किसी मीडिया चैनल से नहीं मिला है… या हो सकता है कि कुछ पलों के लिये आकर चला गया हो… धार्मिक और हिन्दू मुद्दों पर है तो किसी राजनीतिक पार्टी कोई फायदा नहीं दिखाई दे रहा होगा… नहीं तो अब तक लोग बंगाल से अयोध्या तक ही पहुंच जाते…! बहुत ही अच्छी तरह से आपने लोगों का ध्यान इस तरफ आकर्षित किया है नहीं तो ऐसे सब मुद्दों को दबा ही दिया जाता है। संपादक जी और पुरवाई के लिए धन्यवाद…

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