Monday, June 29, 2026
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क्या यही ब्रिटेन कभी ग्रेट था?

  • महेश शर्मा

एक  मई सन 1707 में एक्ट्स आफ यूनियन के तहत इंग्लैंड स्कॉटलैंड और वेल्स के विलय से बना ब्रिटेन एवं सन 1801 में विभाजित आयरलैंड को मिलाकर परिवर्तित रूप कहलाया ग्रेट ब्रिटेन अथवा यूनाइटेड किंगडम आज फिर चर्चा का विषय बना हुआ है अचंभित करने वाला तथ्य यह है कि दुनिया के प्राचीनतम लोकतान्त्रिक देश मे  पिछले दस वर्षों मे छटे  प्रधानमंत्री “ कीर स्टामर “ ने अभी अभी अपना इस्तीफा प्रस्तुत कर दिया है अब संभवत: “ एन  डी  वर्ल्डहम “ ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं।

18वीं और 19वीं शताब्दी के दौरान ब्रिटेन का विस्तार दुनिया के लगभग सभी महाद्वीपों में हो गया था उस दौर में ब्रिटिश साम्राज्य पृथ्वी की कुल भूमि के लगभग एक चौथाई हिस्से पर स्थापित हो चुका था, जिसमें भारत कनाडा न्यूजीलैंड अफ्रीका और कैरेबियाई के बड़े हिस्से शामिल थे।  अपने नौ सैनिक और आर्थिक ताकत के कारण वह साम्राज्य जिसे “ कभी सूरज  अस्त नहीं  होता था “ के रूप में जाना गया। लेकिन प्रथम विश्व युद्ध में युद्ध जनित भारी कर्ज और आर्थिक तंगी से ब्रिटिश राजकोष खाली होना शुरू हुआ , और द्वितीय विश्व युद्ध के भीषण काल मे  1939 से 1945 के बीच  ब्रिटेन की सैन्य शक्ति और आर्थिक दृढ़ता कमजोर होती चली गई। युद्ध के बाद ब्रिटेन अपने विशाल साम्राज्य को संभालने में असमर्थ होता गया और  एक-एक करके अपने सारे विजित देशो  से खुद को समेटते  हुए अपने मूल रूप तक आ चुका था। आज का यूनाइटेड किंगडम एक प्रमुख वैश्विक शक्ति जरूर है लेकिन इसके ऐतिहासिक विशाल साम्राज्य के सिमटते सिमटते  इसकी संस्कृति इसकी सभ्यता की परंपराओं मे  भी तेजी से क्षय होना प्रारंभ हो चुका है। ब्रिटेन के निवासी आज किसी बहुत बड़े सुकून से या गर्व से या आत्मिक शांति से नहीं जी रहे हैं वरन  उन्हें एक नई गंभीर वैश्विक समस्या ने बहुत बुरी तरह से अपने शिकंजे  में ले लिया है। ब्रिटेन की वे सड़के जो पहले बहुत शांत हुआ करती थी और रातें खुशहाल होती  थी वे अब बिते दिनों की बाते हो चुकी है।  अब यहाँ की सड़के  उन्मादी भीड़ से भरी हुई है और रातें  दहशत युक्त।पिछले दिनों हुई कुछ घटनाओ  ने ना सिर्फ  लंदन या ब्रिटेन को वरन  सारी दुनिया को अचंभित और चिंता में डाल दिया। कुछ दिनों पूर्व ही वेस्ट लंदन के हाउंसलों क्षेत्र मे पाकिस्तानी  ग्रूमिंग गेंग  के एक मुस्लिम ने एक 14-15 वर्षीय सिक्ख लड़की को बहला फुसलाकर उसका ब्रेन वाश किया और एक बिल्डिंग मे उसे लंबे समय तक कैद करके रखा इस दौरान उसके साथ समूह के कई सदस्यों ने रेप किया। परिवार के और सिक्ख समुदाय के  लोगों द्वारा पुलिस को सूचना देने के बावजूद कोई कार्यवाही न कि जाने पर लगभग 200 सिक्खों ने इकट्ठे होकर उस बिल्डिंग के सामने प्रदर्शन किया जहाँ  वह लड़की केद थी। उन्होंने माईक द्वारा लगातार उस अपराधी समूह से अपनी  बेटी को छोड़ देने के लिए निवेदन किया  प्रार्थना भी की  और ब्रिटिश पुलिस मूक होकर सब देखती रही। सिक्ख समाज के सामूहिक दबाव के बाद पुलिस द्वारा उक्त मुस्लिम युवक को गिरफ्तार कर नाबालिग सिक्ख लड़की को मुक्त कवाया गया। इसी प्रकार अभी हाल ही की एक अन्य घटना मे  एक ब्रिटिश पति-पत्नी अपने बच्ची  को स्कूल छोड़ने जा रहे थे उन्हे  एक मुस्लिम युवा ने टारगेट किया। पुरुष सदस्य के साथ मारपीट की , हमला किया , अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और उस पर चाकू से हमला करते हुए अल्लाह हो अकबर अल्लाह हू अकबर के नारे लगाता रहा।  पूरा परिवार डर गया।उन्हे पुलिस की कोई त्वरित सहायता नहीं मिली।  ये मात्र इक्का  दुक्का घटनाए  नहीं थी। लंदन वर्किंघम  ,ब्रेडफोर्ड  और  अन्य कई शहरों में ऐसी कई घटनाएं लगातार हो रही है जिन पर पुलिस कोई त्वरित कार्यवाहे नहीं करती और आश्चर्य है कि ये  घटनाएं मीडिया द्वारा भी छुपाई  जा रही है। इस खौफनाक सच्चाई से दुनिया के सबसे  सुसंस्कृत  और विकसित कहे जाने वाले ब्रिटेन सहित अन्य यूरोपीय देशों में नजर अंदाज किया जा रहा है , किसी उदारता या महानता या राष्ट्रीय नीति के कारण नहीं बल्कि एक भय  के कारण , एक समुदाय विशेष के भय के कारण।

