Saturday, May 18, 2024
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गिरिजा नरवरिया की लघुकथा – ममत्व का दान

आज सुबह से ही आशा ने कुछ खाया पिया नहीं, उसको अपने सारे काम जल्दी जल्दी करने की जो पड़ी थी।’ वर अमावस्या ‘ पर वर की पूजा जो करनी थी ,पति की लंबी आयु के लिए ।
 आशा तैयार होकर बरगद के पेड़ के पास ठीक से पहुंच भी नहीं पाई कि उसे देखकर मोहल्ले की औरतें फुसुर-फुसुर कर बतियाने लगी। उनमें से एक महिला बोली “मैंने सुना है कि इसने कुछ पैसों की खातिर अपनी नवजात बच्ची को बेच दिया है।” कोई कहने लगी कि ऐसे लोगों से बच्चे पलते नहीं है तो पैदा क्यों करते हैं? हाय! कैसा जमाना आ गया है।
आशा को भी यह समझने में देर न लगी कि ये सब औरतें मेरे बारे में ही इस तरह बात कर रही हैं। फिर भी आशा हिम्मत करके पूजा करने के लिए आ रही थी। तभी कामिनी के पेट में बात पच नहीं रही थी ,इसलिए उससे पूछे बगैर रहा नहीं गया “आशा मैंने सुना है कि तूने अपनी नन्ही बच्ची को……….. आशा कामिनी की बात को पूरा कहने से पहले ही बोली “बहन तुमने ठीक ही सुना है।हम ठहरे मजदूर एवं गरीब लोग हमारे पास रहने के लिए ना घर है, ना खाने को भरपेट रोटी , जो भी काम मिलता है बस उसी से परिवार की गुजर बसर हो रही है।
 कामिनी ने कहा “तो उसकी सजा अपनी नन्ही बच्ची को क्यों दी”?
 कामिनी बहन पहले से ही मेरे ऊपर चार बच्चों का बोझ है, हम उनकी भी आवश्यकताएं पूरी नहीं कर पाते। हम लोग काम ढूंढने के लिए निकल जाते हैं, तो मेरी बड़ी बेटी का बचपन अपने छोटे भाई बहन को बड़ा करने में ही निकल गया इसलिए अब हम नहीं चाहते कि उसके ऊपर और बोझ बढे। भगवान की लीला भी बड़ी निराली है। उससे जो मांगो वह देता नहीं, जिसकी जरूरत नहीं उसी को बार-बार दे देता है। हम दोनों ठहरे अनपढ़ इस मुसीबत से बचने का कुछ उपाय भी तो नहीं जानते इसलिए ना चाहते हुए भी यह सब हो जाता है।आशा ने गहरी लंबी सांस ली
तो फिर मैंने कौन सा गलत काम किया है मैंने अपनी बेटी को किसी कूड़े करकट या झाड़ियों में तो फेंका नहीं है, ना किसी को बेचा है। “मैंने अपने कलेजे के टुकड़े को दान कर दिया है”। अब तो भगवान से यही प्रार्थना है कि ‘ उस घर में उसे सारी खुशी मिले जो हम कभी नहीं दे पाते।
अब आशा रूआस से कंठ से कुछ कह पाती इससे पहले ही कामिनी के साथ अन्य महिलाओं का भी कलेजा धक्क रह गया।
कामिनी ने आशा को ढांढस बंधाते हुए कहा ” आशा तुमने जो किया वह अपनी बेटी के उज्जवल भविष्य के लिए किया है, बेटियां तो वैसे भी घर का सौभाग्य होती है। तुम्हारी बेटी भाग्यशाली है जो उसको इतना अच्छा घर मिला है। आज हम सब वर पूजा में अपने अपने पति की लंबी आयु के साथ-साथ तुम्हारी बेटी की लंबी आयु की भी कामना करते हैं।”तो आशा की खुशी का ठिकाना न रहाअब आशा की आंखों से आंसू नहीं, उसके सीने से रह-रहकर दूध की धारा बह निकलती है।
गिरिजा नरवरिया
गिरिजा नरवरिया
सहायक प्राध्यापक हिंदी शासकीय महाविद्यालय महगांव भिंड संपर्क - girijanarwaria82@gmail.com
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