बड़े पुरस्कार संदिग्ध हो रहे हैं, छोटे पुरस्कारों की प्रतिष्ठा बढ़ रही है — ममता कालिया
व्यंग्य यात्रा ने हिंदी व्यंग्य साहित्य को समृद्ध किया है – बालस्वरूप राही
कमल किशोर गोयनका रचनाधर्मी श्रमिक थे — प्रेम जनमेजय
त्यागी जी को देखकर हम उनके जैसा लिखना चाहते थे — हरीश नवल
मुश्किल समय में यह सम्मान मेरे लिए प्रेरक है — पंकज सुबीर
धर्मवीर भारती स्मृति सम्मान मेरे लिए ज्ञानपीठ सम्मान से बढ़कर है — बलराम
व्यंग्य आलोचना क्षेत्र में यह सम्मान अच्छी पहल है — सुभाष चंदर
मैंने कभी शार्टकट नहीं लिया — अर्चना
“परिस्थितियां ऐसी उत्पन्न की जा रही हैं जो हमें लगातार व्यंग्य की ओर धकेल रही हैं। पूरा साम्राज्य अंधेरे और अंधेरे के बीच का है। अंधेरा घिरता जा रहा है। ऐसे अंधेरे में व्यंग्य टॉर्च का काम करता है।आजकल बड़े सम्मान घोषित होते ही बुराई और तमाम लफड़े और हेट कंपेन शुरू हो जाती है। ऐसे समय में छोटे सम्मान प्रतिष्ठित हो रहे हैं। ये एक लेखक द्वारा आयोजित एक लेखक की स्मृति में आयोजित किया जाने वाला सम्मान समारोह है।” ये कथन ममता कालिया का है जो उन्होंने व्यंग्य यात्रा सम्मान समारोह के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में कहीं।
ममता कालिया जी ने प्रेम जनमेजय की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज ऐसे समय में वे पूरे दम-ख़म से पत्रिका निकाल रहे हैं। समय और समाज की स्थितियां ऐसी हो गयी हैं कि एक किताब तो क्या एक ग्रीटिंग कार्ड तक छापना मुश्किल हो गया है।
सम्मान समारोह में रवींद्रनाथ स्मृति शीर्ष सम्मान से हरीश नवल को और सोपान सम्मान से पंकज सुबीर को सम्मानित किया गया। धर्मवीर भारती जन्मशती के अवसर पर पुष्पा भारती के परामर्श से आरंभ किए गए धर्मवीर भारती स्मृति सम्मान से कथाकार बलराम को, व्यंग्य चिंतक सम्मान से सुभाष चंदर और शारदा त्यागी स्मृति सम्मान से अर्चना चतुर्वेदी को सम्मानित किया गया।