यह माना  जा सकता है कि अब ब्रिटेन की सड़के , वहाँ  की रोमांटिक शाम और वहां के दिन रात अशांत और बैचेनी  भरे हो चले हैं। अब  वहां कई “ नो गो झोन “ बन चुके हैं जहां  गैर मुस्लिम सामान्य ब्रिटिश तो क्या पुलिस भी जाने से कतराती है , डरती है।  इन शांतिप्रिय समुदाय के लोगों का दखल इतना बढ़ता जा रहा है कि  ब्रिटेन की संसद में भी इनके प्रतिनिधियों की आवाज़ गूंजने लगी है। सामान्य ब्रिटिश कह रहा है कि अब कुछ भी बचना संभव नहीं है। बहुत कुछ बर्बाद हो जाएगा। ब्रिटिश संसद में मुसलमान के मुद्दे मुखर रूप से उठने लगे हैं और ईसाई धर्म पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।

यूरोप महाद्वीप के विकसीत देशो मे महत्वपूर्ण देश ग्रेट ब्रिटेन जिसकी राजधानी लंदन है जो दुनिया का एक सुसंस्कृत सभ्रांत  शहर माना जाता है जहां की जनसंख्या करोड़ों में है जहां के मूल निवासी ईसाई  है और क्रिश्चियन धर्म प्रमुख रूप से है वह ग्रेट ब्रिटेन जो एक समय में दुनिया का सबसे शक्तिशाली साम्राज्य माना जाता था जिसके अधीन एशिया अफ्रीका और यूरोप के अन्य देशों के अलावा भी दुनिया के कई देश उसकी अधीनता में श्वास लेते थे और उसी के फल स्वरुप वर्तमान में भी पूरी दुनिया में ब्रिटिश वेशभूषा , भाषा और जीवनचर्या का प्रभाव दृष्टिगत होता है। एक समय था जब यह संपन्न देश अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ ईसाई बहुल देश माना जाता था।  माना जाता था का क्या तात्पर्य है मैं वही स्पष्ट करने जा रहा हूं कि वह देश जहां की कायदे कानून आचार विचार धर्म और संस्कृति ईसाई बहुल और क्रिश्चियन धर्म से प्रभावित थी वहीं अब पिछले 30 – 40 वर्षों से काफी कुछ बदल चुका है। इस ईसाई बहुल देश में सन  2000  में मुसलमानों  की संख्या लगभग 16 लाख थी और 2011 में यह बढ़कर 28 लाख हो चुकी थी। 2021 में यह आंकड़ा 40 लाख को पार कर चुका था और 2026 में सारे रिकॉर्ड टूट चुके हैं। कुछ शहरों में आबादी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है। लंदन में यह 15 प्रतिशत , ब्रेडफोर्ट  वर्किंघम  और अन्य कुछ शहरों में यह प्रतिशत 30 से ज्यादा है। इस बढ़ोतरी के मुख्य कारण उनके द्वारा बच्चे ज्यादा पैदा करना इसके अलावा अप्रवासन और धर्म परिवर्तन भी मुख्य कारण है कई रिपोर्ट कहती है कि 2050 तक यह प्रतिशत 17 से ऊपर हो जाने की संभावना है।

