Tuesday, June 9, 2026
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डॉ. अलका जैन की लघुकथा – करनी का फल

दरवाजे की घंटी बजी । रिया ने दरवाज़ा खोला तो देखा डिलीवरी बॉय ऑनलाइन ग्रोसरी का आर्डर लेकर हाज़िर था । उसने मम्मी को आवाज़ लगाई । मम्मी ने सामान चैक किया और ये देखा कि उसमें एक ऑयल का पैकेट एक्स्ट्रा था जिसकी जानकारी डिलीवरी बॉय को नहीं थी । मम्मी ने उसे जल्दी रवाना किया और सामान को जगह पर रखने लगी ।

रिया बड़े आश्चर्य से देख रही थीउसने कहा – ” मम्मी ! जब आपने मुझसे ये सामान आर्डर करवाया था तो ये पांच किलो वाला ऑयल का पैकेट उसमें नहीं था हम ये वाला तेल काम में नहीं लेते । 500 रुपये के ऑर्डर में ये 800 रुपये के तेल का डिब्बा फ्री कैसे आ सकता हैमम्मी ने कहा – ” तुम चुप रहो । हमें सीधा – सीधा फायदा हो रहा है । ” रिया बोली – “पर मम्मी ! किसी को तो नुकसान होगा । हो सकता है इसकी कीमत बेचारे डिलीवरी बॉय को चुकानी पड़े । ” मम्मी ने उसकी बात को अनसुना कर दिया ।

शाम को जब पापा घर आये तो कुछ उदास दिखाई दे रहे थे । मम्मी ने जब उदासी का कारण पूछा तो पता चला कि उनकी कंपनी ने उन्हें डिलीवरी डिपार्टमेंट के हेड के तौर पर दोषी पाया था । किसी कस्टमर को गलती से एक आई फ़ोन के बजाय दो आई फोन डिलीवर हो गए थे । अब उस आई फ़ोन की कीमत पापा को चुकानी थी यानि 80, 000 रुपये का सीधा – सीधा नुकसान हो गया था । रिया मम्मी की तरफ देख रही थी और मम्मी बिल्कुल चुपचाप ना जाने क्या सोच रही थी । थोड़ी देर बाद  मम्मी ने रिया से सुबह की गलती को सुधारने को कहा । उन्हें समझ में आ गया था कि अपने किए का फल देर – सबेर भुगतना ही पड़ता है ।

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