“एक लेखिका आई थी न सोशल मीडिया पर… वो जिसने अपनी डीपी में आलिया भट्ट की तस्वीर लगाई हुई थी?”
“हाँ…हाँ संजना… संजना नाम था उसका। “लम्बा कश लेकर वह बोला।
“सुंदर बहुत थी यार वो….है न!”
“हम्म….बेहद खूबसूरत…।”कुटिलता से वह बोला।
“अचानक कहाँ गायब हो गई!इतने प्रशंसक थे उसके।मानना पडेगा! सबकी नजरों में चढ़ गई थी उसकी लेखनी।”
“वही तो….उसकी लेखनी..!” धुएं को बाहर छोड़ते हुए उसनें धीरे से कहा।
“क्या मतलब! तुम जानते हो कहाँ है वो?”
“पता नहीं….बहुत दिनों से संपर्क नही हुआ।”
“तुम्हारे साथ ही तो एक्टिव हुई थी लेखन में! सबको पीछे छोड़ दिया था प्रसिद्ध में। और ….तुम्हारी तो उससे अच्छी…।” बात अधूरी छोड़ भेदभरी नजरों से उसे देखा।
“हम्म…हम अक्सर अपनी रचनाओं पर आपस में चर्चा करते थे।…और…।”
“और…!और क्या?”
“वह …इश्क़…इश्क़ करने लगी थी मुझसे।”कमीनेपन से वह बोला।
“और तुम?”
“मुझे किसी और से …।”
“किससे?”
“अपने लेखन के मुकाम से।”सिगरेट को जूते से कुचल कर वह  ठठाकर हँस पड़ा।”
मेरी नजर उसके जूते से रगड़ी हुई सिगरेट पर ठहर गई।पता नहीं क्यों मुझे उसमें, उस लेखिका का चेहरा दिखाई देने लगा।

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