यानी सो में से 17 लोग मुसलमान। एक छोटे से देश में जातिगत जनसंख्या का यह बदलाव क्या चिंताजनक नहीं है ? स्कूलों में मुस्लिम बच्चे बढ़ रहे हैं। मोहम्मद नाम ज्यादा व्यापक हो रहा है। रहवासी इलाके भी अलग-अलग परिभाषित हो रहे हैं और मुस्लिम बहुल इलाकों को अन्य समुदाय के लिए प्रवेश निषेध घोषित किया जा रहा है जहां लोग जाने से डरते हैं। ब्रिटिश लोग कहते हैं कि यह  देश हमारा है और हम हमारी संस्कृति को बचाना चाहते हैं लेकिन बढ़ती जनसंख्या की वजह से हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं।  सारी सड़कें सारे बाजार , हाउसिंग सोसायटी , स्कूल और हॉस्पिटल सब पर बोझ बढ़ रहा है। हम टैक्स चुकाने  वालों का पैसा अप्रत्याशित अनामंत्रित अतिथियों पर खर्च हो रहा है। सामाजिक एवं जन सांख्यिकी के अलावा राजनीति की बातें करें तो देखा जा सकता है कि कई मुस्लिम प्रतिनिधि ब्रिटिश संसद तक पहुंचने लगे हैं वह भी अच्छी खासी संख्या में। लेबर पार्टी और कंजरवेटिव दोनों में मुस्लिम सांसदों की उपस्थित हो चुकी है। लंदन के मेयर एक  मुसलमान है। लंदन के अलावा भी कई अन्य शहरों में कई काउंसिलों में मुस्लिम प्रतिनिधियों का बहुमत हो रहा है।

 2024 के चुनाव में मुस्लिम वोटो ने राजनीति को बहुत प्रभावित किया है। इन मुस्लिम वोटर्स ने अपने समुदाय के हितों को देखते हुए कुछ खास उम्मीदवारों को सपोर्ट किया। कुछ निर्दलीय मुस्लिम उम्मीदवार जीते भी हैं और संसद में मुस्लिम आवाज भी मजबूती से उठाई  जाने लगी है। यदा कदा कुछ अच्छे काम भी हो रहे हैं लेकिन कई कई बार ऐसी अरुचिकर मुश्किलें आ जाती है जब धर्म को राजनीति में घुसाया  जाता है। शरिया कानून को प्रभावी बनाने के प्रयास किए जाते हैं। कई जगह पर तो शरिया काउंसिल कार्य भी कर रही है जहां उन्ही  के अनुसार विवाद सुलझाए जाते हैं। आम ब्रिटिश लोग डरते जा रहे हैं कि धीरे-धीरे उनका देश इस्लामिकरण की ओर बढ़ता जा रहा है। दैनिक जीवन उपयोगी खाद्यान्न एवं अन्य वस्तुओं के खरीदने में हलाल सर्टिफिकेट और स्कूलों में इस्लामी ड्रेस का दखल बढ़ता जा रहा है|  कैथ्रेडल स्क्वायर में बड़े पैमाने पर ग्रुप बनाकर सड़कों पर  नमाज पढ़ने की घटनाएं बढ़ती जा रही है जिसे आम ब्रिटिश डोमिनेंट फैक्टर के रूप में महसूस करने लगा है। राजनीति में दखल देते हुए मजबूत आवाज़ उठाने से देश की राष्ट्रीय नीतियों पर  प्रभाव होने लगा  है। अप्रवासन पर नियंत्रण कमजोर होता जा रहा है इसके बावजूद इस्लाम फोबिया के नाम पर बोलने पर रोक लगी हुई है और शासन एवम कानून व्यवस्था द्वारा  ब्रिटिश लोगों की चिंता को नजर अंदाज किया जा रहा है। यह विरोध बिना कारण नहीं बढ़ रहा है। सबसे बड़ा बिंदु तो सांस्कृतिक परम्पराएं  जीवन पद्धति और विदेश नीति को लेकर होने वाले टकराव की है। ब्रिटिश संस्कृति का मुख्य तत्व वैचारिक और जीवनचार्य की स्वतंत्रता , स्त्री सम्मान  और स्वच्छंद जीवन शैली पर आधारित है जो इस्लामी जीवन शैली से पूरी तरह से भिन्न है। इस्लामी समुदाय में स्पष्ट रूप से महिलाओं पर पर्दा है , नियंत्रित जीवन है , बहु पत्नी विवाह की परंपरा है और बच्चों की संख्या पर कोई नियंत्रण नहीं है। एलजीबीटी जैसी स्वच्छंद जीवन शैली का मुखर विरोध है और धार्मिक कट्टरता राष्ट्रीय हितों से ऊपर रखी जाती है।  इन वैचारिक विभिन्नताओं  के अलावा सामूहिक अपराध , ब्रिटिश लड़कियों का यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के चलते कई बड़े शहरों में हजारों ब्रिटिश नाबालिग  लड़कियों और युवाओं का शोषण होता  रहा है और हो रहा है जिसमें ज्यादातर दोषी पाकिस्तानी मुस्लिम युवा वर्ग ही  है। और यह युवा वर्ग हमेशा विवादों में ही रहते हैं , ब्रिटेन के राष्ट्रीय कानून के विरुद्ध कार्य करते हैं बल्कि कानून की कोई चिंता नहीं करते हैं। पुलिस और सोशल वर्कर्स भी इन्हें देख कर कुछ रंगभेदी कानून के डर से और कुछ सामूहिक आक्रामकता के भय  से चुप रह जाते हैं। राजनीतिक तुष्टिकरण जो हिंदुस्तान में काफी पूर्व से अपने भयानक रूप में विद्यमान है उसी  तरह ब्रिटेन मे भी अपना रंग दिखला रहा है जिसके चलते राजनीतिक दल अपने हितों के लिए अल्पसंख्यकों की ज्यादतियों  को भी नजरअंदाज कर रहे  हैं। ब्रिटेन की सामाजिक अपराध एवं कानून से संबंधित कई रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि  जेल में मुस्लिम अपराधियों की संख्या बढ़ती जा रही है और वहां पर भी यानी जेल में भी कैदियों के बीच धार्मिक उन्माद का प्रचार किया जा रहा है। इन आक्रामक विचारधारा के चलते कई छोटे-बड़े दंगे कई असामाजिक गतिविधियां  और कई अपराधिक कृत्य  दोहराए जाते रहे हैं। देश के विभिन्न टैक्स से प्राप्त होने वाली आय देश के विकास कार्यों और सामाजिक उत्थान पर खर्च होने की बजाय इन लोगों पर खर्च हो रही है।

