Sunday, June 21, 2026
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दिल्ली में व्यंग्य यात्रा सम्मान समारोह

बड़े पुरस्कार संदिग्ध हो रहे हैं, छोटे पुरस्कारों की प्रतिष्ठा बढ़ रही है — ममता कालिया
व्यंग्य यात्रा ने हिंदी व्यंग्य साहित्य को समृद्ध किया है – बालस्वरूप राही
कमल किशोर गोयनका रचनाधर्मी श्रमिक थे — प्रेम जनमेजय
त्यागी जी को देखकर हम उनके जैसा लिखना चाहते थे — हरीश नवल
मुश्किल समय में यह सम्मान मेरे लिए प्रेरक है — पंकज सुबीर
धर्मवीर भारती स्मृति सम्मान मेरे लिए ज्ञानपीठ सम्मान से बढ़कर है — बलराम
व्यंग्य आलोचना क्षेत्र में यह सम्मान अच्छी पहल है — सुभाष चंदर
मैंने कभी शार्टकट नहीं लिया — अर्चना
“परिस्थितियां ऐसी उत्पन्न की जा रही हैं जो हमें लगातार व्यंग्य की ओर धकेल रही हैं। पूरा साम्राज्य अंधेरे और अंधेरे के बीच का है। अंधेरा घिरता जा रहा है। ऐसे अंधेरे में व्यंग्य टॉर्च का काम करता है।आजकल बड़े सम्मान घोषित होते ही बुराई और तमाम लफड़े और हेट कंपेन शुरू हो जाती है। ऐसे समय में छोटे सम्मान प्रतिष्ठित हो रहे हैं। ये एक लेखक द्वारा आयोजित एक लेखक की स्मृति में आयोजित किया जाने वाला सम्मान समारोह है।” ये कथन ममता कालिया का है जो उन्होंने व्यंग्य यात्रा सम्मान समारोह के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में कहीं।
ममता कालिया जी ने प्रेम जनमेजय की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज ऐसे समय में वे पूरे दम-ख़म से पत्रिका निकाल रहे हैं। समय और समाज की स्थितियां ऐसी हो गयी हैं कि एक किताब तो क्या एक ग्रीटिंग कार्ड तक छापना मुश्किल हो गया है।
सम्मान समारोह में रवींद्रनाथ स्मृति शीर्ष सम्मान से हरीश नवल को और सोपान सम्मान से पंकज सुबीर को सम्मानित किया गया। धर्मवीर भारती जन्मशती के अवसर पर पुष्पा भारती के परामर्श से आरंभ किए गए धर्मवीर भारती स्मृति सम्मान से कथाकार बलराम को, व्यंग्य चिंतक सम्मान से सुभाष चंदर और शारदा त्यागी स्मृति सम्मान से अर्चना चतुर्वेदी को सम्मानित किया गया।

सभी सम्मानित साहित्यकारों ने अपने-अपने संक्षिप्त वक्तव्य में त्यागी जी और धर्मवीर भारती को याद किया और कार्यक्रम के गुणवत्तापूर्ण आयोजन की प्रशंसा की। इस अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष बालस्वरूप राही ने धर्मवीर भारती जी से जुड़ी यादों को साझा करते हुए बताया कि किस तरह भारती जी ने उनकी कविता की तारीफ़ की और उनको कवि के रूप में स्थापित होने में सहयोग दिया। इस मौके पर उन्होंने प्रेम जनमेजय द्वारा व्यंग्य यात्रा के माध्यम से व्यंग्य और हिंदी साहित्य को समृद्ध करने के काम की प्रशंसा की। उन्होंने अपने ज्ञानपीठ और साप्ताहिक हिंदुस्तान के दिनों को भी याद किया।
इससे पूर्व, आरंभ में प्रेम जनमेजय ने प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्रद्धेय कमल किशोर गोयनका जी को श्रद्धांजलि स्वरूप शब्द पुष्प अर्पित किए। उन्होंने कहा कि डॉ गोयनका ने प्रेमचंद को सम्पूर्णता में और अलग तरह से प्रस्तुत किया। साहित्य के सक्रिय रचनाधर्मी थे और वे साहित्य श्रमिक की तरह निरंतर काम करते रहे। गोयनका जी ने रवीन्द्रनाथ त्यागी रचनावली तैयार की और उनकी स्मृति में गठित सम्मान समिति के अध्यक्ष के रूप में हमेशा मार्गदर्शन करते रहे।           सम्मान समारोह में व्यंग्य यात्रा के विशेषांक का लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम का सुंदर संचालन रणविजय राव ने किया। इस अवसर पर उन्होंने रवीन्द्रनाथ त्यागी स्मृति व्यंग्य यात्रा सम्मान, शारदा त्यागी स्मृति व्यंग्य यात्रा सम्मान, धर्मवीर भारती स्मृति व्यंग्य यात्रा सम्मान और व्यंग्य यात्रा व्यंग्य चिंतक सम्मानों से अब तक सम्मानित सभी साहित्यकारों का भी उल्लेख किया। सोनी लक्ष्मी राव ने सभी विशिष्ट अतिथियों और सभी सम्मान प्राप्तकर्ताओं का तिलक लगाकर स्वागत किया। धन्यवाद ज्ञापित किया वरिष्ठ साहित्यकार डॉ संजीव कुमार ने। उन्होंने विशिष्ट अतिथियों, सभी सम्मानित साहित्यकारों और सभा में उपस्थित सभी विद्वत जनों तथा साहित्य प्रेमियों के प्रति आभार प्रकट किया।
रपट प्रस्तुति
रणविजय राव
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