पतिदेव ने जैसे ही घर में कदम रखा, पत्नी जी ने मुस्कुराते हुए स्वागत किया, हाथ से बैग लेकर इठलाती हुई बोली – आप हाथ मुहं धोकर आइये, आपके मनपसंद गोभी के पकौड़े बनाये हैं | पिछले कुछ दिन से प्यार भरे स्वागत से खुद को धन्य समझते हुए उल्लसित पतिदेव बाथरूम की और चल दिये | जहाँ हर वक्त बार्डर जैसा माहौल रहता था…. कब दूसरी और से गोलीबारी शुरू हो जाये पता नहीं लगता था, वहां युद्ध शांति जैसा माहौल देख पतिदेव के पांव जमीं पर नहीं पड़ रहे थे, घर का मुखिया क्या होता है आजकल ही पता लग रहा था | ऑफिस में मित्रों के बीच बात छिड़ी तो पता लगा सबके घर लगभग यही माहौल है | कारण पर कौन माथापच्ची करे, पत्नी जी की लटके झटकों के सामने वैसे भी किसका दिमाग चला है, इनके आगे तो देवताओं ने घुटने टेक दिए तो इंसान क्या चीज है |
इधर पत्नी जी भी अत्यंत प्रसन्न हैं.. और क्यों ना हों अपने मिशन के करीब जो हैं | आखिरकार अपने तरकश के सबसे तेज़ तीरों का वार कर करके पति की जेब और दिल दोनों के द्वार इतने खोलने हैं कि पति खुद उनकी मनपसंद ड्रेस और ज्वेलरी दिला डालेंगे | पत्नी जी एकता कपूर की खलनायिका स्टाइल में मन ही मन बातें कर रही हैं “ये मर्द भी ना खुद को कितना समझदार समझते हैं और हम औरतों को कमअक्ल, और बेवकूफ समझते हैं,हमें तो भगवान ना समझ पाए तुम क्या समझोगे | अब हम ठहरी गृहलक्ष्मी और भगवान ने लक्ष्मीजी का वाहन उल्लू को नियुक्त किया है सो बच्चू ………..तुम लोग इस ग़लतफ़हमी से बाहर आ जाओ |