 देश के कई स्कूलों में मूल निवासी समुदाय के  छात्रों की संख्या कम होती जा रही है और मुस्लिम छात्रों  का प्रतिशत बढ़ता जा रहा है साथ ही  अपराधों में भी बढ़ोतरी होने लगी है।ब्रिटिश युवा बाहर निकलने से भी डरने लगा है। इन गैर कानूनी विसंगतियों पर शासन, प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जाता है तो जिम्मेदार पुलिस अधिकारी कहते है कि जांच हो रही है लेकिन लोग समझ रहे हैं कि  सच्चाई छुपाई  जा रही है। ऐसी घटनाओ  को मीडिया में भी कवरेज कम दिया जा रहा है ,  जिसका कारण बताया गया कि इन बातों से समाज में वैमनष्यता बढ़ेगी। जबकि इसके पीछे मूल कारण  राजनीतिक मंशा है कि समुदाय विशेष को  नाराज ना किया जाए।  इन सारी प्रतिकूल स्थितियों को देखते हुए अब ब्रिटेन में मूल निवासियों की आवाज बुलंद होने लगी है।  टॉमी रॉबिंसन जैसे लोग आगे आए हैं। छोटे बड़े संगठन बनने लगे हैं रिफॉर्म पार्टी जैसे राजनीतिक लोग भी अप्रवासन नियंत्रण की आवाज उठाने लगे हैं।

