Saturday, May 18, 2024
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अर्चना चतुर्वेदी की चुटकी – साहित्य के गजनी

गजनी यानी वो लोग जिनकी याद्दाश्त के कनेक्शन कमजोर हों।  इन बेचारों की हार्ड ड्राइव में स्पेस की दिक्कत होती है मेमोरी जल्दी फुल हो जाती है।  इधर किसी व्यक्ति से काम निकला और उधर मेमोरी डिलीट । समाज में तो थे ही पर साहित्य में तो ऐसे लोगों की भरमार है। जब लेखन की दुनिया में प्रवेश करते हैं तब किसी न किसी स्थापित लेखक को पकड़ साहित्य की वैतरणी से पार पाने के रास्ते सीख लेते हैं । पहले लेखक तो फोन करते थे या खुद मिलने पहुंचते थे ।

आजकल तो फ़ेसबुक-वाट्सएप पर ही चक्रव्यूह भेदने का ज्ञान अर्जित कर लेते हैं । ई-मेल आईडी मांगने से प्रक्रिया शुरू होती है उसके बाद लेखन के टिप्स, छपने के टिप्स से लेकर किताब छपने तक रिश्ता पूरी ईमानदारी से टिका रहता है जैसे जैसे साहित्य में पैर जमेंगे एक आध पुरस्कार मिलेंगे, उनकी  मेमोरी ड्राइव में प्रॉब्लम शुरू हो जाती है और वो पिछला सारा अध्याय भूलने लगते  हैं और बाकायदा ये साबित करने पर उतारू हो जाते हैं कि जो भी हासिल  हुआ उनकी प्रतिभा से हुआ ।
इस काम में औरतों को महारत हासिल है । बहनापा / याराना करके सब सीखेंगी उसके बाद अचानक बात करना बंद, फ़ेसबुक पर अमित्र और नजरें चुराना शुरू । आपने उनका साथ दिया, उनको सपोर्ट किया ऐसा उन्हे कुछ याद नहीं रहता बल्कि आपके बारे में उल्टा सीधा बोलना शुरू कर देंगी । आप बैठ कर सिर खुजलाइए और सोचते रहिए ऐसा क्यों हुआ ? 
जब तक आप उनकी किताब में मदद करें या किसी पुरस्कार में नाम न दें  तब तक आपके आगे पीछे सुबह शाम फोन आएंगे जैसे ही ठीक ठाक जगह बनी वैसे तू कौन?  टाइप चेहरा बना इग्नोर कर जाएंगे । 
किसी बुजुर्ग साहित्यकार से बात करेंगे तो दर्द ऐसे छलक पड़ेगा कि आप को भी महसूस होगा “ उस लेखिका ने मुझसे पाँच  साल तक बातें की बहुत कुछ सीखा, उसकी कहानियाँ ठीक करता था मैं, कई कई घंटे फोन पर बातें करती जैसे ही किताब छपी मुझे भूल ही नहीं गई बल्कि मेरे साथ दुर्व्यवहार किया” कुछ तो इतनी पहुंची हुई होती हैं कि सामने वाले से काम न निकले या वो मना कर दे तो कहती फिरेंगी ‘वो तो मुझ पर लाइन मार रहा था’ जबकि टाइम बे-टाइम  बातें ये ही कर रही होंगी ।
कुछ तो इतने पहुंचे हुए होते हैं कि आप उनका कितना भी सपोर्ट करो उन्हे याद नहीं रहता याद सिर्फ उन्हे वो रहता है जो उन्होंने किया । इन गजनियों की वजह से एक सीख तो मिलती है साहित्य हो या समाज अपना दिल घर पर रखें और दिमाग से काम लें लोगों की हरकतों को इग्नोर मारिए और आगे बढ़ जाइए ।
अर्चना चतुर्वेदी
अर्चना चतुर्वेदी
संपर्क - archana.chaturvedi4@gmail.com
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