ब्रिटेन के कुछ उदारवादी बुद्धिजीवि चिंतित है  कि क्यों कुछ लोग बिल्कुल सबसे अलग रहना चाहते हैं क्यों चारों तरफ नफरत का पैगाम फैला रहे हैं। इसी दौरान होने वाले कई सर्वे में ब्रिटिश लोगों की स्पष्ट राय है कि इस्लाम का यह विस्तार  ब्रिटिश लोगों के लिए बहुत खतरनाक होता जा रहा है। कट्टरता  से महिलाओं को पर्दे में रखना , एक से अधिक शादियां करना , कई कई बच्चे पैदा करना तो ब्रिटिश सामाजिकता से विपरीत है ही इसके  अलावा जब-जब यह मुसलमान प्रतिनिधि राजनीति में प्रवेश करते हैं तो वहां उठने वाली आवाज़ देश की विदेश निती के लिए भी परेशानियां पैदा करने  लगती है। गाजा  और फिलिस्तीन , शरिया और इस्लाम तथा ईजराइल से राजनैतिक संबंध जैसे मुद्दे उठने लगते हैं। कुछ सांसदों पर यह आरोप भी लगने लगा है कि वह अपने देश और समाज के विकास से ज्यादा चुनाव को  प्रभावित करने  वाले समुदाय विशेष का ध्यान रखने लगे हैं। यानी वही राजनैतिक नजरिया जिससे भारत देश भी परेशान है । भारत की तरह ब्रिटेन मे भी विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के द्वारा चुनावी लाभ के लिए विभिन्न अल्पसंख्यकों को लुभाने वाले देश के अहित में जाने वाले भी वादे किए जाते हैं।  यह भी देखने में आया है कि स्कूलों में अब इस्लामी प्रभाव बढ़ गया है अधिकांश स्कूलों में तो क्रिसमस तक मनाना बंद हो चुका है। लड़कियों की अलग क्लास लग रही है। हलाल मिट को जबरन थोपा जा रहा है। कुछ स्थानों पर महिलाओं के अधिकार प्रतिबंधित किये जा रहे हैं। जबरन निकाह हलाला आदि की बढ़ती प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाने में भी स्थानीय पुलिस हिचकिचा रही है बल्कि  इस तरह की हर सच्चाई को छुपाने के प्रयास किया जा रहे हैं।

सारी दुनिया देख रही है और समझ रही है ब्रिटेन की वे सड़के जो पहले शांत और मनोरम हुआ करती थी अब डर भी रही हैं और चीख चिल्ला भी रही है। रात्रि कालीन दुर्घटनाएं बढ़ती जा रही हैं और आम ब्रिटिश वासी  उससे भयभीत है। समुदाय विशेष की ज्यादतियों की शिकायत करने पर पुलिस आएगी और  अपराधियों पर अंकुश लगाएगी इस पर भी सामान्य जनों को संशय है। अल्लाह हू अकबर की गूंज कई कई जगह मौके बे  मौके सुनाई दे जाती  है जो दहशत फैलाती है , और यदि ब्रिटिश लोग इसके प्रति  विरोध  जताते हैं तो उन पर रेसिजम का (रंगभेद का ) आरोप लगाया जाता है। ब्रिटिश वैल्यूज वर्सिज इस्लामी वैल्यूज पर चर्चाएं सामान्य होती जा रही है। लंदन के मेयर सादिक खान पर कई आरोप है। साप्ताहिक नमाज सड़कों पर खुले आम सामूहिक रूप से पढ़ी जाने के कारण ट्रैफिक जाम होने की  कई कई घटनाएं होती रहती हैं जिन्हें पुलिस द्वारा बिल्कुल  नहीं रोका जाता यदि यही रफ्तार रही तो यह अंदेशा है कि 2050 तक भूतकाल में ग्रेट ब्रिटेन कहलाने  वाले इस उन्नत सुसंस्कृत और सुसभ्य  देश का पूरा नक्शा ही बदल जाएगा। यह भय आज के समय मे ब्रिटेन के अलावा यूरोप के अन्य देशों मे भी समान रूप से आ खड़ा हुआ है। विश्लेषकों का मत है कि पूर्व काल मे जिस मजहब को तलवार की नोक पर हिंसा  का सहारा लेकर फैलाया गया था वही मजहब अब लोकतान्त्रिक तरीके से विभिन्न देशों की डेमोग्राफी तेजी से बदलते हुए अपने पाँव पसारने लगा है।

  • महेश शर्मा
    सेवा निवृत बेंक अधिकारी, लघुकथा, कहानी, गीत, गज़ल, कविता जैसी विधाओं में लेखन। दो कहानी संग्रह 1.हरिद्वार के हरी और 2.आखिर कब तक, एक गीत संग्रह ‘मैं गीत किसी बंजारे का’ दो उपन्यास 1.एक सफ़र घर आँगन से कोठे तक 2.अँधेरे से उजाले की और प्रकाशित
    मो न 9340198976
    ईमेल –mahesh [email protected]
    पता: 102 पेराडाइज होम्स मोहसीन लेन, सरफराज गंज एरा कालेज के सामने, लखनऊ, पिन 226003 उत्तर प्रदेश
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